उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, पॉवर कारपोरेशन चेयरमैन की संपत्तियों की जांच की मांग

वेस्ट यूपी

Rajesh Sharma/ Dr. Ravindra Rana

लखनऊ/27 जून 2025:
उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में इस समय असंतोष और संघर्ष की चिंगारी सुलग रही है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज पूरे प्रदेश में पॉवर कारपोरेशन में जारी “आपातकालीन स्थिति” और दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में चेतावनी दिवस मनाया गया।

लखनऊ समेत राज्य के सभी जिलों, बिजली परियोजनाओं और शहरों में विरोध सभाएं, नाराज़गी भरे भाषण और आंदोलन की चेतावनी दी गई। संघर्ष समिति ने साफ कहा कि यदि उत्पीड़न नहीं रुका और निजीकरण की साजिश नहीं टली तो बिजली कर्मचारी सामूहिक जेल भरो आंदोलन करेंगे।

स्टेट विजिलेंस के दुरुपयोग का आरोप
संघर्ष समिति ने स्टेट विजिलेंस द्वारा बिजली कर्मचारी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने को उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बताया है और आरोप लगाया कि यह सब पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के लिए रास्ता साफ करने हेतु किया जा रहा है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने बिजली कर्मियों को डराने के लिए मनगढ़ंत आंकड़ों के आधार पर एफआईआर दर्ज करवाई है, ताकि निजीकरण के रास्ते में जो भी आवाज़ उठे, उसे दबाया जा सके।

चेयरमैन की संपत्तियों की जांच की मांग
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यह मांग की है कि डॉ. आशीष गोयल की जयपुर, रानीखेत, ग्रेटर नोएडा, नोएडा और मथुरा में स्थित परिसंपत्तियों की स्वतंत्र विजिलेंस जांच करवाई जाए।

आरोप है कि चेयरमैन ने मनमाने ढंग से हजारों कर्मचारियों का स्थानांतरण, संविदा कर्मचारियों की छंटनी, और कर्मचारी सेवा नियमावली में अलोकतांत्रिक बदलाव किए हैं, जिससे बिना सफाई का मौका दिए कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा सके।

22 जून की महापंचायत के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न
संघर्ष समिति ने बताया कि 22 जून को हुई बिजली महापंचायत के बाद से प्रबंधन बौखलाया हुआ है और इसलिए संघर्ष समिति के शीर्ष नेताओं पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
एफआईआर में जानबूझकर आंकड़ों की जोड़-घटाव की गलतियां की गई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक बदले और डराने की नीति के तहत किया गया है।

प्रदेश भर में हुआ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन
आज के प्रांतीय चेतावनी दिवस के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों और बिजली परियोजनाओं में विरोध सभा और प्रदर्शन किए गए। विरोध में शामिल शहरों में शामिल हैं:
वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा।

इन स्थानों पर बिजली कर्मियों ने एक स्वर में निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की साजिश सफल नहीं होने देंगे।

आंदोलन और तेज़ होगा
संघर्ष समिति के नेताओं शैलेन्द्र दुबे, संजय सिंह चौहान, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, पी.के. दीक्षित, सुहैल आबिद, विवेक सिंह, आर वाई शुक्ला, राम निवास त्यागी, शशिकान्त श्रीवास्तव समेत दर्जनों वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि उत्पीड़न नहीं रुका, तो जल्द ही प्रदेश भर में जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा।

यह चेतावनी दिवस अब केवल बिजली कर्मचारियों का विरोध नहीं रहा, बल्कि यह बन चुका है सरकारी दमन और निजीकरण के विरुद्ध एक जनसंघर्ष।
अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पूरे मामले में क्या निर्णय लेते हैं – क्या कर्मचारियों की मांगों को सुना जाएगा या संघर्ष की यह लहर और तेज़ होगी?

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *