
मेरठ का सर्किट हाउस न केवल प्रशासनिक अधिकारियों, मंत्रियों और गणमान्य व्यक्तियों के ठहरने का स्थान रहा है, बल्कि यह शहर के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी रहा है। यह भवन, जो ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित हुआ था, आज भी अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को संजोए हुए है।
इतिहास और महत्व
सर्किट हाउस मेरठ के कुछ चुनिंदा बड़े गेस्ट हाउसों में से एक है, जो प्रशासनिक एवं राजनीतिक हलचलों का केंद्र रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह, मुलायम सिंह यादव, चौधरी चरण सिंह और कल्याण सिंह जैसे नेता यहां रुक चुके हैं। हालांकि, बदलते समय के साथ इस गेस्ट हाउस में ठहरने की प्रवृत्ति में गिरावट आई है, क्योंकि अब शहर में कई बड़े होटल और निजी गेस्ट हाउस उपलब्ध हो चुके हैं।
भवन की भव्यता और संरचना
सफेद रंग से सजा यह सर्किट हाउस अपने ब्रिटिशकालीन वास्तुशिल्प का शानदार उदाहरण है। ऊँची छतें, बेहतरीन वेंटिलेशन, और लकड़ी से बनी ठंडी छत इसे एक आरामदायक और आकर्षक भवन बनाते हैं। इसके विशाल परिसर में हरे-भरे पेड़-पौधे, पुराने दरख्त और कभी-कभी मोर तक दिखाई दे जाते हैं, जो इसे एक प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते हैं।
सर्किट हाउस और मीडिया की दिलचस्प कहानियां

एक समय था जब मोबाइल फोन नहीं थे और पत्रकारों को खबरों की तलाश में सुबह-सुबह सर्किट हाउस के चक्कर लगाने पड़ते थे। ट्रेन से आने वाले अधिकारी या मंत्री यहीं रुकते थे, और पत्रकार उनकी हलचलों पर पैनी नजर रखते थे। कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस भी यहीं आयोजित होती थीं।
एक दिलचस्प घटना में, जब स्थानीय निकाय चुनावों की तारीख तय हो रही थी, तो एक पत्रकार ने इसी सर्किट हाउस से एक बड़ी खबर ब्रेक की। चुनाव अधिकारी संजीव भानावत के मेरठ आगमन की जानकारी पाकर उन्होंने उनसे बातचीत कर विशेष खबर प्रकाशित की। यह खबर जनवाणी और हिंदुस्तान अखबार में छपी, जबकि अन्य बड़े अखबार इसे छापने से चूक गए।
सर्किट हाउस का बदलता स्वरूप
आज के समय में, जब एयर ट्रैवल आसान हो गया है और मेरठ में कई होटल और यूनिवर्सिटी गेस्ट हाउस खुल चुके हैं, तब मुख्यमंत्री और अन्य बड़े नेता आमतौर पर यहां नहीं ठहरते। फिर भी, यह भवन प्रशासनिक बैठकों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
भव्य विरासत
मेरठ का सर्किट हाउस केवल एक गेस्ट हाउस नहीं, बल्कि इतिहास और पत्रकारिता के अनेक रोचक किस्सों का गवाह रहा है। भले ही आज इसका महत्व थोड़ा कम हो गया हो, लेकिन इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्य इसे अब भी विशेष बनाता है। यह भवन, इसकी कहानियां और इसकी भव्यता इसे मेरठ की विरासत का अहम हिस्सा बनाते हैं।

