एयरपोर्ट एनक्लेव: विला-फ्लैट नहीं, सिर्फ हवाई सपने बेचे!

Meerut Adda


मेरठ, 3 जून 2025 | रिपोर्ट: PoliticalAdda.com

मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2014 में शुरू की गई एयरपोर्ट एनक्लेव आवासीय कॉलोनी, जो शताब्दीनगर के सेक्टर-10 में डॉ. भीमराव अंबेडकर हवाई पट्टी के समीप स्थित है, आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। कॉलोनी में रह रहे 480 फ्लैटधारकों और 48 विला निवासियों ने संयुक्त रूप से मेरठ विकास प्राधिकरण को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें उन्होंने कॉलोनी की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है।

ये हैं प्रमुख शिकायतें:

1. ग्रीन बेल्ट खतरा, दीवार अधूरी:
डी और ई पॉकेट में स्थित विला के सामने की 12198 वर्ग मीटर ग्रीन बेल्ट में झाड़ियाँ बेतरतीब रूप से उग आई हैं। यहां सर्प, बिच्छू और जंगली जानवरों का डेरा है। साथ ही, हवाई पट्टी की ओर की कॉलोनी की सीमा पर कोई दीवार नहीं बनाई गई है, जिससे वन्य जीवों का लगातार आना-जाना बना हुआ है।

2. फ्लैटों की जर्जर स्थिति:
2018 में निर्मित चार मंजिला फ्लैटों की बाहरी दीवारें बिना किसी मरम्मत और रंगाई-पुताई के जर्जर हो चुकी हैं। किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।

3. पार्क बने जहरीले जीवों के ठिकाने:
कॉलोनी में बने चार पार्कों की सफाई और रखरखाव नहीं होने के कारण ये ज़हरीले जीवों के अड्डे बन गए हैं।

4. स्ट्रीट लाइट के तार जानलेवा:
कॉलोनी की स्ट्रीट लाइटों के खुले और जर्जर तारों से करंट लगने की घटनाएं हो रही हैं। किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।

5. सड़कें बदहाल:
कॉलोनी के भीतर की सड़कें गड्ढों और टूट-फूट से बेहाल हैं। निवासियों ने जल्द मरम्मत की मांग की है।

6. बिजली व्यवस्था में भारी अव्यवस्था:
मीटर पैनल और भूमिगत केबल जर्जर हालत में हैं। नए कनेक्शन की प्रक्रिया जटिल हो गई है। बिजली विभाग और प्राधिकरण एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

7. मुख्य गेट पर सुरक्षा नदारद:
मुख्य द्वार पर कोई प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। गेट पर तैनात कर्मचारी सिर्फ ट्रांसफॉर्मर की निगरानी तक सीमित हैं। कोई भी बाहरी व्यक्ति बेरोक-टोक भीतर आ सकता है, जिससे निवासियों की सुरक्षा खतरे में है।

क्या बोले निवासी?

कॉलोनीवासियों ने मांग की है कि मेरठ विकास प्राधिकरण इन समस्याओं को तत्काल प्राथमिकता पर संज्ञान में ले और सभी बिंदुओं पर समुचित कार्रवाई करे। ज्ञापन में 15 से अधिक फ्लैटधारकों के हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने इन समस्याओं का सामूहिक रूप से विरोध किया है।

सवाल उठता है…

एक दशक पहले जिन सपनों के साथ ये कॉलोनी बनाई गई थी, क्या मेरठ विकास प्राधिकरण उन्हें पूरा कर पाया है? यदि नहीं, तो जवाबदेही कौन तय करेगा?

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