लोकतंत्र सेनानी जेपी हुए मौन ! 

वेस्ट यूपी Politics साक्षात्कार

 

96 वर्ष की आयु मेंचौधरी जयपाल सिंह नौरौजपुर का निधन 

चौधरी साहब की धारा का ध्रुवतारा अस्त 

डॉ. रवींद्र प्रताप राणा

मेरठ 22 मार्च  2026 

भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक शिष्य, लोकतंत्र सेनानी चौधरी जयपाल सिंह नौरौजपुर ने रविवार 8 मार्च 2026 की सुबह इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 96 वर्ष से अधिक आयु के चौधरी जयपाल सिंह का जन्म वर्ष 1930 में तत्कालीन मेरठ जिले के नौरौजपुर गुर्जर गांव में  स्वतंत्रता सेनानी और जिला बोर्ड के सदस्य चौधरी भीम सिंह के घर हुआ था। उच्च शिक्षित चौधरी जयपाल सिंह ने एम.ए. की डिग्री प्राप्त की और जीवनभर सामाजिक तथा राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनसेवा को अपना धर्म माना। वे किसान नेता भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की विचारधारा के      सच्चे अनुयायी और क्षेत्र में उस धारा के सबसे मजबूत सिपाहियों में गिने जाते थे। उनके दुनिया को अलविदा कहने की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक छा गया। 

 बागपत जिले के गांव नौरौजपुर गुर्जर में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। चौधरी जयपाल सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया   गया और उनके बड़े पुत्र सतपाल सिंह ने मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के समय जिले भर से बड़ी संख्या में लोग नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

चौधरी जयपाल सिंह को चौधरी चरण सिंह का करीबी माना जाता था।चौधरी चरण सिंह के कहने पर उन्होंने पीसीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना और किसानों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष का जीवन अपनाया।

माया त्यागी कांड के विरोध में हुए ऐतिहासिक आंदोलन में वे गंभीर रूप से घायल हुए और लंबे समय तक जेल में भी रहे। आपातकाल के दौरान भी वे आंदोलन में सक्रिय रहे और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल गए।

कौरवी बोली के साथ हिंदी उर्दू और अंग्रेजी पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी। नफ़ासत और करीने से रहना उनका विशेष गुण था। सियासत में उन्होंने      अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। चौधरी चरण सिंह के जीवन और उनके दौर की सियासत के दिलचस्प किस्से वे इस उम्र में भी पूरे जोश के साथ    सुनाते थे। संबंधों को निभाने की कला उनमें अद्भुत थी।

गोरा रंग, इकहरा बदन और कड़क आवाज़ उनकी पहचान थी। बात करते समय वे कहावतों, मुहावरों और किस्से कहानियों का बखूबी इस्तेमाल करते थे जिससे उनकी बातों में एक अलग ही रस आ जाता था।

चौधरी जयपाल सिंह के अंतिम संस्कार के समय धर्मपाल सिंह रमाला चेयरमैन, तेजपाल सिंह पिलौना, धर्मपाल सिंह बाघू, ओमप्रकाश प्रधान, प्रोफेसर धीरेंद्र सिंह सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे और उन्हें अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर तेजपाल सिंह पिलौना और लोकतंत्र सेनानी धर्मपाल सिंह बाघू ने कहा कि चौधरी जयपाल सिंह पूरे इलाके में बाबूजी के नाम से मशहूर थे।

भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने कहा कि बाबूजी के नाम से ही यह इलाका जाना जाता था।

राष्ट्रीय लोक दल के नेता विश्वास चौधरी ने कहा कि चौधरी जयपाल सिंह भारत रत्न चौधरी चरण सिंह और आज की पीढ़ी के बीच एक महत्वपूर्ण वैचारिक कड़ी थे।

समाजवादी पार्टी के नेता नागेंद्र सिंह ने उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

अंतिम संस्कार के समय धर्मपाल सिंह रमाला चेयरमैन, तेजपाल सिंह पिलौना, धर्मपाल सिंह बाघू, ओमप्रकाश प्रधान, प्रोफेसर धीरेंद्र सिंह सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे और उन्हें अंतिम विदाई दी।

चौधरी जयपाल सिंह के परिवार में उनकी पत्नी चंद्रवती, पुत्र सतपाल सिंह और यशपाल सिंह तथा चार पौत्र हैं। उनके बड़े भाई साहब सिंह भी लोकतंत्र सेनानी रहे हैं।

चौधरी जयपाल सिंह का जाना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति और लोकतांत्रिक आंदोलनों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के टूटने के रूप में देखा जा रहा है।

चौधरी जयपाल सिंह

(लोकतंत्र सेनानी )

जन्म – सन 1930

ग्राम – नौरौजपुर गुर्जर , तहसील – बागपत
जनपद – बागपत (उ०प्र०)

चौधरी जयपाल सिंह का जन्म स्वतंत्रता सेनानी और जिला बोर्ड के सदस्य चौधरी भीम सिंह के प्रतिष्ठित राजनीतिक एवं सामाजिक परिवार में हुआ।परिवार के संस्कारों और सामाजिक वातावरण का प्रभाव इनके व्यक्तित्व पर प्रारम्भ से ही दिखाई देता था।

शैक्षिक योग्यता

हाईस्कूल – 1948

इंटरमीडिएट – 1950

स्नातक – 1952
आगरा विश्वविद्यालय, आगरा
(एस.एस. डिग्री कॉलेज, गाजियाबाद)

परास्नातक – 1955
आगरा विश्वविद्यालय, आगरा
(एस.एस. डिग्री कॉलेज, गाजियाबाद)

प्रारम्भिक जीवन एवं प्रेरणा

सन 1952 में चौधरी जयपाल सिंह ने यूपी पीसीएस की परीक्षा दी तथा उसमें सफलता प्राप्त की। साक्षात्कार के बाद इनका चयन भी हो गया था, किन्तु किसान नेता चौधरी चरण सिंह जी की इस बात से प्रभावित होकर कि यदि किसानों के पढ़े-लिखे बच्चे नौकरी में चले जाएंगे तो किसानों की आवाज उठाने वाला कौन रहेगा, इन्होंने स्वेच्छा से पीसीएस की नौकरी को ठुकरा दिया और जनसेवा तथा किसान हितों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

राजनीतिक जीवन में प्रवेश

सन 1952 में स्नातक करते हुए ही इन्हें छात्र संघ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके बाद 1953 में इन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और मण्डल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने।

सन 1955 में जिला कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने तथा 1957 में जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव चुने गये।

सन 1959 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। इस अधिवेशन में चौधरी चरण सिंह जी के साथ मिलकर सहकारी खेती के प्रस्ताव का विरोध किया और किसानों के हित में इस प्रस्ताव को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सन 1961 में प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने तथा 1965 में प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य बने।

मेरठ की ऐतिहासिक सभा

मेरठ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने भाग लिया। बैठक में उन्होंने चौधरी चरण सिंह के विषय में कहा कि यदि पार्टी में रहना है तो पार्टी के नियमों के अनुसार चलना होगा, अन्यथा उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

उस समय चौधरी जयपाल सिंह सबसे पहले खड़े हुए और प्रधानमंत्री के विरोध में नारा लगाया—

चौधरी चरण सिंह जिंदाबाद।
कांग्रेस जवाहर लाल नेहरू की जायदाद नहीं है।”

यह घटना उनके साहस और सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राजनीतिक संघर्ष और आंदोलन

सन 1967 में चौधरी चरण सिंह के साथ कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया और उसके बाद भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) तथा राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) में विभिन्न पदों पर रहकर सक्रिय रूप से कार्य करते रहे।

सन 1975 में देश में आपातकाल के दौरान कांग्रेस के विरोध में इन्होंने अपने 12 साथियों के साथ नारे लगाते हुए गिरफ्तारी दी और जेल गए। लगभग एक वर्ष बाद 26 जून 1976 को रिहा हुए।

सन 1980 में हुए माया त्यागी काण्ड के विरोध में चले आन्दोलन के यह संयोजक रहे। इस आन्दोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज में इन्हें गंभीर चोटें आईं। उनकी तीन पसलियाँ तथा कूल्हा फ्रैक्चर हो गया और तीन दाँत भी टूट गए।

आगे का सार्वजनिक जीवन

सन 1996 में इन्होंने आरएलडी को छोड़ दिया और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

सन 2002 में भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय राजनीति से अलग हो गए। उसी वर्ष जाट महासभा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष तथा बाद में वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर आसीन होकर 2014 तक निरंतर समाज सेवा और संगठनात्मक कार्य करते रहे।

सन 2014 के बाद शारीरिक अस्वस्थता के कारण उन्होंने सक्रिय राजनीति से स्वयं को अलग कर लिया, किन्तु सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी निरंतर बनी रही। उन्होंने समाज के विभिन्न कार्यों में बढ़-चढ़ कर योगदान दिया और जनसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाए रखा।

चौधरी जयपाल सिंह का जीवन संघर्ष, साहस, सिद्धांतों और किसान हितों के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है।

COATs

सियासत के एक बड़े अध्याय का अंत

चौधरी जयपाल सिंह नौरोजपुर  के निधन पर क्षेत्र के अनेक राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया और इसे सियासत के एक बड़े अध्याय का अंत बताया।

एक अच्छा मित्र और सच्चा राजनीतिक कार्यकर्ता खो दिया

चौधरी जयपाल सिंह नौरोज़पुर से मेरा बहुत पुराना साथ रहा। उनसे उम्र में बड़े स्वतंत्रता सेनानी रघुवीर शास्त्री ज़ीवाना से भी उनका गहरा संबंध था। उनका परिवार बेहद सुसंस्कृत और सम्मानित रहा है। उनके पुत्र सत्यपाल से भी समय-समय पर मेरी बातचीत होती रही।

माया त्यागी कांड के समय का आंदोलन आज भी याद है। उस दौर में 11 विधायक थे, जिनमें दो चौधरी साहब के साथ थे। सत्याग्रह के दौरान पुलिस ने राइफलों के कुंदों से हमला किया, उनकी पसलियां तक टूट गईं। उस समय मैं उन्हें बचाने के लिए उनके ऊपर गिर पड़ा था, मेरे कपड़े भी खून से सन गए थे। बाद में उन्हें पी.एल. शर्मा अस्पताल में भर्ती कराया गया।

टिकट मिलने के बाद वे मुझसे मेरठ में मिलने आए थे, लेकिन करीब एक घंटे बाद ही टिकट बदल दिया गया। वे सच्चे चौधरी चरण सिंह वादी और खरे राजनेता थे।

पिछले वर्ष 8 मार्च को भी उनसे मुलाकात हुई थी। आपातकाल के दौरान भी वे जेल गए। उनका व्यक्तित्व साफ, संघर्षशील और समाज के प्रति समर्पित था। उनके निधन से समाज ने एक अच्छा मित्र और सच्चा राजनीतिक कार्यकर्ता खो दिया है।

— चौधरी नरेंद्र सिंह एडवोकेट, पूर्व विधायक छपरौली

जयपाल सिंह रोज़ पैदा नहीं होते…

चौधरी जयपाल सिंह नौरोजपुर से सत्यपाल मलिक के 1974 के विधानसभा चुनाव में प्रचार के वक्त मेरा परिचय हुआ । चौधरी जयपाल सिंह और प्रोफेसर महक सिंह क़रीबी दोस्त थे । ये दोनों सबसे ज़्यादा सक्रिय और प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं में थे । आपातकाल में भी ये भी जेल में थे और मैं भी , तो प्रगाढ़ता और बढ़ी । उन इलाक़ों में राजनीतिक विचारधारा के तौर पर मज़बूत , उन सवालों पर जो आंदोलनों के सवाल थे , चौधरी चरण सिंह के सवाल थे उन पर जयपाल सिंह का नज़रिया सबसे स्पष्ट था । समाज परिवर्तन के सवालों पर उनकी प्रतिबद्धता अलग दिखाई देती थी । चौधरी साहब के समर्थक क्यों हैं इस पर उनका दिमाग़ राजनीतिक सवालों पर बड़ा साफ़ रहता था । मेरा उनसे निरंतर संपर्क बना रहता था । हर हफ़्ते वो फ़ोन करते थे । मेरी राजनीतिक यात्रा को लेकर वो प्रसन्न रहते थे । चौधरी चरण सिंह के विचारों के क़रीब जो धारा थी उसके वो अंतिम आदमी थे। जयपाल सिंह रोज़ पैदा नहीं होते उसके लिए कुर्बानी देनी पड़ती है कई संघर्ष करने पड़ते हैं। वो सारी परीक्षाओं में पास हुए ।

के. सी. त्यागी, पूर्व सांसद

निस्वार्थ योगदान सदैव स्मरणीय

ग्राम नौरोजपुर गुर्जर (बागपत) पहुंचकर लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय चौधरी जयपाल सिंह जी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। शोक की इस घड़ी में उनके पुत्रों श्री सतपाल जी एवं श्री यशपाल जी सहित समस्त शोकाकुल परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए चौधरी साहब का संघर्ष और समाज के प्रति उनका निस्वार्थ योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।

डॉ. राजकुमार सांगवान, सांसद बागपत

मेरे लिए एक बड़ी क्षति

लोकतंत्र सेनानी चौधरी जयपाल सिंह जी (नौरौजपुर) जी ने 8 मार्च 2026 की सुबह  अंतिम सांस ली। वे 97 वर्ष के थे।

चौधरी जयपाल सिंह जी का पूरा जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा का उदाहरण रहा। वे शायरी के बड़े शौकीन थे, हमेशा हर बात को शायरीनुमा अंदाज में पेश करते थे l

जयपाल सिंह बाबू जी का मुझे आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन मिलता रहा l उनका जाना समाज और मेरे लिए एक बड़ी क्षति है l

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे!

डॉ. सत्यपाल सिंह, पूर्व सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री

ईमानदारी और संबंधों को निभाना सबसे बड़ी पहचान

चौधरी चरण सिंह जी के राजनीतिक शिष्य, लोकतंत्र सेनानी एवं किसान हितों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी जयपाल सिंह नौरोजपुर जी के निधन का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ।

उन्होंने 96 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनका पूरा जीवन समाज, किसानों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित रहा।

माया त्यागी कांड के विरोध में हुए ऐतिहासिक आंदोलन और आपातकाल के दौरान भी वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्षरत रहे तथा जेल यात्राएं कीं। सादगी, ईमानदारी, उसूलों पर अडिग रहना और संबंधों को निभाना उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान थी।

उनका निधन सामाजिक और राजनीतिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करे।

डॉ. अजय कुमार, विधायक छपरौली

एक युग का अंत

चौधरी जयपाल सिंह उच्च आदर्शों वाले नेता थे और चौधरी चरण सिंह के पक्के अनुयायी थे। उनका जाना एक युग का अंत है।

डौला गांव निवासी लोकतंत्र सेनानी ठाकुर चमन सिंह ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान वे भी जयपाल सिंह के साथ जेल में रहे थे। उनके अनुसार जयपाल सिंह एक निडर और ईमानदार शख्सियत थे।

डॉ. कुलदीप उज्ज्वल, पूर्व मंत्री

एक अध्याय की समाप्ति

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बागपत जनपद के नौरोजपुर गुर्जर गांव निवासी लोकतंत्र सेनानी चौधरी  जयपाल सिंह (97वर्ष) के निधन पर गहरा शोक जताते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और दिवंगत आत्मा की शांति और         शोकाकुल परिवार को धैर्यधारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी ने बताया कि चौधरी जयपाल सिंहसार्वजनिक जीवन में परम मित्र रहे।  भारत रत्न किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह की प्रेरणा से राजनीति में आए और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान राजनीति और सार्वजनिक जीवन की एक बड़ी शख्सियत थे। उनका जीवन संघर्ष और त्याग के साथ     बीता। चौधरी जयपाल सिंह ने  आपातकाल के समय में जेल काटी और 1980 में बागपत में हुए माया त्यागी कांड में संयोजक रहते हुए पुलिस की बर्बरता को झेला और जेल गये। 

मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने चौधरी जयपाल सिंह के निधन को एक अध्याय की समाप्ति बताया। 

समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश, फेसबुक पेज

नौरोजपुर गुर्जर की शान और पहचान थे

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के शिष्य, लोकतंत्र सेनानी चौधरी जयपाल सिंह “बाबू जी” (गाँव नौरोजपुर गुर्जर, जनपद बागपत) आज प्रातः 97 वर्ष की आयु में स्वर्गवासी हो गये हैं, इस दुःखद खबर से मन बहुत ही उदास और व्याकुल है। बाबू जी के पिता जी चौधरी भीम सिंह जी स्वतंत्रता सेनानी और मेरठ डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के सदस्य थे। सामाजिक-राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, चौधरी चरण सिंह जी के कहने पर पीसीएस की नौकरी छोड़ राजनीति का मार्ग चुना। देश का बहुचर्चित माया त्यागी आंदोलन 1980 और आपातकाल 1975 में लोकतंत्र की रक्षा हेतु घायल हुए और जेल गये—उनका जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा की मिसाल रहा। कौरवी, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी पर मजबूत पकड़, कहावत-मुहावरों से सजी बातचीत, नफ़ासतभरा रहन-सहन और संबंधों को निभाने की कला उन्हें विशिष्ट बनाती थी। गोरा रंग, इकहरा बदन, कड़क आवाज़, उसूलों पर अडिग ईमानदारी, प्रबुद्ध व्यक्तित्व और सैद्धांतिक जीवन उनकी पहचान थी।

विराट व्यक्तित्व के धनी बाबू जी चौधरी जयपाल सिंह ताऊ जी का जाना परिवार, गाँव और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है बाबू जी का निधन क्या हुआ ऐसा लगता है कि जैसे एक युग की समाप्ति हो गई है,बाबू जी वास्तव में आप बहुत बहुत दूर तक हमारे पैतृक गाँव नौरोजपुर गुर्जर की शान और पहचान थे,आदर्श जीवन के प्रेरक थे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें। अश्रुपूरित आँखों से विनम्र श्रद्धांजलि और शत-शत नमन।

सुभाष गुर्जर प्रमुख , आरएलडी बागपत के अध्यक्ष

लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए समर्पित रहे

राष्ट्रीय लोक दल परिवार के वरिष्ठ सदस्य , भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी के समय से उनके साथ जुड़े रहे निष्ठावान सिपाही, लोकतंत्र सेनानी चौधरी जयपाल सिंह जी का निधन अत्यंत दुःखद है।

चौधरी साहब की एक आवाज़ पर पीसीएस की नौकरी छोड़कर जयपाल सिंह जी ने अपना जीवन चौधरी साहब के विचारों, किसान-मजदूर की आवाज़ और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया। उनका संघर्ष, सादगी और संगठन के प्रति समर्पण हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए सदैव प्रेरणा बना रहेगा।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। राष्ट्रीय लोक दल परिवार की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

टीम आरएलडी फेसबुक हैंडल से

अपूरणीय क्षति

बागपत क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी, बहुत ही ओजस्वी वक्ता एवं 96 वर्षीय वयोवृद्ध जननायक चौधरी जयपाल सिंह जी नौरोजपुर के आकस्मिक निधन से हृदय व्यथित हुआ। आज से ठीक एक वर्ष पूर्व मेरे बाबाजी स्वामी पूर्णानंद सरस्वती जी के 125 वे जन्मोत्सव पर वह मेरठ आईएमए हाल में पधारे थे तथा उसी ओजपूर्ण शैली में अपने विचार रखे थे , जिसे मैं बचपन से उनको राजनैतिक मंचों से सुनता आया था। आज उनका उस संसार से विदा हो जाना समस्त समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है। परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

डॉ. वीरोत्तम तोमर, छाती विशेषज्ञ

सर्वसमाज के उत्थान के लिए सदैव समर्पित रहे

“परम् श्रद्धेय स्वर्गीय चौधरी जयपाल सिंह जी, जो बागपत के नौरौजपुर गांव के प्रतिष्ठित निवासी थे, चौधरी चरण सिंह जी के सच्चे अनुयायी ओर लोकतंत्र के कर्मठ प्रहरी थे। जाट महासभा के संरक्षक के रूप मे सदैव उन्होंने हमारा मार्गदर्शन किया. वे ताउम्र न केवल  जाट समाज के लिए बल्की सर्व समाज के उत्थान के लिए सदैव समर्पित रहे । चौधरी जयपाल सिंह जी के सिद्धांत, उनकी सेवा भावना और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी अटूट निष्ठा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। वे हमारे लिए एक प्रकाश स्तंभ के समान थे जिन्होंने समाज की सीमाओं को पार कर इंसाफ, सच्चाई और समरसता की राह दिखाई। उनका योगदान हमेशा अमिट रहेगा, और हम सब को उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

 सोमेंद्र ढाका , अध्यक्ष जिला जाट सभा मेरठ

चौधरी जयपाल सिंह जी हमारे बीच नहीं रहे, यह अत्यंत दुखद है। वे उच्च प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे और उन्होंने भरपूर जीवन जिया।

ऐसे सम्मानित व्यक्ति का जाना, जिनकी छवि हृदय पर गहरी छाप छोड़ जाती हो, स्वाभाविक रूप से दुख पहुंचाता है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

वे जितने बाहर से साफ-सुथरे और सरल थे, उतने ही मन से भी निर्मल और सच्चे थे।

रणवीर राणा, पूर्व विधायक

चौधरी जयपाल सिंह नौरोज़पुर एक सच्चे समाज सुधारक थे। वे आर्य समाज की विचारधारा से प्रेरित थे और उनकी राजनीति हमेशा समाज के हितों के इर्द-गिर्द घूमती रही। प्रोफेसर महक सिंह के वे घनिष्ठ मित्र थे। वे एक जुझारू और ईमानदार व्यक्ति थे। बीमारी के बावजूद समाज को लेकर हमेशा चिंतन करते रहते थे। उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणा है।

राजेंद्र शर्मा, पूर्व विधायक

चौधरी जयपाल सिंह नौरोज़पुर ने बीकेडी और भारतीय लोकदल में जिला महामंत्री के रूप में निष्ठा के साथ काम किया। वे गहरी राजनीतिक समझ वाले नेता थे, जिनकी राजनीति समाज से जुड़ी हुई थी।

माया त्यागी कांड के विरोध में चले आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। लाठीचार्ज में घायल हुए और जेल भी गए। उस आंदोलन में लगभग एक लाख लोग जेल गए थे और इस कांड के 11 आरोपियों को निचली अदालत से फांसी की सजा सुनाई गई थी।

आपातकाल के दौरान भी उन्होंने सत्याग्रह किया और जेल गए। उनके निधन से समाज और सियासत को अपूरणीय क्षति हुई है। आज समाज में अच्छे और ईमानदार लोगों की कमी लगातार महसूस की जा रही है।

चौधरी जगत सिंह

हमेशा याद किया जाएगा

अत्यंत दुखद। परसों ही उसी क्षेत्र से आए दो व्यक्तियों से मैं चौधरी जयपाल सिंह जी के स्वास्थ्य के बारे में पूछ रहा था। उन्होंने बताया कि उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया है। मैं जल्दी ही उनका हालचाल लेने उनके गांव जाने की सोच रहा था, लेकिन यह दुखद समाचार आपकी पोस्ट से प्राप्त हुआ। पढ़कर गहरा सदमा लगा।

मेरे बड़े भाई समान स्वर्गीय जयपाल सिंह जी का पूरा जीवन चौधरी चरण सिंह के बताए मार्ग पर चलते हुए लोकदल की राजनीति करते बीता। वे अनेक आंदोलनों में पूरे जोश के साथ शामिल रहे, लाठियां और यातनाएं झेलीं और जेल भी गए। बागपत के माया त्यागी कांड के विरोध में उनके संघर्षपूर्ण योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

वास्तव में वह कांड कांग्रेस शासन के दौरान एक घमंडी पुलिस इंस्पेक्टर गौड़ की तानाशाही और क्रूरता के खिलाफ उठा था, जिसने पास के गांव की बेटी माया त्यागी की इज्जत को तार-तार कर दिया था। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। उसी आंदोलन के दौरान छात्र नेता ओमबीर सिंह तोमर को भी बागपत पुलिस ने बेरहमी से पीटा था। उस समय मैं बागपत कोर्ट के बाहर वकीलों को इस कांड के विरोध में संबोधित कर रहा था।

भाई जयपाल सिंह का राजनीतिक जीवन पूरी तरह बेदाग रहा। उनके निधन से जहां उनके परिजनों और मित्रों को गहरा दुख हुआ है, वहीं बागपत क्षेत्र ने अपने समय का एक जुझारू और प्रतिबद्ध नेता खो दिया है। मेरे लिए तो यह एक व्यक्तिगत क्षति है, क्योंकि हमारे बीच गहरा आत्मीय संबंध रहा।

परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिजनों, मित्रों, साथियों तथा शुभचिंतकों को इस दारुण दुख को सहन करने की शक्ति दें। 

जयप्रकाश प्रेमदेव, पूर्व प्रचार्य जनता वैदिक कॉलेज बड़ौत

हमारे छात्र युग के प्रेरणा स्रोत नेता थे

लोकतंत्र के सजग प्रहरी, स्व चौधरी चरण सिंह जी के सच्चे अनुयायी, जाट महासभा बागपत के संरक्षक ओर समाजसेवी चौधरी जयपाल सिंह जी का निधन  समाज की बड़ी हानि है धनखड़ खाप की चौधरी प्रधान विजेंद्र सिंह के साथ मिलकर के उनके निवास स्थान पर जाकर के परिवार के साथ संवेदना व्यक्त किया।

     चौधरी जयपाल सिंह के हमारे छात्र युग के प्रेरणा स्रोत नेता थे माता के कांड में उनकी प्रेरणा के द्वारा हमारे जैसे छात्र जेल भरो आंदोलन में गए ऐसे नेता का जाना केवल परिवार और राजनीति के लिए ही क्षति नहीं है यह हमारे छात्रों के लिए पूरे जात बिरादरी के लिए पूरे किस समाज के लिए पूरे सच की आवाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

    आज मेरे जीवन पर उनके आदर्श का प्रभाव है उनमें से चौधरी जयपाल सिंह सर्वोपरि है चौधरी जयपाल सिंह हमेशा जीवित रहेंगे उनके विचार हमारे विचारों में आपको दिखाई देंगे ।

    मैं अपनी उम्र के सभी उसे समय के छात्रों के अंदर चौधरी जयपाल की छवि को देख रहा हूं चौधरी जयपाल अमर है अमर रहेंगे और हमेशा अमर रहेंगे

   जब तक सूरज चांद रहेगा चौधरी जयपाल का नाम रहेगा

कैप्टन विनोद कुमार, दांघड खाप चौधरी

जिंदगी के सफर में, कुछ ऐसे निशान छोड़ के जा…..

चौधरी जयपाल सिंह का अंतिम सार्वजनिक भाषण जो उन्होंने मेरठ में स्वामी पूर्णानंद सरस्वती की याद में दिया 

सभापति जी की आज्ञा से मैं आपका जायका बदलने के लिए कुछ शब्द कहने के लिए खड़ा हुआ हूँ। इतने बड़े-बड़े विद्वानों के बोलने के बाद मेरे जैसा आदमी, जिसने हिंदी भी ठीक से न पढ़ी हो, संस्कृत के विद्वानों के सामने बोलना भी अच्छा नहीं लगता।

फिर भी मैं मोटी-मोटी तीन बातें कहना चाहूँगा। शुरुआत उर्दू के एक शेर से करता हूँ।

कौन रोता है किसी गैर की खातिर मीर,
सबको अपनी ही किसी बात पर रोना है।

मनुष्य के जितने अधिक ताल्लुकात होंगे, उतनी ही उसे प्रसन्नता भी होगी और उतना ही दुख भी होगा। जीवन में मुख्य रूप से तीन प्रकार के ताल्लुक होते हैं।
पहला रिश्तेदारी का ताल्लुक।
दूसरा विचारों का ताल्लुक।
और तीसरा हमारे बुजुर्गों के पुराने रिश्तों का ताल्लुक, कि हमारे दादा उनके दादा के मित्र थे।

नरेंद्र जी, जिन्हें मैं अक्सर नरेंद्र ही कह देता हूँ। पता नहीं क्यों, मुझे उन्हें नरेंद्र कहने में बहुत आनंद आता है। मुझे इसमें आत्मिक सुख मिलता है। वरना अल्फाज़ की नजाकत हम भी जानते हैं, लेकिन जब आदमी उर्दू मिज़ाज का हो तो कभी-कभी सादगी ही बेहतर लगती है।

मैं इन ताल्लुकात के आधार पर ही अपनी बात कहना चाहता हूँ। पंडित जी नंबरदार भीम सिंह जी, जो मेरे पिताजी थे, उनके अत्यंत निकट मित्रों में थे।     उस समय के अनुसार हमारे बीच रिश्तेदारी का भी संबंध था। इसलिए मेरा भी उनसे बहुत अजीज रिश्ता रहा है और उनका भी हमसे बहुत स्नेह रहा है।    जहां पारिवारिक संबंध और विवाह जैसे रिश्ते जुड़े हों, वहां अपनापन और भी गहरा हो जाता है।

यशोवर्धन जी का नियुक्ति भी हमारे समय में हुई थी और उन्हें कलम से प्रधानाचार्य बनाया गया था। दूसरी कुछ बातें भी हैं जिनकी यहाँ चर्चा करना           उचित नहीं समझता, लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि मैं स्वभाव से ऐसा व्यक्ति रहा हूँ जो जहाँ ठीक समझता है, वहीं खड़ा हो जाता है।

और जब खड़ा हो जाता हूँ, तो फिर खड़ा ही रहता हूँ।
बुरा मानो या भला मानो, जो कहना होता है वह कह देता हूँ, और जो नहीं कहना होता वह नहीं कहता।

अंत में आपकी सेवा में एक पंक्ति भेंट करता हूँ।

राह-ए-सफर में, जिंदगी के सफर में, कुछ ऐसे निशान छोड़ के जा,
लोग उन्हें देखकर तुम्हें याद करते रहें।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

    मेरी राजनीतिक यात्रा और मेरी गलतियाँ

….चौधरी जयपाल सिंह, नौरौजपुर

मेरे यूट्यूब चैनल के लिए लिया गया उनका अंतिम साक्षात्कार

मेरी ज़िंदगी में कई ऐसे फैसले रहे हैं जिनका असर आज तक महसूस करता हूँ। एक बात मैं साफ कहना चाहता हूँ, जिस आदमी के कहने पर मैंने नौकरी नहीं की, उसके साथ बाद में मेरे रिश्ते अच्छे नहीं रहे। लेकिन मैं यह नहीं कहता कि गलती सिर्फ उसी की थी। असल में गलती मुझसे ज़्यादा हुई, क्योंकि लेने और निभाने का भी एक सलीका होता है।

मैं मानता हूँ कि कई बार मैंने अपने विरोधियों को यह कहने का मौका दिया कि यह आदमी इतना अहंकारी है कि अपने गुरु को भी गुरु नहीं मानता। लेकिन सच यह है कि मेरे फैसलों के पीछे कुछ बड़े कारण थे।

राजनीति में आने का कारण

मैं ऐसे घराने से आता हूँ जहाँ राजनीति का माहौल था। मेरे दादा चौधरी थे, मेरे पिता भी जिला बोर्ड के सदस्य रहे थे। इसलिए परिवार में यह उम्मीद थी कि मैं भी राजनीति में जाऊँ।

बड़े घराने अक्सर अपने पढ़े-लिखे बच्चों को राजनीति में भेजते हैं, जबकि किसान अपने बच्चों को नौकरी में भेजना चाहता है। मेरे अंदर भी क्षमता थी, और मेरे बड़ों की इच्छा थी कि मैं राजनीति करूँ। उसी प्रेरणा से मैं इस रास्ते पर आया।

ग्रीन पार्क सम्मेलन की घटना

कानपुर के ग्रीन पार्क में लोकदल का एक बड़ा सम्मेलन हुआ था। उस समय चंद्र भानु गुप्ता को हटाने की कोशिशें चल रही थीं। मेरी समझ यह थी कि पहले पार्लियामेंट बोर्ड विचार करता है, फिर नेशनल एग्जीक्यूटिव, और उसके बाद मामला ओपन सेशन में आता है। ओपन सेशन तो केवल औपचारिकता होती है।

मैंने मंच से कहा

“मान्यवर, मैं आपकी फौज का शायद सबसे कम उम्र का सिपाही हूँ, लेकिन एक बात कहना चाहता हूँ। कृपया वह गलती मत कीजिए जो हिटलर ने की थी।”

मैंने उदाहरण दिया कि कैसे हिटलर ने इंग्लैंड पर हमला करके बड़े-बड़े बंदरगाह तबाह कर दिए, लेकिन बाद में रणनीतिक गलतियों के कारण जर्मनी को पीछे हटना पड़ा और अंततः हिटलर को आत्महत्या करनी पड़ी।

मेरा आशय सिर्फ इतना था कि जल्दबाज़ी में कोई ऐसा निर्णय न लिया जाए जिससे आंदोलन कमजोर हो जाए।

आंदोलन को लेकर मतभेद

एक समय दक्षिण भारत में आंदोलन चल रहा था। उस आंदोलन में जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेता सक्रिय थे। मैं उससे बहुत प्रभावित था और चाहता था कि वैसा ही आंदोलन हम भी चलाएँ।

लेकिन चौधरी साहब ने मुझे समझाया। उन्होंने कहा कि भारत के अलग-अलग हिस्सों की परिस्थितियाँ अलग होती हैं। दक्षिण में खुले मैदान हैं, लंबी सीधी सड़कें हैं। वहाँ आंदोलन और टकराव का तरीका अलग हो सकता है।

उन्होंने समझाया कि उत्तर भारत में वही तरीका अपनाने से बहुत अधिक जानें जा सकती हैं। उनकी बात में तर्क था, लेकिन उस समय मैं उतना धैर्य नहीं रख पाया।

राम मनोहर लोहिया अस्पताल की घटना

एक घटना मुझे आज भी याद है। चौधरी साहब दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती थे। एक छोटा सा ऑपरेशन हुआ था और हम तीन लोग उनके कमरे में बैठे थे।

तभी राजनारायण जी आए और उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण जी आपका मत जानना चाहते हैं। उस समय प्रधानमंत्री पद की दौड़ में मोरारजी देसाई और जगजीवन राम के नाम चल रहे थे।

चौधरी साहब ने तुरंत मोरारजी देसाई के नाम की चिट्ठी लिखने का फैसला किया। मैंने उनका हाथ पकड़कर कहा…

“इतने वर्षों बाद नेहरू परिवार सत्ता से बाहर हुआ है। अगर आप जगजीवन राम के नाम की चिट्ठी लिख दें तो देश का हरिजन और किसान एक साथ राजनीति में आएंगे, और शायद आने वाली तीन पीढ़ियों तक नेहरू परिवार सत्ता में वापस नहीं आ पाएगा।”

मेरी बात शायद रणनीतिक रूप से ठीक थी, लेकिन चौधरी साहब को यह बात पसंद नहीं आई।

18 दिन की सरकार और इतिहास

उसके बाद जो हुआ, वह सब इतिहास है। सरकार सिर्फ 18 दिन चली। लोग चौधरी चरण सिंह के प्रशंसक हों या न हों, लेकिन जो लोग इतिहास लिखेंगे वे यह जरूर लिखेंगे कि वह फैसला एक गलती थी।

मैं आज साफ शब्दों में कहता हूँ

वह गलती थी, और उसका परिणाम मुझे भी भुगतना पड़ा।

राजनीति में कई बार हम जो फैसला लेते हैं, उसका असर बहुत दूर तक जाता है। आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो समझ आता है कि कई जगह मुझे और धैर्य, और समझदारी से काम लेना चाहिए था।


एक ऐतिहासिक मुलाकातरतन टाटा और चौधरी चरण सिंह

डॉ. रवींद्र प्रताप राणा

अपने साक्षात्कार में जयपाल सिंह नौरौजपुर ने एक और दिलचस्प घटना सुनाई।

उन्होंने बताया कि जब चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री बने, उस समय उनकी पार्टी की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी।

उसी दौरान उद्योगपति रतन टाटा उनसे मिलने आए।

जयपाल सिंह जी बताते थे कि उन्होंने खुद देखा कि एक भारी सूटकेस लेकर टाटा के साथ आए व्यक्ति ने उसे कमरे में रखा।

अंदर बातचीत शुरू हुई। चौधरी चरण सिंह ने सीधे पूछा…

“आप किसलिए आए हैं?”

रतन टाटा ने कहा कि वह पार्टी के लिए आर्थिक सहायता देने आए हैं।

उन्होंने बताया कि जब चौधरी चरण सिंह वित्त मंत्री थे, तब उन्होंने आयकर अधिकारियों की एक बैठक में टाटा समूह की ईमानदारी की प्रशंसा की थी।

उसी सम्मान के कारण वह आर्थिक सहायता देने आए थे।

लेकिन चौधरी चरण सिंह ने यह पैसा लेने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा:

“अगर आपकी कंपनी कभी किसी काम से सरकार के पास आएगी तो मेरा मन प्रभावित हो सकता है। इसलिए मैं यह पैसा नहीं ले सकता।”

जयपाल सिंह नौरौजपुर इस घटना को याद करते हुए कहते थे कि उन्होंने राजनीति में ईमानदारी का इससे बड़ा उदाहरण बहुत कम देखा।

आत्मालोचन की दुर्लभ क्षमता

अपने पूरे इंटरव्यू में जयपाल सिंह नौरौजपुर ने सिर्फ दूसरों की नहीं, बल्कि अपनी गलतियों की भी खुलकर चर्चा की।

वह अक्सर कहा करते थे कि राजनीति में कई बार हम ऐसे फैसले ले लेते हैं जिनका असर बहुत दूर तक जाता है। पीछे मुड़कर देखने पर ही समझ आता है कि कहाँ धैर्य और समझदारी की जरूरत थी।

उनकी यही साफगोई उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती थी।

एक यादगार बातचीत

मेरे लिए यह बातचीत सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं थी, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के जीवन के अनुभवों को सुनने का अवसर था जिसने राजनीति को करीब से देखा और जिया।

10 मार्च 2026 को उनके निधन के साथ एक स्पष्टवादी आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई।

लेकिन उनकी कही हुई बातें, स्वाभिमान, ईमानदारी और आत्ममंथन की सीख हमेशा याद रहेंगी।

उनकी स्मृति को विनम्र श्रद्धांजलि।

शब्दों से दृश्य उत्पन्न करने की जादूगरी के माहिर : चौधरी जयपाल सिंह नौरौजपुर जी

सुनील पंवार एडवोकेट

हमने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने लगभग एक शताब्दी के अपने लंबे जीवन में सादगी, विचार और समाजसेवा की अमिट छाप छोड़ी। 97 वर्ष की आयु में चौधरी जयपाल सिंह जी का हमारे बीच न रहना पश्चिम उत्तर प्रदेश की समाजवादी विचारधारा के एक युग का अंत है। वे ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनमें वैचारिक स्पष्टता, जीवन की सादगी और समाज के प्रति समर्पण सदा सर्वोपरि रहा, और जिनकी वाणी और जीवन में अद्भुत एकरूपता थी।

उनका जन्म गुलाम भारत में हुआ। उस समय शिक्षा के सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन में वे न केवल शिक्षा में उत्कृष्ट रहे, बल्कि खेलों में भी उनका बड़ा नाम था। उनके पिताजी चौधरी भीम सिंह उनके प्रथम गुरु थे, और ऐसा कोई दिन नहीं जाता था जब वे अपने पिताजी को स्मरण न करते हों। जमींदार और कुलीन परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही उनमें गहरा स्वाभिमान था।

विद्यालयी जीवन से ही वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेकर एक कुशल वक्ता बन गए थे। शिक्षा के प्रति उनका गहरा लगाव जीवनभर बना रहा। अंग्रेज़ी भाषा पर उनकी असाधारण पकड़ थी। वे ज्ञान को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम मानते थे। उनके भाषण तर्क, तथ्य और स्पष्टता से परिपूर्ण होते थे। उनकी भाषाई शक्ति और शैली इतनी प्रभावशाली थी कि जिस विषय पर वे बोलते, वह श्रोताओं के सामने सजीव दृश्य बनकर उभर आता था।

उनकी प्रतिभा का प्रमाण यह है कि उनका चयन प्रतिष्ठित पीसीएस सेवा में हुआ था। किंतु पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी की सलाह पर उन्होंने सरकारी पद को त्यागकर समाजसेवा का मार्ग चुना। वे किसानों और ग्रामीण समाज के अधिकारों के लिए चौधरी चरण सिंह जी के साथ सक्रिय रूप से कार्य करते रहे।

सत्तर के दशक में वे उनके करीबी नेताओं में शामिल हो गए और उन्होंने चौधरी देवीलाल, कर्पूरी ठाकुर, शरद यादव, राजेंद्र चौधरी, के.सी. त्यागी और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं के साथ समर्पित भाव से राजनीति में कार्य किया। हालांकि चुनावी राजनीति में सक्रिय न हो पाने का उन्हें जीवनभर अफसोस रहा।

उनका जीवन अत्यंत सादा और अनुशासित था। सादा भोजन, सादे वस्त्र और संत जैसा जीवन उनकी पहचान था। उन्होंने कभी दिखावे या वैभव को महत्व नहीं दिया। साथ ही उनकी बेबाकी और निर्भीकता भी अनुकरणीय थी। बागपत के माया त्यागी कांड में उन पर लाठीचार्ज हुआ, फिर भी वे कभी झुके नहीं। वे हर विषय पर खुलकर बोलते थे, चाहे वह सामाजिक हो या व्यक्तिगत।

उनकी एक विशेषता यह भी थी कि उन्हें सुनने वाले श्रोता कभी ऊबते नहीं थे। जिसने एक बार उन्हें सुना, वह बार-बार सुनना चाहता था। युवावस्था में जब मैंने उनके प्रभावशाली भाषण का कारण पूछा, तो उन्होंने कहा…

“बेटा, याद रखना अगर अच्छा लिखना है तो पढ़ने की आदत डालो, और अगर अच्छा बोलना है तो सुनने की आदत डालो।”

वे कहा करते थे कि व्यक्ति की पहचान उसके आचरण और विचारों से होती है, और उसका आचरण निर्भीक और निडर होना चाहिए।

चौधरी जयपाल सिंह जी ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा जाट समाज की जागरूकता, संगठन और उन्नति के लिए समर्पित किया। वे शिक्षा, सामाजिक एकता और आत्मसम्मान को समाज की प्रगति का आधार मानते थे।

व्यक्तिगत जीवन में भी उनका संबंध अनेक परिवारों से आत्मीयता का रहा। मेरे पिताजी स्वर्गीय मास्टर रणसिंह पंवार और उनके अभिन्न मित्र स्वर्गीय मास्टर राजपाल राणा के साथ उनकी गहरी मित्रता थी। बचपन से ही उनका हमारे परिवार में आना-जाना रहा, और उनका स्नेह, मार्गदर्शन तथा सादगीपूर्ण व्यक्तित्व आज भी स्मृतियों में जीवंत है।

जीवन के अंतिम वर्षों में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि अब वे जीवन के अंतिम दौर में हैं। राजनीति से उनका लगाव आज भी गहरा है, भले ही वे सक्रिय रूप से राजनीति न कर सकें। उसी अवसर पर उन्होंने कुलदीप उज्जवल में योग्यता देखते हुए उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया, ताकि समाजसेवा और जनहित की उनकी परंपरा आगे भी चलती रहे।

चार वर्ष पूर्व जाट सभा बागपत की कार्यकारिणी ने उनके निवास पर उनका जन्मदिन मनाया। उस अवसर पर उन्होंने बताया कि उन्होंने ज्योतिष का भी अध्ययन किया था, किंतु उसका कभी प्रचार नहीं किया। उन्होंने आत्मविश्वास से कहा था कि उनके ज्योतिष ज्ञान के अनुसार उनकी आयु 97 वर्ष होगी और अंत समय तक उनकी स्मरण शक्ति ठीक रहेगी—और ऐसा ही हुआ। यह उनके आत्मविश्वास, संयम और जीवन के प्रति गहरे आत्मबोध का प्रमाण है।

उनके स्वर्गवास से क्षेत्र में एक ऐसा शून्य उत्पन्न हुआ है, जिसे भर पाना कठिन है। उनके विचार, उनका जीवन और समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। किंतु उनके जैसा व्यक्तित्व और उनकी प्रस्तुति की शैली अब दुर्लभ है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार, मित्रों एवं क्षेत्रवासियों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

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