Ved Next Gen Expo 2026: learning में fun

सिवाया स्थित Ved International School में रविवार को “Ved Next Gen Expo 2026” का भव्य और उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। इस एक्सपो में science, technology और academic innovation का अनोखा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, innovation की भावना और रचनात्मक कौशल को बढ़ावा देना था। नर्सरी से लेकर कक्षा […]

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Ved Next Gen Expo – First Edition

Meerut में experiential और future-ready learning का बड़ा academic initiative Ved International School द्वारा 1 March 2026 को school campus में एक बड़े academic event Ved Next Gen Expo का आयोजन किया जा रहा है। यह expo experiential learning, innovation और student-led education model को showcase करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। […]

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भारतीय विज्ञान में महिलाएँ: साक्ष्य वास्तव में क्या बताते हैं

मेहर ए आलम ख़ान , सलाहकार, सिनेइंक पॉडकास्ट्स, लंदन, मुख्य संपादक , मासिक नर्सरी टुडे , नई दिल्ली हर वर्ष 11 फ़रवरी को संयुक्त राष्ट्र ‘विज्ञान में महिलाओं और बालिकाओं का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ मनाता है। इसका उद्देश्य विश्वभर में वैज्ञानिक शिक्षा और रोजगार में लैंगिक पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करना है। यह दिवस प्रायः कार्रवाई […]

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ग्रामीण भारतीय महिलाएं: हरे भरे भविष्य की बुनियाद

अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस (International Day of Rural Women) पर विशेष मेहर-ए-आलम ख़ानसलाहकार, सिनेइंक पॉडकास्ट्स, लंदनमुख्य संपादक, नर्सरी टुडे, नई दिल्ली हर वर्ष 15 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस (International Day of Rural Women) मनाया जाता है, ताकि उन महिलाओं के योगदान को सम्मान दिया जा सके जो ग्रामीण इलाकों में रहकर अपनी मेहनत […]

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पौधशालाओंमेंयुवाओंकीभागीदारी: भारत के हरे-भरे भविष्य के लिए ज़रूरी

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष मेहर ए आलम ख़ान मुख्य संपादक, ‘नर्सरी टुडे’, नई दिल्ली सलाहकार, सिनेइंक पॉडकास्ट्स, लंदन हर साल 12 अगस्त को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय  युवा दिवस (International Youth Day) मनाती है—यह दिन संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा युवाओं के वैश्विक प्रगति में योगदान को मान्यता देने के लिए निर्धारित किया गया है। इस […]

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आईएएमआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा ‘सृजन’ ओरिएंटेशन प्रोग्राम का भव्य शुभारंभ

गाजियाबाद: आईएएमआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने 7 दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम ‘सृजन’ का भव्य शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए विद्यार्थियों को मीडिया जगत की बारीकियों से परिचित कराना और उन्हें पत्रकारिता के बदलते परिवेश के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम के पहले दिन के मुख्य वक्ता ‘दैनिक अथाह’ […]

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अमर क्रान्तिकारी बाबा शाहमल सिंह जाट

लेखक- डा. सुशील भाटी सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में 4 जुलाई को पांचली और 9 जुलाई को सीकरी में हुई शहादत के बाद, मेरठ के आसपास माहौल कुछ शान्त हुआ, तो अंग्रेजों पश्चिम की ओर मुडे जिससे कि वे दिल्ली की फील्ड फोर्स के साथ अपने संचार को सुरक्षित कर सकें। बागपत में यमुना […]

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‘फाइनल फुटप्रिंट’: यादों, भावनाओं और नए सफर की शानदार सांस्कृतिक विदाई

आईएएमआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने बीएजेएमसी (2022–25) बैच के लिए विदाई समारोह फाइनल फुटप्रिंट का आयोजन कर एक यादगार शाम रच दी। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि छात्रों की भावनाओं, शिक्षक–छात्र संबंधों और भविष्य के सपनों का एक खूबसूरत संगम था। फेयरवेल की इस शाम में जहाँ एक […]

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आम— भारत की गौरवशाली विरासत

लेखक : मेहर-ए-आलम ख़ान मुख्य संपादक ‘नर्सरी टुडे’ वरिष्ठ पत्रकार, कम्युनिकेशन एक्सपर्ट , स्वास्थ्य, पर्यावरण और उर्दू साहित्य पर लेखन व प्रसारण में चार दशकों का अनुभव। ‘सिनेइंक पॉडकास्ट्स’ से भी जुड़े हैं । भारत में जुलाई का महीना आम के मौसम की पराकाष्ठा का प्रतीक है।यही वह समय है जब देश में आम का सर्वाधिक जश्न मनाया जाता है।दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में आम महोत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य आम की विविधता और  महिमा को प्रदर्शित करना, आम-संस्कृति, आम-व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देना, आम-निर्यात को प्रोत्साहित करना और सबसे बढ़कर भारत कीएक अत्यंत प्रिय धरोहर का उत्सव मनाना होता है। फलों का राजा कहलाने वाला आम भारत की अद्भुत सांस्कृतिक संपन्नता और आनंददायक विविधता का जीवंत प्रतीक है। यह स्वादिष्ट फलभारत के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। यह सदियों से भारतीय जनमानस के हृदय और स्वाद पर राज करता आ रहा है। कुछ जीवाश्म प्रमाणों के आधार पर पुराजीव वैज्ञानिक मानते हैं कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आम लगभग 25 से 30 मिलियन वर्ष  (कुछ मतों केअनुसार 60 मिलियन वर्ष) पहले से मौजूद है।) भारत में आम की व्यवस्थित खेती का इतिहास चार हजार वर्षों से भी अधिक पुराना है, जबकि पश्चिमी जगत में आम केवल चार सौ वर्ष पूर्व ही  पहुंच पाया।आज भारत न केवल आम का जन्मस्थल है, बल्कि आम उत्पादन में विश्व में अग्रणी भी है। यही कारण है कि भारत को “आमों की धरती” भी कहा जाता है। आम तीन देशों – भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस – का राष्ट्रीय फल है। बांग्लादेश में आम का पेड़ राष्ट्रीय वृक्ष का दर्जा प्रखता है। भारत के अलावा चीन, थाईलैंड, मैक्सिको, पाकिस्तान, फिलीपींस, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, ब्राज़ील, नाइजीरिया, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन  आदि देशों में भी आम पैदा होता है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में भी आम का विशेष स्थान है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों जैसे प्राचीन ग्रंथों में आम का उल्लेख मिलता है।वैदिक साहित्य में आम को ‘सहकरा’ या ‘सहकारा’ कहा गया है।पुराणों और उपनिषदों में आम के पेड़ों की कटाई को सख्त मना कियागया है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में आम को कल्पवृक्ष कहागया है – ऐसा वृक्ष जो सभी मनोकामनाएं पूरी कर सकता है। हिंदूपरंपराओं में आम के पेड़ को पवित्र माना जाता है। आम के पत्तों कीतोरण द्वारों पर लगाई जाती है और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका उपयोगशुद्धता और दिव्यता के प्रतीक के रूप में किया जाता है। विवाह, दीपावली और पूजा-पाठ के अवसरों पर आम के पत्तों की तोरणसजावट का आम दृश्य है। यहाँ तक कि हवन में भी आम की लकड़ी का उपयोग होता है। बौद्ध साहित्य में भी आम के पेड़ और फल की पवित्रता का उल्लेख है।बौद्ध मान्यता में आम को ज्ञान और उदारता का स्रोत माना गया है। एकप्रसिद्ध कथा के अनुसार आम्रपाली नामक राजनर्तकी और भगवान बुद्धकी भक्त ने उन्हें एक आम का बाग़ उपहार स्वरूप दिया था जहाँ वे […]

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अंतर्राष्ट्रीय योग संगोष्ठी में गूंजा भारत का योग-दर्शन

संपूर्ण विश्व को जोड़ने वाला सांस्कृतिक सेतु है योग: डॉ. के.के. सिंह मेरठ, 8 जून 2025:सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आज अंतर्राष्ट्रीय योग संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय ने यह आयोजन विदेशी संस्थाओं के सहयोग से किया, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित योग विशेषज्ञों ने सहभागिता की। संगोष्ठी का आयोजन पशु […]

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