माछरा महोत्सव @ 2025 …. 29 मई की रात बना इतिहास

Culture वेस्ट यूपी

Dr. Ravindra Rana/ Rajesh Sharma

मेरठ जनपद का ऐतिहासिक गाँव माछरा, जिसने इस वर्ष अपनी स्थापना के 1267 वर्ष पूरे किए, वहाँ का स्थापना दिवस समारोह – ‘माछरा महोत्सव’ 29 मई की रात ऐतिहासिक उल्लास और भावनात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हो गया।

इस आयोजन ने न सिर्फ माछरा गाँव को एक सांस्कृतिक मंच पर ला खड़ा किया, बल्कि यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणा बन गया कि कैसे एक गाँव अपनी परंपरा, इतिहास और भविष्य को साथ लेकर उत्सव बना सकता है।

समारोह की शुरुआत: मां तुझे प्रणाम
शाम 5 बजे जैसे ही रामनाथ सरस्वती शिक्षण मंदिर प्रांगण में “मां तुझे प्रणाम” की प्रस्तुति हुई, पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति और भावनात्मक ऊर्जा से भर गया। युवा कलाकारों ने माटी और मातृभूमि को समर्पित गीतों व नृत्यों से हर दर्शक का मन मोह लिया।

बॉलीवुड की चकाचौंध और गांव की आत्मा
कार्यक्रम में बॉलीवुड कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियाँ आकर्षण का केंद्र रहीं, लेकिन उनकी चमक के बीच भी माछरा की आत्मा – उसकी मिट्टी, उसके बुज़ुर्गों की आंखें, उसके बच्चों की उत्सुकता और उसके इतिहास की गरिमा – सबसे ऊँची रही।

वरिष्ठ पत्रकार नरेश उपाध्याय का सराहनीय संयोजन
इस पूरे आयोजन के सूत्रधार रहे वरिष्ठ पत्रकार श्री नरेश उपाध्याय, जिन्होंने महीनों की तैयारी, समर्पण और ऐतिहासिक दृष्टि के साथ माछरा महोत्सव को केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक “ग्राम-गौरव उत्सव” में परिवर्तित कर दिया।
गांववासियों ने उन्हें खुले दिल से धन्यवाद दिया, और इस ऐतिहासिक योगदान के लिए बधाइयाँ दीं।

गाँव की साझी स्मृति और पीढ़ियों का मिलन
इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबसूरती रही — बुज़ुर्गों और युवाओं का संवाद।
जहाँ मंच पर नए कलाकारों ने प्रस्तुति दी, वहीं दर्शकों में बैठे बुज़ुर्गों की आँखों में अतीत के दृश्य उमड़ते दिखाई दिए। कई लोगों ने पहली बार जाना कि उनका गाँव 758 ई. से आज तक एक जीवित परंपरा की तरह चला आ रहा है।

https://www.facebook.com/share/v/1DYRd6YkkE

समापन, पर एक नई शुरुआत का संकेत
रात लगभग 10:30 बजे कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन माछरा महोत्सव ने जो ऊर्जा, आत्मबोध और गर्व जगाया, वह सिर्फ एक रात का अनुभव नहीं — एक नई चेतना की शुरुआत है।

इस आयोजन ने साबित कर दिया कि गाँवों का भविष्य तभी उज्ज्वल हो सकता है, जब वे अपने इतिहास को आत्मसात करें और सामूहिकता को उत्सव में बदल दें।

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *