मेरठ। देशभर के किसानों का दिल जीतने की सियासी मुहिम पर निकले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को करीब 3 घंटे मेरठ में रहे। उन्होंने जंगेठी गांव में हुक्का गुड़गुड़ाया, छाछ पी और किसान चौपाल लगाई। दबथुवा इंटर कॉलेज के मैदान में किसानों की सभा में भाषण दिया। उन्हें प्रतीक के तौर पर हल भी भेंट किया गया। करीब सवा पांच बजे शहर में रालोद नेता सुनील रोहटा के घर पहुंचे तो उन्हें चौधरी चरण सिंह की पुस्तक भी भेंट की गई। पर इस पूरे दौरे में जंगेठी के एक किसान ने जो दर्द दो मिनट में बयां किया उसका मुकम्मल समाधान मंत्री जी के तीन घंटे के दौरे में भी नहीं मिल सका।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ पर निकले हैं। इसके चौथे दिन रविवार को वह मेरठ में थे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही बागपत सांसद राजकुमार सांगवान मेरठ सांसद अरुण गोविल और केंद्रीय राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख दोपहर बाद करीब पौने तीन बजे मेरठ–करनाल हाईवे पर जंगेठी गांव पहुंचे। यहां खाट पर बैठकर चौहान ने किसान चौपाल शुरू कर दी। किसानों ने नेताओं की खूब आवभगत की और फिर बेलौस अंदाज में अपनी बात रखी ।

“गन्ना पैदा करो, पर मिल वाले खरीदें या नहीं, उसकी गारंटी कोई नहीं देता।”
यह आवाज़ थी उस बुजुर्ग किसान की, जिसने माइक संभालते ही पूरे कृषि तंत्र की परतें उधेड़ दीं। करीब 70 साल के ताऊ बोले, और माहौल बदल गया।
“जिस वैरायटी की पैदावार ज़्यादा होती है, मिल वही बंद करवा देती है।
जो बीज मिल पास करता है, उसमें खाद-पेस्टीसाइड की खपत कई गुना ज़्यादा होती है।
सरकार ने लाइसेंस दे दिए कीटनाशकों और खाद वालों को, पर कोई जांच नहीं करता।
हम फसल क्या निकालें, लागत भी नहीं निकाल पाते। सब किसान कर्ज में हैं।
फसल के दाम नहीं मिलते, और जो अच्छी फसल होती है, वही मिल नहीं खरीदती।
हम चारों ओर से घिरे हैं। पंद्रह साल में गन्ने का दाम सिर्फ बीस रुपये बढ़ा है।
अब हालत यह है कि एक बीघा में ₹335 का घाटा हो रहा है।
हमारे बच्चों का मोह टूट गया खेती से।
वो पूछते हैं — आप लोग बूढ़े हो गए, क्या पाया खेती से?
हम मजदूरी कर लेंगे, पर खेती नहीं करेंगे।”
नेताओं का एक पूरा दल सन्न रह गया।
सरकार की स्कीमों, तकनीक, और विकास की बातों पर किसानों की ज़मीनी सच्चाई भारी पड़ रही थी। नारे चुप थे, तालियाँ थम चुकी थीं।
जगत सिंह, सत्यवीर जंगेठी, सतपाल, मदन पाल, चौधरी जगत सिंह, नरेश पाल, सहंसरपाल।
कुल सात किसानों ने अपना दर्द बया किया। इनमें से किसी किसान ने कोई भाषण नहीं दिया — बस उसने देश की सबसे बड़ी विफल नीति का पोस्टमार्टम कर दिया।
बागपत सांसद डॉ राजकुमार सांगवान ने माइक हाथ में लिया और बात संभालते हुए बोले आपकी यही बातें सुनने के लिए चौहान साहब गांव की चौपाल पर आए हैं।

शिवराज चौहान ने कहा, किसानों की हर समस्या का समाधान होगा। नकली कीटनाशक बनाने या बेचने वाले
जेल जाएंगे। कृषि वैज्ञानिकों के साथ एक टीम के रूप में हम किसानों से बात करने आये हैं। उन्नत खेती के लिए और प्रयास की जरूरत है। उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उत्पादन का ठीक दाम देना और किसानों का नुकसान न हो इसके लिये समुचित उपाय कर सके, यही ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का लक्ष्य है। हम चाहते हैं कि लैब एसी कमरों से निकलकर किसान के खेत तक आए।
केंद्रीय मंत्री मीडिया से बोले – “किसानों की बातों को गंभीरता से लिया गया है। बाकी बातें उन्होंने दबथुआ में किसानों की सभा के मंच से कहीं। उन्होंने कहा

रविवार तक उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के लगभग 2700 स्थानों पर 3 लाख 25 हजार से अधिक किसान अभियान में शामिल हुए हैं। इस बीच प्रदेश में अभियान के प्रभावी संचालन के उद्देश्य से कृषि निदेशक ने 38 अधिकारियों 7 और 8 जून के लिए दो-दो जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है।
बिना विकसित कृषि के विकसित भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। इसी उद्देश्य से 16 हजार कृषि वैज्ञानिकों को अपने शोध और अनुभव किसानों के बीच लाने के साथ किसानों की समस्या के आधार पर नए शोध करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि अगर मंत्री, सांसद, वैज्ञानिक, कृषि विभाग पूरे देश में एक टीम के साथ काम करें तो देश का उत्पादन भी बढेगा और किसानों की आय भी बढेगी। इसके साथ हम विश्व को भोजन देने में सक्षम हो सकेंगे। उन्होंने कृषि वैज्ञानिक सरदार बल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय, मोदीपुरम मेरठ, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, मेरठ को कृषक वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से किसानों का ज्ञानवर्धन करने का निर्देश दिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. मांगीलाल जाट आदि मौजूद रहे।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाषण के मुख्य बिंदु:
- कृषि विभाग के अधिकारियों की भूमिका:
मंत्री ने जोर दिया कि कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों के खेतों में जाकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए, न कि केवल कार्यालयों में बैठकर नीतियाँ बनानी चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि मैं खुद खेत में नहीं जाऊँगा, तो मुझे नुकसान उठाना पड़ेगा।” - उन्नत खेती के लिए प्रयास:
उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाना है। इसके लिए अच्छे बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। - किसानों की आय बढ़ाने के उपाय:
मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं में सहायता, किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाना और एमएसपी में सुधार शामिल हैं। - किसानों से संवाद:
उन्होंने बताया कि सरकार किसानों से लगातार संवाद कर रही है और उनके सुझावों के आधार पर नीतियों में सुधार किया जा रहा है।
PoliticalAdda की टिप्पणी:
किसान ने कोई भाषण नहीं दिया — उसने देश की सबसे बड़ी विफल नीति का पोस्टमार्टम कर दिया।
बीज, पेस्टीसाइड, लागत, मूल्य, भुगतान, मिल — हर मोर्चे पर किसान ठगा गया है।
अब किसान की अगली पीढ़ी कह रही है —
“खेती नहीं करेंगे। ये घाटे का सौदा है।”
क्या ये आवाज़ें नीति-निर्माताओं के कानों तक पहुँचेंगी?
या फिर एक और संवाद महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।









