पांच दशक पुरानी मांग को लेकर आंदोलन तेज करने पर मंथन, न्यायिक कार्य से रहे विरत
सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन के सभागार में हुई इस बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए। बैठक में आंदोलन को और व्यापक बनाने, विभिन्न बार संघों के बीच बेहतर समन्वय कायम करने और सरकार पर दबाव बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।

करीब पांच दशक से जारी है बेंच का संघर्ष
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग आज की नहीं है। अधिवक्ता संगठन लंबे समय से इसके लिए आंदोलन करते आ रहे हैं। करीब पांच दशक से चल रहे इस संघर्ष के पीछे सबसे बड़ा तर्क पश्चिमी यूपी की विशाल आबादी और इलाहाबाद स्थित हाईकोर्ट से क्षेत्र की दूरी को बताया जाता है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को हाईकोर्ट से जुड़े मामलों की पैरवी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत आती है।
अधिवक्ता संगठनों का दावा है कि पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच बनने से केवल वकीलों को नहीं, बल्कि आम लोगों, किसानों, व्यापारियों और अन्य पक्षकारों को भी न्याय तक पहुंच आसान होगी।
मेरठ रहा है आंदोलन का प्रमुख केंद्र
हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर मेरठ लंबे समय से आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है। मेरठ बार एसोसिएशन सहित पश्चिमी यूपी के कई बार संघ इस मांग को लेकर समय समय पर हड़ताल, सम्मेलन और विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं का आंदोलन अलग अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए लगातार सक्रिय रहा है। अब सहारनपुर की बैठक के जरिए इसे फिर व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाई दे रही है।
अदालतों में न्यायिक कार्य से विरत रहे अधिवक्ता
सहारनपुर में आयोजित कार्यक्रम के तहत अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया। स्थानीय अधिवक्ता संगठन की ओर से अधिवक्ताओं से हड़ताल में शामिल होने की अपील की गई थी।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा बार संघों को आंदोलन से जोड़ा जाए और सभी जिलों के अधिवक्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
हाईकोर्ट बेंच के मुद्दे पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात कर चुका है। इस दौरान अधिवक्ताओं की ओर से पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग रखी गई थी।
अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि सरकार को इस दिशा में प्रभावी पहल करनी चाहिए और बेंच की स्थापना के लिए आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अधिवक्ता संगठनों की गतिविधियां और तेज हुई हैं और अब आंदोलन की अगली रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
अब अदालत से निकलकर जनता के बीच पहुंचाने की तैयारी
अधिवक्ता संगठनों की रणनीति अब आंदोलन को केवल अदालत परिसरों तक सीमित रखने की नहीं है। इसे आम जनता से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट बेंच का सवाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों से जुड़ा है। ऐसे में इस मांग को लेकर जनता को भी जागरूक किया जाना चाहिए।
पिछले कुछ समय में पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में अधिवक्ता सम्मेलन आयोजित कर आंदोलन को मजबूत करने और सामूहिक रणनीति तैयार करने की कोशिश की गई है।
सहारनपुर बैठक से क्या निकलेगा अगला रास्ता?
7 अक्टूबर की सहारनपुर बैठक को आंदोलन की अगली दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में विभिन्न बार संघों के प्रतिनिधियों के बीच आंदोलन को लेकर समन्वय और आगे के कार्यक्रमों पर चर्चा हुई।
अब निगाह इस बात पर है कि केंद्रीय संघर्ष समिति की ओर से आने वाले दिनों में धरना, मार्च, सम्मेलन या बड़े आंदोलन को लेकर क्या कार्यक्रम घोषित किया जाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग लंबे समय से अधिवक्ताओं के आंदोलन का प्रमुख मुद्दा रही है। सहारनपुर में 7 अक्टूबर की बैठक ने एक बार फिर इस मांग को क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब सवाल सिर्फ यही है कि पांच दशक से चली आ रही इस मांग को लेकर आंदोलन की अगली रणनीति क्या होगी और पश्चिमी यूपी के अधिवक्ता इसे किस बड़े मुकाम तक ले जाएंगे।
