अरबी और इस्लाम में पांडित्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजे गए थे
मेरठ के शहर काजी प्रो.जैनुस्साजीद्दीन सिद्दीकी का आज सुबह निधन हो गया। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें धनवंतरी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से पूरे मुस्लिम समाज में शोक की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचने लगे हैं।
शहर काजी प्रो. जैनुस्साजीद्दीन धार्मिक और शैक्षिक जगत की एक प्रमुख हस्ती थे। वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में प्रोफेसर रह चुके थे और इस्लामी शिक्षा व अरबी भाषा के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके नेतृत्व में मेरठ में कई धार्मिक निर्णय लिए गए, जिससे समाज को मार्गदर्शन मिला।

गौरतलब है कि उनके इंतकाल से एक दिन पहले ही उन्होंने होली के दिन जुमे की नमाज के वक्त में बदलाव की घोषणा की थी ताकि सामुदायिक सौहार्द बना रहे। उनके इस फैसले की सराहना की जा रही थी, लेकिन अब उनके अचानक निधन से पूरा शहर स्तब्ध है।
पीएचडी थे शहर काजी, राज्य मंत्री स्तर का दर्जा भी मिला
प्रो.जैनुस्साजीद्दीन सिद्दीकी ने अपनी धार्मिक शिक्षा दारुल उलूम देवबंद से प्राप्त की, जहां उन्होंने ‘फाजिल’ की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने आधुनिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
उनकी शिक्षा और उपलब्धियाँ:
- दारुल उलूम देवबंद – फाजिल (इस्लामिक स्टडीज)
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) – अरबी भाषा में एमए
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) – अरबी भाषा में पीएचडी
1942 में मेरठ में जन्मे प्रो. जैनुल साजेद्दीन को उनके धार्मिक और शैक्षिक योगदान के लिए अखिलेश यादव सरकार में राज्य मंत्री स्तर का दर्जा भी मिला था। वे उस समय उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन थे।
सरकार द्वारा मिला था सम्मान, राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजे गए
शहर काजी प्रो.जैनुस्साजीद्दीन सिद्दीकी और उनके पिता काजी जैनुल आबिदीन को अरबी भाषा और इस्लामी शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सरकार द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

सम्मान और उपलब्धियाँ:
- प्रो.जैनुस्साजीद्दीन सिद्दीकी को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया था।

- उनके पिता काजी जैनुल आबिदीन, जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे, को भी सरकार द्वारा सम्मानित किया गया था।
- दोनों ने इस्लामी अध्ययन और अरबी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
शहर काजी की जिम्मेदारी पीढ़ियों से परिवार में
प्रो. प्रो.जैनुस्साजीद्दीन सिद्दीकी 1991 से मेरठ के शहर काजी थे। इससे पहले, उनके पिता काजी जैनुल आबिदीन आजादी के बाद से ही शहर काजी और शाही जामा मस्जिद के मुतवल्ली (प्रबंधक) के रूप में कार्यरत थे। उनके निधन के बाद,प्रो.जैनुस्साजीद्दीन सिद्दीकी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब से लेकर आज तक, उन्होंने इस पद को बखूबी संभाला और मुस्लिम समाज को धार्मिक मामलों में दिशा-निर्देश दिए।
शहर काजी कौन होते हैं?
शहर काजी मुस्लिम समाज में एक महत्वपूर्ण धार्मिक पद होता है। यह कोई सरकारी पद नहीं, बल्कि समुदाय द्वारा मनोनीत किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित धार्मिक नेतृत्व का स्थान है।
शहर काजी की जिम्मेदारियां:
- इस्लामी कानून (शरीयत) के अनुसार धार्मिक मार्गदर्शन देना
- निकाह (विवाह) कराना और प्रमाण पत्र जारी करना
- जुमे की नमाज, ईद और अन्य इस्लामी त्योहारों के लिए दिशा-निर्देश तय करना
- मुस्लिम समुदाय के विवादों को धार्मिक दृष्टिकोण से सुलझाने में मदद करना
शहर काजी बनने के लिए व्यक्ति को गहरा धार्मिक ज्ञान, मुफ्ती या आलिम जैसी डिग्रियां और इस्लामी न्यायशास्त्र (फिक्ह) की जानकारी होनी जरूरी होती है। भारतीय समाज में यह परंपरा मुगलकाल से चली आ रही है, और आज भी मुस्लिम समुदाय में इसे विशेष सम्मान प्राप्त है।

मेरठ की शाही जामा मस्जिद का इतिहास
मेरठ की शाही जामा मस्जिद ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मस्जिद मुगलकाल में बनाई गई थी और शहर की सबसे प्रमुख इस्लामी धार्मिक स्थलों में से एक मानी जाती है।
मुख्य विशेषताएँ:
- निर्माण काल: मुगल काल के दौरान बनी यह मस्जिद स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है।
- महत्व: यह मेरठ के मुसलमानों के लिए प्रमुख इबादतगाह रही है और शहर के प्रमुख धार्मिक निर्णय यहीं लिए जाते हैं।
- संरचना: पारंपरिक मुगल वास्तुकला में बनी यह मस्जिद अपनी ऊँची मीनारों और भव्य गुंबदों के लिए प्रसिद्ध है।
- इतिहास से जुड़ाव: 1857 की पहली स्वतंत्रता संग्राम में भी यह मस्जिद क्रांतिकारियों के विचार-विमर्श का केंद्र रही थी।
शाही जामा मस्जिद मेरठ में मुस्लिम समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक है, और इसके मुतवल्ली के रूप में प्रो.जैनुस्साजीद्दीन सिद्दीकी का योगदान अतुलनीय था।
मेरठ ने एक बड़े धार्मिक और शैक्षिक मार्गदर्शक को खो दिया है, जिसकी भरपाई करना मुश्किल होगा। उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके निधन से न केवल मेरठ बल्कि पूरे मुस्लिम समाज में एक अपूरणीय क्षति हुई है।
