निजीकरण में घोटाले की आशंका, संघर्ष समिति ने की सीबीआई जांच की मांग

वेस्ट यूपी

Rajesh Sharma/ Dr. Ravindra Rana

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उठाए गंभीर सवाल, मुख्यमंत्री से की तत्काल हस्तक्षेप की अपील

लखनऊ, 24 मार्च 2025
उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में चल रहे निजीकरण के प्रकरण पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को लेकर घोटाले की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीबीआई जांच की मांग की है।

संघर्ष समिति का कहना है कि इस पूरे मामले में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन और कॉर्पोरेट घरानों की मिलीभगत है। समिति द्वारा गठित विशेषज्ञों की जांच समिति और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से तैयार की गई रिपोर्ट में भारी भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं।

संघर्ष समिति ने उठाए ये पांच बड़े सवाल:

  1. लखनऊ में आयोजित मीटिंग में निजी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप और भागीदारी के जरिए निजीकरण की नींव रखी गई। इसी कार्यक्रम में पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल को डिस्कॉम एसोसिएशन का महासचिव बनाया गया, जो हितों के टकराव का संकेत देता है।
  2. ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ‘ग्रांट थॉर्टन’ की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी हुई। फर्जी शपथ पत्र और अमेरिका में पेनल्टी स्वीकारने के बावजूद इस कंसल्टेंट को नहीं हटाया गया। यही कंपनी निजीकरण की प्रक्रिया के अहम दस्तावेज तैयार कर रही है।
  3. ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार बनाया गया है, जिसे न तो सार्वजनिक किया गया और न ही आपत्तियों के लिए खोला गया। इससे स्पष्ट होता है कि प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाया गया।
  4. पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और निदेशक वित्त निधि नारंग की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। नारंग को केवल निजीकरण के लिए तीन बार सेवा विस्तार दिया गया और अन्य चयनित वित्त निदेशकों पर जॉइन न करने का दबाव डाला गया। आरोप है कि ग्रांट थॉर्टन के अधिकारी उनके कमरे में बैठकर निजीकरण दस्तावेज तैयार करते रहे हैं।
  5. बिजली वितरण निगमों को कौड़ियों के भाव बेचने की साजिश का आरोप लगाया गया है। इक्विटी को लोन में बदलकर 42 जिलों की बिजली व्यवस्था कॉर्पोरेट कंपनियों को सौंपने की योजना बनाई जा रही है।

मुख्यमंत्री से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि बिजली क्षेत्र की लाखों करोड़ की परिसंपत्तियों की लूट को रोका जाए और तत्काल निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही मामले की उच्चस्तरीय सीबीआई जांच कराई जाए।

संघर्ष जारी रहेगा

संघर्ष समिति के संयोजक इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि “बिजली कर्मचारियों, किसानों, उपभोक्ताओं, व्हीसल ब्लोअर्स और सभी संबंधित संगठनों के सहयोग से निजीकरण में हो रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते रहेंगे। जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।”

संपर्क:
शैलेन्द्र दुबे
संयोजक, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश
मोबाइल: 9415006225



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