
सवाल: राजा बुंदेला जी, बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या आपको क्या लगती है?
राजा बुंदेला: देखिए, हमारे पास सब कुछ होते हुए भी हमारे नौजवानों के पास रोजगार नहीं है। पढ़ाई करने के बावजूद वे रोजमर्रा की छोटी-छोटी नौकरियों के लिए बाहर चले जाते हैं। वे अपने माता-पिता और पुश्तैनी जमीन को छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। आपको बता दूं कि 67% पलायन बुंदेलखंड में हो रहा है और यह युवा तीन पीढ़ियों का नुकसान कर रहा है।
सवाल: पलायन रोकने के लिए क्या किया जा सकता है?
राजा बुंदेला: जब तक यहां रोजगार नहीं होगा, तब तक पलायन रुकेगा नहीं। बुंदेलखंड की अपनी प्राकृतिक संपदा और संसाधन हैं, लेकिन सरकार उन पर ध्यान नहीं देती। अगर नौजवान यहां रुकेगा, तो खेती-किसानी करेगा, उद्योग-धंधे में लगेगा और अपने परिवार का भी ख्याल रखेगा।
सवाल: बुंदेलखंड में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कैसी है?
राजा बुंदेला: बहुत खराब। सात नदियों के होते हुए भी हमें पानी नहीं मिल रहा। केवल सूखा-सूखा चिल्लाने से समस्या हल नहीं होगी। केन-बेतवा लिंक, हर घर नल, हर नल जल—ये सब केवल वादे बनकर रह गए हैं। बिजली की हालत भी दयनीय है, आठ घंटे की कटौती हो रही है। शिक्षा व्यवस्था की बात करें, तो अध्यापकों को महीनों से वेतन नहीं मिला।

सवाल: क्या बुंदेलखंड को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के साथ रहना चाहिए या एक अलग राज्य बनना चाहिए?
राजा बुंदेला: बुंदेलखंड को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बांटकर हमें कमजोर कर दिया गया। यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर दूसरे राज्य हक जमाते हैं। हम तीन विकल्प दे रहे हैं—
- हमें केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाए, दिल्ली की तर्ज पर।
- बोडोलैंड की तरह एक गवर्निंग काउंसिल बनाई जाए।
- अलग राज्य बना दिया जाए, जिससे हमारा विकास हो सके।

सवाल: बुंदेलखंड अलग राज्य बनने पर आर्थिक रूप से कैसे आत्मनिर्भर होगा?
राजा बुंदेला: हमारे पास भरपूर संसाधन हैं—खनिज संपदा, हीरा, ग्रेनाइट, औषधीय जड़ी-बूटियां, और कृषि उत्पाद। बाबा रामदेव, वेदनाथ, हमदर्द जैसी कंपनियां यहां से जड़ी-बूटियां ले जाती हैं, लेकिन हमें कोई लाभ नहीं मिलता। अगर हम सही नीति अपनाएं, तो बुंदेलखंड 10 सालों में आत्मनिर्भर बन सकता है।
सवाल: केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या सोचती है?
राजा बुंदेला: गृह मंत्री अमित शाह जी से हमारी दो बार बात हुई है। उन्होंने बुंदेलखंड राज्य की मांग को उचित ठहराया, लेकिन अभी यह उनकी प्राथमिकता में नहीं है। जब राज्यसभा में भाजपा का पूर्ण बहुमत होगा, तो इस पर विचार किया जाएगा।
सवाल: आपके संघर्ष का आगे क्या रोडमैप है?
राजा बुंदेला: हम शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे। अभी तक तीन चरणों में हम गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसके बाद दिल्ली में धरना-प्रदर्शन होगा और फिर भी अगर सरकार नहीं सुनती, तो हम जेल भरो आंदोलन करेंगे। हम हिंसा नहीं करेंगे, बस अपनी मांग को लोकतांत्रिक तरीके से रखते रहेंगे।
सवाल: क्या आपको लगता है कि जनता इस आंदोलन में आपके साथ खड़ी होगी?
राजा बुंदेला: बिल्कुल! बुंदेलखंड के लोगों को अब अपनी पहचान के लिए लड़ना होगा। यह मेरा अकेले का संघर्ष नहीं है, यह हर बुंदेलखंडी का संघर्ष है। हमें अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा, तभी हम अपना स्वराज प्राप्त कर सकते हैं।
सवाल: आपकी व्यक्तिगत जिंदगी में इस संघर्ष का क्या प्रभाव पड़ा?
राजा बुंदेला: मैंने अपनी जिंदगी को सरल बना लिया है। महंगी गाड़ियों में घूमना, चाय-कॉफी पर खर्च करना, ये सब मैंने छोड़ दिया। अगर जनता को आप अपना समझोगे, तभी वे आपको अपनाएंगे। गांधी जी ने यही सिखाया कि सरलता और सच्चाई से ही लोग आपके साथ जुड़ते हैं।
सवाल: बुंदेलखंड के लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
राजा बुंदेला: बुंदेलखंड तुम्हारा अपना है। अब समय आ गया है कि तुम अपने हक के लिए खड़े हो जाओ। जब तक जनता खड़ी नहीं होगी, तब तक कोई तुम्हारे लिए आवाज नहीं उठाएगा। यही लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ने कहा था— ‘सत्ता खाली करो, जनता आती है।
प्रश्न: बुंदेलखंड में प्राकृतिक संसाधन तो बहुत हैं, फिर विकास क्यों नहीं हो रहा?

राजा बुंदेला:
हमारी सात नदियां हैं, लेकिन हमें पानी नहीं मिलता। बिजली चार जगह बनती है, लेकिन 8-8 घंटे कटौती रहती है। शिक्षा की हालत ये है कि अध्यापक महीनों से वेतन नहीं पा रहे, स्कूलों में ठेके पर पढ़ाने वाले अनट्रेंड लड़के लगा दिए जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का भी यही हाल है—कोई एम्स, कोई IIT नहीं, और जो मेडिकल कॉलेज है, वो ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है।
प्रश्न: केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर क्या बातचीत हुई है?
राजा बुंदेला:
गृहमंत्री अमित शाह से दो बार बात हुई है। वे इस मुद्दे को समझते हैं, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण अभी इसे प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है। हालांकि, बीजेपी के मेनिफेस्टो में बुंदेलखंड राज्य की बात शामिल है, और हमें उम्मीद है कि भाजपा ही इसे बनाएगी।
प्रश्न: आप आंदोलन को कैसे आगे बढ़ाएंगे?
राजा बुंदेला:
हम शांतिपूर्ण तरीकों से संघर्ष करेंगे—गांव-गांव जनजागरण अभियान, दिल्ली में धरना प्रदर्शन और अंत में जेल भरो आंदोलन। हम हिंसा का सहारा नहीं लेंगे, लेकिन अपनी मांग से पीछे भी नहीं हटेंगे।
सारांश:
राजा बुंदेला ने इस इंटरव्यू में बुंदेलखंड की दुर्दशा, पलायन, संसाधनों के बावजूद विकास की कमी और एक अलग राज्य की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नेशनल टेरिटरी, गवर्निंग काउंसिल या नया राज्य, तीनों में से किसी भी मॉडल पर सहमत हैं। केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है, और अगर जल्द कोई निर्णय नहीं हुआ तो वे जेल भरो आंदोलन तक जाएंगे। उनका संदेश साफ है—बुंदेलखंड को अब अपनी पहचान और हक के लिए खड़ा होना होगा।
