किसान नेता रोहित जाखड़ की फेसबुक वॉल से साभार
MSP गारंटी किसान मोर्चा के राज्यों कॉर्डिनेटरों की बैठक हुई जिसमें कुछ राज्यों के नेताओं ने मीडिया को संबोधित किया । इसमें प्रमुखता से उत्तर प्रदेश से वीएम सिंह, बलराज भाटी व रोहित जाखड़, महाराष्ट्र से राजू शेट्टी, केरल से पीवी राजगोपाल, तमिलनाडु से श्री गुरुस्वामी, राजस्थान से जलपुरुष राजेंद्र सिंह, बिहार से छोटेलाल श्रीवास्तव, उत्तराखंड से भोपाल चौधरी, हिमाचल प्रदेश से संजय सिंह, हरियाणा से जगबीर सिंह, पंजाब से जसकरण सिंह, मध्यप्रदेश से केदार सिरोही, शिलांग से कमांडर शांगपलियांग, जम्मू कश्मीर से यावर मीर, छत्तीसगढ़ से राजाराम त्रिपाठी आदि मौजूद रहे । इनमें से PV राजगोपाल, गुरुस्वामी, यावर मीर, कमांडर एवं राजाराम आदि वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से प्रेस से जुड़े ओर जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने अपने प्रतिनिधि मेजर हिमांशु के माध्यम से जुड़े ।
वीएम सिंह द्वारा MSP गारंटी किसान मोर्चा के पुराने उल्लेखों एवं नए प्रस्तावों का समर्थन किया गया । वीएम सिंह ने बताया MSP का मुद्दा पहली बार पूरनपुर, पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) से 20 अक्टूबर 2000 को शुरू हुआ था जिसमें रेल व सड़क यातायात पूरी तरह बंद था । उस वक्त न तो सोशल मीडिया था और न टीवी चैनल थे, उसके बावजूद भी ये आंदोलन इतना प्रभावशाली था कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यूपी के तत्कालीन सीएम रामप्रकाश गुप्ता एवं तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली बुलाया और रामप्रकाश गुप्ता को हटाकर राजनाथ सिंह को सीएम बनाया । सीएम बनते ही उन्होंने MSP पर खरीद की मंजूरी दी एवं उसके बाद विधायक का चुनाव हैदरगंज से लड़ा । क्योंकि सरकारी खरीद पहली बार हो रही थी और रिश्वतखोरों से किसान परेशान था तो हाईकोर्ट(वीएम सिंह बनाम भारत सरकार, 5112 ऑफ 2000) ने 9 नवंबर 2000 के आदेशानुसार पूरे यूपी में धान की खरीद की मॉनिटरिंग चालू हुई ओर उसके लिए प्रमुख सचिव खाद्य को अधिकारी नियुक्त किया गया जो हर 2 सप्ताह में कोर्ट आकर स्वयं अपनी रिपोर्ट पेश करते थे । कोर्ट के माध्यम से खरीद के मापदंड बनाए गए । वीएम सिंह ने यह भी बताया कि कुछ साल बाद जब हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों पर अपना दबाव खत्म कर दिया तो सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में हाईकोर्ट के आदेशों को लागू कर मुकदमे को वापसी भेजा।
सैकड़ों बार कोर्ट में पेशी हुई जिसके चलते यूपी सरकार ने 20 साल तक खरीद करी ओर कोरोना की चपेट में होने के कारण मेरी गैर हाजिरी में सरकार द्वारा कोर्ट को गुमराह करते हुए कहा गया कि अब सरकार ने ऐसी नीतियां बनाई हैं जिससे MSP पर खरीद सुरक्षित है । उसी दिन कोर्ट ने उनकी दलील मानते हुए इस मामले को खत्म किया ।
उन्होंने बताया 25-26 नवंबर 2020 को दिल्ली आंदोलन का ऐलान क्रांति दिवस 9 अगस्त को करने के उपरांत, 30 सितंबर 2020 को सरकार के बुलावे पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के 5 सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन कृषि मंत्री श्री नरेंद्र तोमर एवं रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी से वार्ता की । इस बैठक में वीएम सिंह ने राजू शेट्टी द्वारा MSP गारंटी हेतु जुलाई 2018 में संसद में पेश किए प्राइवेट मेंबर बिल की कॉपी मंत्रियों को दी और कहा कि इसे या इसमें संशोधन करके लागू कर दो तो तीन कृषि बिल प्रभावहीन हो जाएंगे ।
कोरोना के कारण राजू शेट्टी एवं वींएम सिंह बीमार हुए और कुछ लोगों ने कहा कि वीएम सिंह एमएसपी की बात करता है हम उसे हटा रहे हैं आज उन्हीं लोगों को मुंह की खानी पड़ रही है और अब 3 साल बाद हर नेता एमएसपी की बात कर रहा है ।
किसान नेता रोहित जाखड़ ने कहा कि कृषि प्रधान देश है किसान बर्बाद हो रहा है और कहीं ना कहीं धर्म की बात होती है तभी महाकुंभ में 1000 किसान लेकर एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा के बैनर तले वहां मौजूद तीनों शंकराचार्य से मुलाकात की और एमएसपी की जरूरत समझाते हुए उन्हें अपने मांग पत्र दिए । इसके उपरांत ज्योतिर्मठ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद जी ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी बात किसानों के लिए कही और सरकार से मुद्दा सुलझाने को कहा । पुरी मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी ने भी मांगों पर अपना आशीर्वाद दिया ।
क्योंकि विदेश से किसानों के बच्चे वापसी आ रहे हैं या वापिस भेजे जा रहे हैं और वो जिन हालातों से जूझते हुए पनामा के जंगलों से विदेश गए थे और अगर अब वापसी आने पर उन्हें जीविका नहीं मिली तो यहां के हालातों में मजबूरन अपराध की ओर मुड़ जाएंगे। ये अधिकांश कृषि परिवारों से आने वाले बच्चे हैं ।
फरवरी 2024 में पंजाब में नया आंदोलन MSP की मांग पर हुआ ओर इसके नेतृत्वकर्ता आंदोलन से पूर्व वी एम सिंह से मिलने आए एवं जगजीत सिंह दल्लेवाल के अनशन के उपरांत भी चंडीगढ़ में 12 जनवरी 2024 को आंदोलनकारी 8 नेताओं ने MSP गारंटी किसान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की । हमने उनसे कहा कि हमारे 250+ किसान संगठन आपको बिना शर्त समर्थन को तैयार हैं लेकिन मुद्दा सिर्फ एक हो ” MSP गारंटी कानून” । इसके बाद 14 जनवरी को आंदोलनरत नेताओं को सरकार की तरफ से एक माह बाद के लिए वार्ता का प्रस्ताव दिया गया लेकिन 14 फरवरी को 1 मंत्री और 22 फरवरी को 3 मंत्री गए जिसमें उन्होंने कहा कि हम आपका डेटा एग्जामिन करके 19 मार्च को वार्ता करेंगे ।
रोहित जाखड़ ने यह भी स्पष्ट किया हम यह नहीं कहते की वार्ता हमसे हो, लेकिन गारंटी अनाज, फल, सब्जी, दूध सभी उत्पादों की हो, क्योंकि 86 फ़ीसदी किसान फल सब्जी और दुग्ध उत्पादन पर निर्भर है, ओर सरकार को MSP की गारंटी देते हुए ये सुनिश्चित करना होगा कि MSP से कम दाम पर विदेश से आयात न हो और किसान का हित सुरक्षित रहे ।
वीएम सिंह ने कहा कि 19 मार्च की जो मीटिंग है वो (In-Camera) हो जिससे देश के किसान एवं किसान नेताओं को सरकार की नीयत पर भरोसा हो पाए । MSP GKM द्वारा प्रधानमंत्री गृहमंत्री और कृषि मंत्री को समय-समय पर पिछले 4 सालों से गुजारिश की जा रही है कि एकदिवसीय मीटिंग In Camera आयोजित की जाए जिसमें देश का मीडिया हो, सारे किसान नेता हो, और देशवासी समझ पाए कि कौन सही है कौन गलत है ।
किसान को MSP की गारंटी देने में सरकार क्यों कतरा रही है जब यही सरकार उद्योगपतियों को गारंटी दे चुकी है । जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी का भाव 2400- 2500 प्रति कुंतल था तब उद्योगपतियों को Minimum Selling Price (MSP) इसी सरकार ने दिया । वहीं रिलायंस को पेट्रोलियम पदार्थ कम दाम पर बेचने की अनुमति नहीं दी ।
4 साल से एमएसपी का मामला अटका हुआ है सरकार ने यदि मन बना लिया है कि मुद्दे को लटकाए रखना है तो इस शक्ल में एमएसपी जीकेएम की सोच है कि सरकार जब तक चाहे विचार करें पर राज्य सरकार को एमएसपी गारंटी देने का अधिकार दे दें ।
खासतौर पर जब 2018 में कांस्टीट्यूशन क्लब में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की मीटिंग में सभी विपक्षी दलों ने एमएसपी कानून और राजू शेट्टी के निजी विधायक को समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं।
कुछ राज्य सरकारों द्वारा जैसे छत्तीसगढ़, हरियाणा,पंजाब में एमएसपी पर दाना दाना खरीद करने का प्रचार राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है, ऐसे में अगर विपक्ष की राज्य सरकार एमएसपी की गारंटी देती हैं तो अन्य सरकारी भी देने को मजबूर होंगी । वहीं सरकार का आर्थिक बोझ काम होगा और CACP जैसे सफेद हाथी की जगह खत्म होगी एवं प्रदेश सरकार अपनी रिकमेंडेशन लागू करने के लिए आजाद होंगी ।
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