मिट्टी, किसान और बागवानी…भारत के भविष्य की जड़ें

मेहर ए आलम ख़ानमुख्य संपादक, नर्सरी टुडे, नई दिल्लीसलाहकार, सिनेइंक पॉडकास्ट्स, लंदन दिसंबर के महीने में दो अवसर हमें चुपचाप उस आधार की याद दिलातेहैं, जिस पर भारत की कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा टिकेहुए हैं। 5 दिसंबर को विश्व मृदा (मिट्टी) दिवस हमें यह सोचने पर मजबूरकरता है कि जैसा लियोनार्डो दा विंची […]

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आम— भारत की गौरवशाली विरासत

लेखक : मेहर-ए-आलम ख़ान मुख्य संपादक ‘नर्सरी टुडे’ वरिष्ठ पत्रकार, कम्युनिकेशन एक्सपर्ट , स्वास्थ्य, पर्यावरण और उर्दू साहित्य पर लेखन व प्रसारण में चार दशकों का अनुभव। ‘सिनेइंक पॉडकास्ट्स’ से भी जुड़े हैं । भारत में जुलाई का महीना आम के मौसम की पराकाष्ठा का प्रतीक है।यही वह समय है जब देश में आम का सर्वाधिक जश्न मनाया जाता है।दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में आम महोत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य आम की विविधता और  महिमा को प्रदर्शित करना, आम-संस्कृति, आम-व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देना, आम-निर्यात को प्रोत्साहित करना और सबसे बढ़कर भारत कीएक अत्यंत प्रिय धरोहर का उत्सव मनाना होता है। फलों का राजा कहलाने वाला आम भारत की अद्भुत सांस्कृतिक संपन्नता और आनंददायक विविधता का जीवंत प्रतीक है। यह स्वादिष्ट फलभारत के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। यह सदियों से भारतीय जनमानस के हृदय और स्वाद पर राज करता आ रहा है। कुछ जीवाश्म प्रमाणों के आधार पर पुराजीव वैज्ञानिक मानते हैं कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आम लगभग 25 से 30 मिलियन वर्ष  (कुछ मतों केअनुसार 60 मिलियन वर्ष) पहले से मौजूद है।) भारत में आम की व्यवस्थित खेती का इतिहास चार हजार वर्षों से भी अधिक पुराना है, जबकि पश्चिमी जगत में आम केवल चार सौ वर्ष पूर्व ही  पहुंच पाया।आज भारत न केवल आम का जन्मस्थल है, बल्कि आम उत्पादन में विश्व में अग्रणी भी है। यही कारण है कि भारत को “आमों की धरती” भी कहा जाता है। आम तीन देशों – भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस – का राष्ट्रीय फल है। बांग्लादेश में आम का पेड़ राष्ट्रीय वृक्ष का दर्जा प्रखता है। भारत के अलावा चीन, थाईलैंड, मैक्सिको, पाकिस्तान, फिलीपींस, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, ब्राज़ील, नाइजीरिया, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन  आदि देशों में भी आम पैदा होता है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में भी आम का विशेष स्थान है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों जैसे प्राचीन ग्रंथों में आम का उल्लेख मिलता है।वैदिक साहित्य में आम को ‘सहकरा’ या ‘सहकारा’ कहा गया है।पुराणों और उपनिषदों में आम के पेड़ों की कटाई को सख्त मना कियागया है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में आम को कल्पवृक्ष कहागया है – ऐसा वृक्ष जो सभी मनोकामनाएं पूरी कर सकता है। हिंदूपरंपराओं में आम के पेड़ को पवित्र माना जाता है। आम के पत्तों कीतोरण द्वारों पर लगाई जाती है और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका उपयोगशुद्धता और दिव्यता के प्रतीक के रूप में किया जाता है। विवाह, दीपावली और पूजा-पाठ के अवसरों पर आम के पत्तों की तोरणसजावट का आम दृश्य है। यहाँ तक कि हवन में भी आम की लकड़ी का उपयोग होता है। बौद्ध साहित्य में भी आम के पेड़ और फल की पवित्रता का उल्लेख है।बौद्ध मान्यता में आम को ज्ञान और उदारता का स्रोत माना गया है। एकप्रसिद्ध कथा के अनुसार आम्रपाली नामक राजनर्तकी और भगवान बुद्धकी भक्त ने उन्हें एक आम का बाग़ उपहार स्वरूप दिया था जहाँ वे […]

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भारतीय किसान यूनियन का तीन दिवसीय चिंतन शिविर 16-18 जून को हरिद्वार में, मेरठ से हजारों किसान होंगे शामिल

मेरठ। 14 जून 2025 भारतीय किसान यूनियन का तीन दिवसीय चिंतन शिविर 16-18 जून को हरिद्वार में, मेरठ से हजारों किसान होंगे शामिलजिला मेरठ से भाकियू के पदाधिकारी तैयारियों में जुटे, जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कार्यकर्ताओं के साथ की समीक्षा बैठकें मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का राष्ट्रीय स्तर का तीन दिवसीय चिंतन शिविर 16 […]

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गांव की खाट पर मामा शिवराज… छाछ की चुस्की, ठहाके

मेरठ में चौपाल लगाई किसानों से बोले… “मेरे रोम रोम में किसान, हर सांस में खेती” Dr. Ravindra Ranaरविवार को मेरठ के गांवों में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला। खाट पर बैठे थे देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान – यानी एमपी के मामा। हाथ में मट्ठे का गिलास, आसपास जुटे किसान, […]

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भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री, किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को देशभर में श्रद्धांजलि

नई दिल्ली/लखनऊ/मेरठ:भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर पूरे देश में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। राजधानी दिल्ली में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर बागपत से सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान भी मौजूद रहे। लखनऊ में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने […]

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बाबा टिकैत… किसानों का महानायक जो अंतिम सांस तक रहा खांटी किसान

बेलौस अंदाज, साफगोई और ईमानदारी बनी रही ताकत मेरठ कमिश्नरी से दिल्ली में बोट क्लब तक चलाए ऐतिहासिक आंदोलन चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्य तिथि पर विशेष डॉ. रविंद्र प्रताप राणा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत। आठ साल के महेंद्र से चौधरी टिकैत, बाबा टिकैत और फिर महात्मा टिकैत बनने का सफर संघर्षों भरा रहा। एक ठेठ किसान जो […]

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Rakesh Tikait wearing a traditional turban, symbolizing farmer leadership and legacy in Indian agrarian politics

पहलगाम…पगड़ी… पंचायत और सियासत

टिकैत की पगड़ी का सवाल, वेस्ट यूपी की सियासत में उबाल पहलगाम से पगड़ी तक: एक विरोध ने कैसे खड़े कर दिए बड़े सवालपगड़ी की गरिमा या सियासत की चाल? जाट नेतृत्व और किसान राजनीति की नई कसौटीपंचायत में कौन साथ, कौन दूर: सियासी दलों की चुप्पी और सक्रियता का विश्लेषण डॉ. रवींद्र प्रताप राणा […]

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छोटे चौधरी को याद कर नम हुईं आंखें

चौधरी अजित सिंह की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि मेरठ/बागपत।भारतीय राजनीति में किसानों की आवाज रहे चौधरी अजित सिंह की चौथी पुण्यतिथि (6 मई) की पूर्व संध्या पर सोमवार को छपरौली से पांच बार विधायक रहे चौधरी नरेंद्र सिंह एडवोकेट के आदर्श नगर, मेरठ स्थित आवास पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। […]

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