मेरठ में चौपाल लगाई किसानों से बोले… “मेरे रोम रोम में किसान, हर सांस में खेती”
Dr. Ravindra Rana
रविवार को मेरठ के गांवों में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला। खाट पर बैठे थे देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान – यानी एमपी के मामा। हाथ में मट्ठे का गिलास, आसपास जुटे किसान, और बीच में गूंजते ठहाके। मौका था ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान 2025’ के तहत मेरठ में आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संवाद का, जहां शिवराज ने चौपाल लगाकर यूपी के किसानों को न सिर्फ खेती के गुर बताए, बल्कि दिल से संवाद भी किया।

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से कहा, “अब दिल्ली के बंगलों से नहीं, खेत की मेंड़ों से चलेगी खेती की योजना। किसान मेरे रोम-रोम में बसे हैं, और जब तक खेतों की मिट्टी हाथ में न लगे, तब तक असली काम नहीं होता।” उन्होंने छाछ की चुस्की लेते हुए कहा कि एक हेक्टेयर ज़मीन में भी किसान फसल, सब्ज़ी, फल, पशुपालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन कर लाभ कमा सकता है।
शिवराज ने चौधरी चरण सिंह को किया याद
शिवराज सिंह ने कहा कि 29 मई को जब चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि थी, तभी इस अभियान की शुरुआत की गई। उन्होंने चौधरी साहब को भारत की कृषि परंपरा का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बताया। मामा शिवराज ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का सपना था कि किसान आत्मनिर्भर हो और खेत वैज्ञानिकों के साथ जुड़ें – अब वह सपना पूरा करने का समय है।

16,000 वैज्ञानिक गांव-गांव करेंगे संवाद
कृषि मंत्री ने बताया कि देश भर के 16,000 कृषि वैज्ञानिकों की 2,170 टीमें बनाई गई हैं, जो गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करेंगी। मिट्टी की जांच से लेकर उन्नत बीजों और तकनीकों तक – हर जानकारी अब किसान के दरवाज़े पर मिलेगी। “प्रयोगशालाओं से निकलकर वैज्ञानिक अब खेतों की चौपाल में बैठेंगे,” उन्होंने कहा।
नकली दवा पर सख्ती का ऐलान
कृषि मंत्री ने फसलों की नकली दवाओं पर सख्त कानून बनाने की घोषणा की। “अब ये नहीं चलेगा कि बाजार में कोई भी दवा बेच दे और किसान का नुकसान हो। ऐसे दुकानदारों को नहीं छोड़ा जाएगा,” उन्होंने सख्ती से कहा। साथ ही किसानों से अपील की कि अगर किसी दवा से नुकसान हो तो तुरंत जानकारी दें।
गांव-गांव जाकर किसानों से बात करेंगे मामा
शिवराज सिंह ने कहा कि वह सिर्फ मंत्री बनकर नहीं, एक किसान का बेटा बनकर खेतों में उतर रहे हैं। जंगेठी गांव में गन्ने के खेत में उन्होंने पेड़ के नीचे चौपाल लगाई। किसानों ने उन्हें हल भेंट किया, मट्ठा पिलाया, और ढेरों सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वे लगातार गांवों का दौरा करेंगे, ताकि खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सके।
चौपाल में मौजूद रहे दिग्गज
इस मौके पर यूपी सरकार के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, मेरठ के सांसद अरुण गोविल, बागपत के सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, सुनील रोहटा और ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट भी मौजूद रहे। सभी ने किसानों से संवाद किया और कृषि के भविष्य पर चर्चा की।

सुनील रोहटा के बेटों के कंधे पर रखा हाथ,
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का रविवार को मेरठ दौरा सियासी कम और मानवीय ज्यादा रहा। कहीं खेत में पेड़ के नीचे चौपाल लगाई तो कहीं खाट पर बैठकर छाछ की चुस्की ली और किसानों संग ठहाके लगाए। लेकिन सबसे भावुक पल तब आया जब वह मेरठ शहर में एक रालोद नेता के घर पहुंचे।

वहां उन्होंने परिजनों से आत्मीयता से मुलाकात की। न कोई राजनीतिक चर्चा, न भाषण—सिर्फ रिश्तों की गर्माहट। उनकी मुलाकातें उस भारतीय गांव की याद दिला गईं, जहां नेता नहीं, मेहमान आते हैं।
इसके बाद शिवराज सिंह चौहान रोहटा क्षेत्र के किसानों के बीच पहुंचे। किसानों से मुलाकात करते हुए उन्होंने उनके बेटों के कंधे पर हाथ रखा, मानो ये कह रहे हों—”मैं तुम्हारा अपना हूं।”
उन्होंने पूरी बात ध्यान से सुनी, किसी को न रोका, न टोका। हर किसान को पूरा वक्त दिया, चाहे वह फसल की बात करे या खाद की, मौसम की शिकायत करे या मंडी की हालत पर चिंता जताए।
शिवराज सिंह ने सुनने के बाद एक ऐसा इमोशनल डोज दिया, जिसे किसान शायद लंबे वक्त तक नहीं भूलेंगे। बोले,
“खेती मेरी सांसों में बसी है। किसान मेरे रोम-रोम में बसते हैं। जब तक खेतों में हल चलेगा, मैं चैन से नहीं बैठूंगा।”
विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत उनका यह दौरा जितना तकनीकी था, उतना ही आत्मीय भी। उन्होंने कहा कि अब खेती दिल्ली के बंगलों से नहीं चलेगी। वैज्ञानिकों को खेतों में आना होगा।
शिवराज ने यह भी कहा कि अब नकली दवा बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, और गांव-गांव जाकर वैज्ञानिक मिट्टी की जांच करेंगे, ताकि किसान को उसकी ज़मीन का असली मिजाज पता चल सके।

केंद्रीय कृषि मंत्री और “मामा” के नाम से प्रसिद्ध हैं शिवराज चौहान
पूरा नाम: शिवराज सिंह चौहान
जन्म: 5 मार्च 1959, सीहोर, मध्य प्रदेश
राजनीतिक दल: भारतीय जनता पार्टी (BJP)
लोकसभा सदस्य: विदिशा से सांसद
पद: केंद्रीय कृषि मंत्री, भारत सरकार
पहचान:
- मध्य प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं
- ‘मामा’ के नाम से आम जनता में लोकप्रिय
- किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी प्रवर्तक
मुख्य पहल:
- लाड़ली लक्ष्मी योजना
- किसान समृद्धि योजना
- अब “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के अगुवा
स्टाइल:
- ज़मीन से जुड़ा नेता
- किसानों के बीच चौपाल लगाने और सीधे संवाद के लिए जाने जाते हैं
- हल्की-फुल्की बातों और ठहाकों से माहौल बनाने में माहिर
नवीन पहल:
- खेती के लिए “लैब टू लैंड” मॉडल
- नकली दवाओं के खिलाफ सख्त कानून की तैयारी
- वैज्ञानिकों को खेतों में भेजने की नई रणनीति
सीएम से ‘किसान मामा‘
राजनीति के मंचों से लेकर खेतों की मेड़ तक—शिवराज सिंह चौहान ने अपना अंदाज़ नहीं बदला। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में देश के केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में वह अब ‘मामा’ के रोल में एक बार फिर चर्चा में हैं। चौपाल में खाट पर बैठकर छाछ पीते हुए किसानों से संवाद करते शिवराज, न केवल आत्मीय दिखे बल्कि उन्होंने अपने कार्यशैली की खास छाप भी छोड़ी।

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि को आर्थिक रीढ़ बताते हुए कहा कि अब खेती को ‘प्रयोगशाला से खेत’ तक ले जाना है। इसके लिए देशभर में 16 हजार कृषि वैज्ञानिकों की 2170 टीमें बनाई गई हैं, जो सीधे गांवों में जाकर किसानों से मिलेंगी।

राजनीति में शिवराज की एक खास पहचान रही है—ज़मीन से जुड़ाव। चाहे मुख्यमंत्री रहते हुए लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत हो या अब केंद्रीय मंत्री बनने के बाद विकसित कृषि संकल्प अभियान—हर योजना में उनकी सोच का केंद्र आमजन और किसान रहे हैं।
शिवराज ने कहा, “दिल्ली के बंगले में बैठकर खेती नहीं समझी जा सकती, उसके लिए किसानों के बीच जाना होगा।” नकली दवाओं के खिलाफ कानून बनाने की बात हो या कृषि वैज्ञानिकों को खेतों तक लाने की योजना, उनके हर शब्द में खेती और किसान के लिए गहराई से सोचने वाला नेता दिखा।
राजनीति में सीएम से ‘किसान मामा’ तक का सफर तय करने वाले शिवराज सिंह चौहान अब किसानों के साथ चौपाल पर बैठकर उनकी बात सुन रहे हैं—बिना टोके, बिना रोके। यही है उनका असल अंदाज़।

