“लिफ्ट बंद, बुज़ुर्ग और बीमार कैद; महिलाएं उतरीं सड़कों पर, बिजलीघर में दिया धरना”
मेरठ, मोदीपुरम।
शहर की स्मार्ट सिटी कहे जाने वाली मेरठ में 20 घंटे तक बिजली गुल रहने से अन्सल्स कोर्टयार्ड जैसी हाई-प्रोफाइल सोसायटी में जनजीवन ठप हो गया। 10 मंजिला इमारतों में लिफ्ट बंद होने से बुजुर्ग, बीमार और महिलाएं सीढ़ियों के सहारे भी नहीं आ-जा सकीं। लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए। इस हालात से तंग आकर कॉलोनी के निवासियों का सब्र जवाब दे गया।

सोमवार को कॉलोनी की महिलाओं और पुरुषों ने एकजुट होकर सोफीपुर बिजलीघर का घेराव कर दिया। जैसे ही भीड़ ने बिजलीघर पर कब्जा जमाया, वहां मौजूद कर्मचारी घबराकर मौके से खिसक गए। प्रदर्शनकारियों ने बिजलीघर के गेट बंद कर दिए और अंदर डटे रहे।
RWA अध्यक्ष अजीत कुमार ने बताया, “बीस घंटे से बिजली नहीं थी, हेल्पलाइन पर कोई जवाब नहीं मिला। बुज़ुर्ग बीमार हैं, महिलाएं परेशान हैं। जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो जनता को सड़कों पर उतरना पड़ा।”
सिर्फ अन्सल्स कोर्टयार्ड ही नहीं, बल्कि आसपास के कई इलाकों — जैसे गगोल रोड, साईं लोक और सत्यम एंक्लेव — के लोग भी बिजली संकट से जूझ रहे थे। जब उन्होंने देखा कि कोर्टयार्ड के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वे भी इस आंदोलन में शामिल हो गए।

घंटों की नारेबाजी और दबाव के बाद, बिजलीघर के कर्मचारियों ने अफसरों को हालात की गंभीरता बताई और तत्काल बिजली सप्लाई शुरू करने का दबाव बनाया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कह दिया था कि जब तक बिजली चालू नहीं होती, तब तक धरना खत्म नहीं होगा।
अंततः शाम तक बिजली बहाल हुई और तभी जाकर लोगों का गुस्सा थमा। बिजलीघर के कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली।

क्या यह स्मार्ट सिटी का हाल है?
शहर में 20 घंटे बिजली गुल रहना और फिर लोगों का खुद बिजलीघर जाकर बिजली मांगना — यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अन्सल्स कोर्टयार्ड की घटना मेरठ के उस सिस्टम की पोल खोलती है जो दावा करता है कि वह 24×7 बिजली आपूर्ति कर रहा है।

