जैव विविधता का संकट और मानव भविष्य

मेहर–ए–आलम ख़ान कंसल्टेंट, सिनेइंक पॉडकास्ट्स, लंदन (यू.के. लंबे समय तक जैव विविधता को एक अलग-थलग विषय समझा गया। यह माना गया कि इसका संबंध जंगलों, जानवरों और प्राकृतिक सुंदरता से है, न कि अर्थव्यवस्था, सुरक्षा या जन-स्वास्थ्य जैसे “गंभीर” मुद्दों से। आज यह धारणा तेज़ी से टूट रही है। जैव विविधता का नुकसान अब 21वीं […]

Continue Reading

मिट्टी, किसान और बागवानी…भारत के भविष्य की जड़ें

मेहर ए आलम ख़ानमुख्य संपादक, नर्सरी टुडे, नई दिल्लीसलाहकार, सिनेइंक पॉडकास्ट्स, लंदन दिसंबर के महीने में दो अवसर हमें चुपचाप उस आधार की याद दिलातेहैं, जिस पर भारत की कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा टिकेहुए हैं। 5 दिसंबर को विश्व मृदा (मिट्टी) दिवस हमें यह सोचने पर मजबूरकरता है कि जैसा लियोनार्डो दा विंची […]

Continue Reading

जादू का पंजा है, इसकी कीमत सिर्फ जिंदगी है!

प्रख्‍यात चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता केएन गोविंदाचार्य आज (22 April 2015)  मेरठ में थे। मौका था किसान सम्‍मेलन का। गोविंदाचार्य जी किसानों के मौजूदा संकट पर बडे सवाल उठाए। उनकी बातों को ज्‍यों का त्‍यों लिख पाना तो मेरे लिए संभव नहीं पर जो कुछ उन्‍होंने कहा उसे सबसे साझा करना मुझे आज के दौर […]

Continue Reading