भाजपा के प्रभावी जाट नेता मनोज प्रधान अब बसपा में, मुनकाद अली ने दिलाई सदस्यता

बसपा में कई बार उतार-चढ़ाव के बाद पांच अक्टूबर को फिर से राष्ट्रीय संयोजक बनाए गए मायावती के भतीजे आकाश आनंद अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय हो गए हैं। पार्टी में वापसी के बाद उनकी पहली बड़ी जनसभा/कार्यकर्ता सम्मेलन 28 अक्टूबर को बुलंदशहर के अनूपशहर विधानसभा क्षेत्र के खालौर स्टेडियम में आयोजित होगा। यहीं से वे अपना चुनावी शंखनाद करेंगे और इस सीट पर बसपा के प्रभारी/प्रत्याशी का नाम भी घोषित करने की संभावना है।खोई जमीन वापस पाने के लिए बसपा विधानसभावार विभिन्न जातियों के प्रभावशाली नेताओं को पार्टी में शामिल करने का प्रयास तेज कर रही है। इसी कड़ी में अनूपशहर क्षेत्र के भाजपा नेता मनोज प्रधान (या मनोज कुमार प्रधान) का नाम सामने आया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी और पूर्व सांसद मुनकाद अली ने उन्हें खालौर में ही बसपा की सदस्यता दिलाई। मनोज प्रधान जाट समुदाय से आते हैं और क्षेत्र में अपना अच्छा प्रभाव रखते हैं। उनकी पत्नी जहांगीराबाद ब्लॉक प्रमुख हैं और वे खालौर गांव के निवासी हैं। उनके भाजपा छोड़कर बसपा में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर भाजपा की मुश्किलें बढ़ने की बात कही जा रही है।अनूपशहर सीट का राजनीतिक इतिहास भी दिलचस्प रहा है। 2007 और 2012 में बसपा के गजेंद्र सिंह (चौधरी गजेंद्र) यहां से विधायक चुने गए थे। लगातार दो हार के बाद उन्होंने 2022 में कांग्रेस से चुनाव लड़ा और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। 2017 और 2022 दोनों बार भाजपा के संजय शर्मा ने इस सीट से जीत हासिल की थी।2017 के चुनाव में भी बसपा इस सीट पर दूसरे नंबर पर रही थी।
अनूपशहर सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनाव का परिणाम:
2017 के विधानसभा चुनाव में अनूपशहर सीट पर भाजपा के संजय कुमार शर्मा विजेता रहे थे। उन्होंने 1,12,431 वोट (49.28%) हासिल किए। दूसरे स्थान पर बसपा के गजेंद्र सिंह रहे, जिन्हें 52,117 वोट (22.84%) मिले, जबकि तीसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के सैयद हिमायत अली 48,610 वोट (21.31%) के साथ रहे। संजय कुमार शर्मा ने 60,314 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।
2022 के चुनाव में भी संजय कुमार शर्मा भाजपा के टिकट पर विजयी रहे। उन्होंने 1,25,602 वोट (52.64%) प्राप्त किए। दूसरे स्थान पर बसपा के रामेश्वर रहे, जिन्हें 47,979 वोट (20.11%) मिले। तीसरे स्थान पर एनसीपी के के. के. शर्मा 44,180 वोट (18.52%) के साथ रहे, जबकि चौथे स्थान पर कांग्रेस के गजेंद्र सिंह को 13,321 वोट (5.58%) मिले। इस बार संजय कुमार शर्मा ने बसपा के रामेश्वर को 77,623 वोटों के बड़े अंतर से हराया।

समाजवादी पार्टी भी यहां मुकाबले में रहती रही है। पार्टी सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, यदि मुस्लिम मतदाता बसपा के साथ आए तो ओबीसी, दलित और मुस्लिम गठजोड़ से इस सीट पर घमासान तय माना जा रहा है। बसपा खोई जमीन वापस पाने के लिए हर संभव प्रयास में जुटी दिख रही है।आकाश आनंद की आगे की सभाओं का शेड्यूल भी जारी हो चुका है। 28 अक्टूबर को अनूपशहर (खालौर) के बाद 2 नवंबर को सहारनपुर के नकुड़, 20 नवंबर को अयोध्या के बीकापुर, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर को कानपुर के बिल्हौर में उनकी जनसभाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 26 नवंबर को पंजाब और 6 दिसंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार में भी कार्यक्रम तय हैं। बसपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के राजनीतिक दांव-पेंच पर सभी पार्टियां नजर रखे हुए हैं। आकाश आनंद की यह सक्रियता पार्टी के आंतरिक समीकरणों और 2027 की तैयारियों दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मायावती के मास्टर स्ट्रोक चौंकाने वाले हो सकते हैं, यह बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। अनूपशहर से शुरू हो रहा यह अभियान बसपा की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है। ऊँट किस करवट बैठेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
