हर्ष पीजी कॉलेज रायसी में हुआ सेमिनार।

साइबर युद्ध और सूचना युद्ध देश के लिए खतरा

Politics

रायसी के हर्ष कॉलेज में साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों, बढ़ते साइबर खतरे और नीतियों पर चर्चा

रायसी (हरिद्वार)।  हर्ष विद्या मंदिर पीजी कॉलेज में शुक्रवार 21 मार्च 2025 को साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंध: बढ़ते खतरे और नीतियां’ विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ। सेमिनार के पहले दिन साइबर अटैक , सूचना युद्ध, डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

प्रथम सत्र में वक्ताओं ने साइबर हमलों की बढ़ती घटनाओं और उनके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव पर अपने विचार साझा किए। संस्था के सचिव डॉ. हर्ष कुमार ने कहा कि साइबर अपराध अब केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी साइबर अपराधी सक्रिय हैं। फर्जी कॉल्स और डिजिटल ठगी के माध्यम से आम नागरिक, विशेषकर महिलाएं, बड़ी संख्या में

उदघाटन सत्र में आरजीपीजी कॉलेज, मेरठ की प्राचार्य प्रोफेसर निवेदिता मलिक ने कहा कि

आज के दौर में एक व्यक्ति का अपराध भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है। साइबर अटैक न केवल हमारी व्यक्तिगत गोपनीयता के लिए खतरा हैं, बल्कि यह हमारी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।

आरजी पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर निवेदिता कुमारी।

सूचना क्रांति के युग में हमारे पास फेसबुक,  यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) जैसे तमाम डिजिटल प्लेटफार्म हैं, जो आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। इन दिनों “ग्रोक” और चैटजीपीटी जैसे एआई आधारित प्लेटफार्म चर्चा में हैं, जो कुछ ही सेकंड में सूचनाओं को प्रोसेस करके हमें जवाब देते हैं। ये एडवांस्ड सॉफ्टवेयर हैं, जिन्हें विशिष्ट उद्देश्यों के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रोफेसर निवेदिता ने कहा कि, मैंने चीन के एक चैटबॉट पर प्रश्न डाला कि “चीन की साइबर सुरक्षा को क्या खतरा है?” इस पर उसने उत्तर दिया कि इस विषय पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।” वहीं, जब मैंने यही प्रश्न चैटजीपीटी पर पूछा, तो उसने बताया कि दुनिया में सबसे मजबूत साइबर सुरक्षा अमेरिका के पास है, उसके बाद चीन का स्थान है।

साइबर सुरक्षा में भारत की स्थिति

इसका सीधा अर्थ यह है कि वे देश जिन्होंने अपने एआई को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया है, उनकी साइबर सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। बल्कि वे अन्य देशों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। इसका मतलब यह भी है कि उन्होंने इसके लिए ठोस नीतियां बनाई हैं।

पूरे एशिया में कोई भी देश इस सूची में शामिल नहीं था। यह स्थिति दर्शाती है कि जो आविष्कार अमेरिका और चीन कर रहे हैं, वे केवल तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सैन्य और सामरिक मोर्चे पर भी सुपरपावर बन चुके हैं। यहां तक कि इजराइल भी, जो लंबे समय से युद्ध लड़ रहा है और तकनीकी रूप से उन्नत माना जाता है, इस सूची में नहीं था।

भारत: निर्माता बनें, उपभोक्ता नहीं

प्रोफेसर निवेदिता ने कहा कि अपनी साइबर नीतियों और नवाचारों पर ज्यादा काम करना होगा, हमें सोचना होगा कि एक्स फेसबुक यू टयूब जैसे सभी प्लेटफार्म के हम केवल उपभोक्ता (कंज्यूमर) बने हुए हैं, और यदि हम सिर्फ उपभोक्ता बने रहेंगे, तो साइबर हमलों के शिकार भी सबसे अधिक हम ही होंगे।

हमें फॉलोअर की तरह काम करने के बजाय अपने स्वयं के प्लेटफार्म विकसित करने होंगे। यदि एक व्यक्ति के डेटा तक पहुंच संभव है, तो एक पूरे देश की सुरक्षा में भी सेंध लगाई जा सकती है।

अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव

यदि साइबर हमले के कारण किसी भी क्षेत्र (सेगमेंट) में व्यवधान आता है, तो इसका सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यही नहीं, इसका असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ेगा।

हमने हाल ही में देखा कि इजराइल में कैसे दूर बैठे लोगों ने आतंकी हमले को अंजाम दिया। पेजर, जो एक सामान्य संचार उपकरण है, उसे हजारों मील दूर से एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। किसी ने सीधे बम नहीं गिराया, किसी ने गोली नहीं चलाई, फिर भी इस तकनीक का उपयोग कर आतंकी गतिविधि को अंजाम दिया गया।

अर्थव्यवस्था और साइबर युद्ध की साजिश

यदि दुनिया में युद्ध नहीं होंगे, तो हथियार उद्योग का क्या होगा? यही कारण है कि विकसित देश साइबर तकनीक का इस्तेमाल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक सत्ता संतुलन को प्रभावित करने के लिए कर रहे हैं।

आज साइबर हमले और सूचना युद्ध (Information Warfare) सरकारों को गिराने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बदलने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

हमारा मस्तिष्क: तकनीक का गुलाम बनता जा रहा है

आज हमारे दिमागों को नियंत्रित किया जा रहा है। हमारा मस्तिष्क धीरे-धीरे तकनीक का गुलाम बनता जा रहा है। नवाचार (इन्वेंशन) को विकास और मानवता की भलाई के लिए किया जाता है, लेकिन जब यह गलत हाथों में चला जाता है, तो इसका उपयोग देशों को अस्थिर करने और मानवता को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

हमें अपने देश की साइबर सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता के लिए मजबूत नीतियों पर काम करना होगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। अन्यथा, हम केवल उपभोक्ता बनकर रह जाएंगे और वैश्विक शक्तियों के साइबर हमलों के सबसे बड़े शिकार होंगे।

संस्था के सचिव डॉ. हर्ष कुमार दौलत ने कहा कि साइबर अपराध अब केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी साइबर अपराधी सक्रिय हैं। फर्जी कॉल्स और डिजिटल ठगी के माध्यम से आम नागरिक, विशेषकर महिलाएं, बड़ी संख्या में ठगी का शिकार हो रही हैं।

डॉ. तीरथ प्रकाश ने विषय की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होकर अपने आसपास के लोगों को भी सतर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को साइबर खतरों का प्रभावी तरीके से मुकाबला करने वाली पुख्ता नीतियां बनानी होंगी।

तकनीकी सत्र में डॉ. राखी पंचोला की अध्यक्षता और डॉ. रविंद्र प्रताप राणा की उपस्थिति में 10 छात्र-छात्राओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। शोध पत्रों में साइबर युद्ध, डेटा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों को गहराई से विश्लेषण किया गया।

तकनीकी सत्र में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रविंद्र प्रताप राणा ने साइबर युद्ध और सूचना युद्ध को आधुनिक युग का सबसे बड़ा खतरा बताते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज खतरा सिर्फ व्यक्तिगत डेटा, बैंक खातों या मोबाइल-कंप्यूटर हैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा हुआ मुद्दा बन चुका है।

डॉ रविंद्र प्रताप राणा।

डॉ. राणा ने कहा कि साइबर स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके ताकतवर देश पूरी दुनिया के छोटे और कमजोर देशों, खासतौर पर तीसरी दुनिया के देशों की आम जनता के मानसिक ढांचे को नियंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आज इंसान के सोचने-समझने के तरीके पर कब्जा जमाने की कोशिशें की जा रही हैं। यह सिर्फ डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग नहीं है, बल्कि एक नए युग की मानसिक गुलामी की शुरुआत है, जिसमें न तो टैंकों की जरूरत होगी और न ही बमवर्षकों की।

उन्होंने आगे कहा, कल्पना कीजिए, अगर किसी खास देश में बैठे चंद ताकतवर लोग पूरी दुनिया के बड़े हिस्से की आम जनता को मानसिक रूप से अपने तरीके से सोचने और समझने के लिए तैयार कर लें, तो इसके दुष्परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं। यह सिर्फ व्यक्तिगत सोच को प्रभावित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर देशों की सरकारों के तख्तापलट, चुनावों के नतीजों में हेरफेर और अपनी मनमर्जी की कठपुतली सरकारों को स्थापित करने तक दिखाई देगा।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज सूचना और साइबर युद्ध का इस्तेमाल केवल जासूसी के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को मनचाही दिशा में मोड़ने के लिए किया जा रहा है। बड़े और ताकतवर देश डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और AI-आधारित सिस्टम्स के जरिए न सिर्फ विचारधाराओं को नियंत्रित कर रहे हैं, बल्कि पूरे समाज के मानस को भी प्रभावित कर रहे हैं।

डॉ. राणा ने कहा कि इस तरह के डिजिटल हथियारों का इस्तेमाल अब सैन्य युद्ध से अधिक प्रभावी हो चुका है। बिना किसी हथियार के, बिना किसी सैन्य हस्तक्षेप के, केवल डिजिटल कंट्रोल और साइबर हमलों के माध्यम से पूरी की पूरी अर्थव्यवस्थाएं गिराई जा सकती हैं, संप्रभु देशों को कमजोर किया जा सकता है और उनकी सरकारों को बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सरकारों या सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि हर नागरिक को जागरूक होने की जरूरत है, ताकि वह इस मानसिक गुलामी और डिजिटल साम्राज्यवाद का शिकार न बने।
 अगर हमने समय रहते साइबर सुरक्षा और सूचना युद्ध के खतरों को नहीं पहचाना, तो आने वाले वर्षों में संप्रभुता की अवधारणा ही खतरे में पड़ सकती है।”

कार्यक्रम का शुभारंभ और प्रमुख उपस्थित लोग

कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. प्रभावती, सचिव डॉ. हर्ष कुमार दौलत, कोषाध्यक्ष डॉ. निशांत, और प्राचार्य डॉ अजीत कुमार राव, डॉ. विनीता द्वारा मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके पश्चात महाविद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

गोष्ठी का संचालन डॉ. पूनम चौधरी और डॉ. निशा पाल ने किया। सेमिनार में आरजीपीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर निवेदिता कुमारी, डॉ. केपी तोमर, सहसंयोजक डॉ. मनोज छोकर डॉ रणवीर सिंह सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे। सेमिनार का संयोजन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विनीता भार्गव ने किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजीत कुमार राव ने सेमिनार के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं, प्राध्यापकगण, और कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

अगर आप इस सेमिनार को लाइव सुनना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें

https://youtube.com/live/IzeZYOQEU1k?feature=share

Please follow and like us: