– संजय शर्मा के नेतृत्व में मेरठ बार एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को दी न्यायिक सुधारों की मांग
7 जून 2025। मेरठ
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों नागरिकों की न्यायिक समस्याओं को दूर करने और न्यायालयों की पहुंच को आसान बनाने की दिशा में आज एक बड़ी और महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट संजय शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय विधि मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल से 7 जून को मेरठ सर्किट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान पश्चिमी यूपी में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापना की दशकों पुरानी मांग को लेकर गहन और सकारात्मक बातचीत हुई।
यह बैठक औपचारिक मुलाकात से कहीं आगे थी और इसे आंदोलन के इतिहास में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। केंद्रीय विधि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को पूरा समय दिया, उनकी प्रस्तुतियों को गंभीरता से सुना और इस संवेदनशील मुद्दे की गहराई को समझते हुए सकारात्मक संकेत दिए।

लंबे संघर्ष को मिली नई दिशा
संजय शर्मा ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, “यह केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि न्याय की समानता, संवैधानिक अधिकारों और क्षेत्रीय न्यायिक संतुलन के लिए हमारी मांग को नई ऊर्जा देने वाला एक मील का पत्थर है। हम वर्षों से इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं, और आज हमें केंद्रीय विधि मंत्री से जो सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, उससे हमारा संघर्ष निश्चित रूप से निर्णायक सफलता की ओर बढ़ेगा।”
प्रतिनिधिमंडल में मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री एडवोकेट राजेन्द्र सिंह राणा भी प्रमुख रूप से शामिल रहे। उन्होंने विस्तार से उच्च न्यायालय की पीठ स्थापना के महत्व, क्षेत्रीय असंतुलन, न्यायिक विलंब और न्यायालयों की दूरस्थता से जुड़ी समस्याओं को स्पष्ट करते हुए तर्कसंगत प्रस्तुति दी।
क्यों है पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की आवश्यकता?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न्यायिक सुविधाओं की कमी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इलाहाबाद और लखनऊ में स्थित उच्च न्यायालय की मुख्य पीठें पश्चिमी यूपी के लोगों के लिए न्याय प्राप्ति में बाधा बन रही हैं। पश्चिमी यूपी के कई जिलों के लोगों को न्यायालय पहुंचने के लिए 300 से 400 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करनी पड़ती है, जो आर्थिक और समय दोनों दृष्टि से अत्यंत खर्चीली और थकाऊ है।
- लंबी दूरी और आर्थिक बोझ: आम नागरिकों के लिए न्यायालय तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती है।
- न्यायिक विलंब: बढ़ते केसों के कारण मामलों का निपटारा महीनों या वर्षों में हो जाता है।
- क्षेत्रीय असंतुलन: इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यभार के चलते पश्चिमी यूपी के मामलों को प्राथमिकता नहीं मिल पाती।
- जनसंख्या: पश्चिमी यूपी की जनसंख्या और मामले इतने बड़े हैं कि स्थानीय उच्च न्यायालय पीठ की सख्त जरूरत है।
आंदोलन और मांग का इतिहास
पश्चिमी यूपी में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापना की मांग वर्षों से राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक स्तर पर उठती रही है। बार एसोसिएशनों, अधिवक्ताओं, न्याय प्रेमियों और जनमानस ने मिलकर इस मांग को लगातार सरकार के समक्ष रखा है। पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे पर गहन जनसंघर्ष और कानूनी लड़ाई चल रही है।
केंद्रीय विधि मंत्री की सकारात्मक भूमिका
आज हुई बैठक में केंद्रीय विधि मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता दिखाई। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को पूरा समय दिया और उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुना। मंत्री जी ने संकेत दिया कि उच्च न्यायालय की पीठ स्थापना के लिए सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को गंभीरता से विचाराधीन रखा जाएगा। यह स्पष्ट हुआ कि सरकार इस मांग को संवैधानिक दृष्टि से उचित और न्यायसंगत मानती है।

आने वाले कदम और उम्मीदें
संजय शर्मा ने आश्वासन दिया कि मेरठ बार एसोसिएशन इस संघर्ष को और मजबूती से आगे बढ़ाएगा। जनसंघर्ष, संवैधानिक प्रक्रिया और कानूनी माध्यमों से इस मांग को सफल बनाना प्रमुख उद्देश्य होगा। उन्होंने कहा, “हम जल्द ही इस आंदोलन को निर्णायक सफलता दिलाने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएंगे, ताकि पश्चिमी यूपी के करोड़ों नागरिकों को न्याय की समान और सुलभ पहुंच मिल सके।”
न्यायिक सुधार की नई उम्मीद
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापना की मांग न केवल न्यायिक व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है, बल्कि यह क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने, न्यायिक विलंब कम करने और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी एक अहम कदम है। आज की बैठक ने इस लंबे संघर्ष को नई ऊर्जा दी है और न्यायपालिका में सुधार की उम्मीद जगाई है।

