पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक जी का यह संदेश न केवल उनकी व्यक्तिगत पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि उनके सिद्धांतों, ईमानदारी और देशभक्ति की मिसाल भी प्रस्तुत करता है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी सच्चाई और न्याय का साथ नहीं छोड़ा। किसान आंदोलनों से लेकर पुलवामा हमले तक, उन्होंने हमेशा जनता के हित में अपनी आवाज बुलंद की।
आज, जब वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और ICU में भर्ती हैं, तब पढ़िए सत्यपाल मलिक का संदेश …
नमस्कार साथियों,
मैं पिछले कुछ समय से अस्पताल में भर्ती हूं और किडनी की गंभीर समस्या से जूझ रहा हूं। मेरी तबीयत बिगड़ती जा रही है, और मुझे ICU में शिफ्ट किया गया है।
इस कठिन समय में, मैं अपने देशवासियों से कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा करना चाहता हूं:
जब मैं गवर्नर था, मुझे 150-150 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई, लेकिन मैंने अपने राजनीतिक गुरु, किसान मसीहा स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी की तरह ईमानदारी से काम किया और कभी अपने ईमान से समझौता नहीं किया।
किसान आंदोलन के दौरान, मैंने बिना किसी राजनीतिक लोभ के किसानों की मांगों का समर्थन किया।
महिला पहलवानों के आंदोलन में, मैं जंतर-मंतर से लेकर इंडिया गेट तक उनके साथ खड़ा रहा।
पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर जवानों के मामले को मैंने उठाया, लेकिन आज तक इस सरकार ने कोई जांच नहीं करवाई।
अब, सरकार मुझे CBI का डर दिखाकर झूठे चार्जशीट में फंसाने की कोशिश कर रही है। जिस टेंडर को लेकर मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसे मैंने खुद निरस्त किया था और प्रधानमंत्री जी को इसकी जानकारी दी थी। मेरे तबादले के बाद ही उस टेंडर पर हस्ताक्षर हुए।
मैं सरकार और सरकारी एजेंसियों को बताना चाहता हूं कि मैं किसान का बेटा हूं। मैं न तो डरूंगा और न ही झुकूंगा।
अपने 50 वर्षों से अधिक के राजनीतिक जीवन में, मैंने बड़े-बड़े पदों पर रहते हुए देश की सेवा की है। आज भी मैं एक कमरे के मकान में रहता हूं और कर्ज में हूं। अगर मेरे पास धन-दौलत होती, तो मैं प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवा रहा होता।
सरकार से मेरी अंतिम विनती है कि मेरे प्यारे देश की जनता को सच्चाई जरूर बताएं कि आपकी जांच में मेरे पास क्या मिला?
जय हिंद।
— सत्यपाल मलिक (पूर्व राज्यपाल)

