Political Adda.com Desk
22 मई को दो बड़ी खबरें आईं। पहली ये कि CBI ने जम्मू कश्मीर के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक के खिलाफ 2200 करोड़ की गड़बड़ी के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
दूसरी खबर ये आई कि सत्यपाल मलिक ने सोशल मीडिया पर कहा कि वो अस्पताल में भर्ती हैं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें शुभचिंतकों के फोन आ रहे हैं, लेकिन वो जवाब नहीं दे पा रहे। वो राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 11 मई से भर्ती हैं और डायलिसिस पर हैं।

इन दोनों खबरों ने देशभर की सियासत में तहलका मचा दिया। सत्यपाल मलिक का टवीट और उनके खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट की खबरें पूरे सोशल मीडिया से मेनस्टरीम मीडिया तक सुर्खियों में छा गईं।
आखिर ऐसा क्यों हुआ। कौन हैं सत्यपाल मलिक। इस पर बात करने से पहले आइए जानते हैं मोदी सरकार के खिलाफ सत्यपाल मलिक के वो पांच स्टेटमेंट जिन्होंने तहलका मचा दिया।
Highlights
दो नवंबर 2012 को मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि पुलवामा अटैक के वक्त PM नरेंद्र मोदी कॉर्बेट नेशनल पार्क में अपनी शूटिंग करवा रहे थे। बाहर आकर PM ने एक ढाबे से फोन कर मुझे पूछा- क्या हुआ? मैंने कहा- ये हमारी गलती से हुआ। तब मुझे चुप करवा दिया गया।
25 अप्रैल 2023 को सत्यपाल मलिक ने कहा कि देश बहुत गलत आदमी के हाथ में है। यदि किसान एकजुट नहीं हुआ और केंद्र में यही सरकार दोबारा सत्ता में आई तो किसान नहीं बचेंगे। ये सबसे पहले खेती खत्म कर देंगे ताकि आप मजदूरी करने लगें। उसके बाद फौज को खत्म कर देंगे।
21 मई 2023 को सत्यपाल मलिक ने कहा , अगर अगले चुनाव तक जनता ने बीजेपी के खिलाफ मतदान नहीं किया तो ये आपको मतदान करने लायक ही नहीं छोड़ेंगे। ये कह देंगे कि जब हम ही चुनाव जीतते हैं तो चुनाव कराने की क्या ज़रूरत। न कोर्ट रहेंगे, न फोर्स रहेगी, न फौज होगी और न कोई ऐसा सिस्टम रहेगा, जिससे इन पर कंट्रोल किया जा सके।
22 मई 2023 को सत्यपाल मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी नाक के नीचे भ्रष्टाचार करवाते हैं। इसमें इनकी हिस्सेदारी होती है और पूरी रकम अड़ाणी को जाती है।
6 मई 2025 को मलिक ने कहा कि पहलगाम की असफलता के लिए PM मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने अब तक इसकी जिम्मेदारी नहीं स्वीकारी है।
आइए अब जानते हैं कौन हैं सत्यपाल मलिक
सत्यपाल मलिक अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। ये वो वक्त था जब जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किया गया।
अप्रैल 2023 में मलिक ने न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ के लिए देश के मशहूर इंटरव्यूअर करण थापर को एक साक्षात्कार दिया.
इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले के लिए न सिर्फ़ केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार बताया बल्कि भ्रष्टाचार को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई गंभीर आरोप लगाए.

यह पहली बार था जब भारतीय जनता पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता और कई अहम पदों पर रहे व्यक्ति ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला.
यह पहली बार नहीं था जब सत्यपाल मलिक के बयानों को लेकर सियासत में भूचाल आया. इससे पहले भी कई ऐसे मौके आए जब उनके बयानों से, उनकी ही पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
सवाल है कि आखिर सत्यापाल मलिक ऐसा क्यों कर रहे थे? वो भी ऐसी पार्टी के ख़िलाफ़ जिसने उन्हें न सिर्फ़ लोकसभा चुनाव का टिकट दिया, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से लेकर चार राज्यों के राज्यपाल का पद तक दिया.
क्या इसमें उनके राजनीतिक हित जुड़े हुए रहे ? उनके कहे का कितना वज़न है? वे अपने पीछे जिस जाट समाज और किसानों के समर्थन का दावा करते रहे हैं? आख़िर उनके दावे में कितना दम है? इन्हीं सबको जानने के लिए ज़रूरी है कि यह जानें कि सत्यपाल मलिक कौन हैं?
यूपी के बागपत जिले के हिसावदा गांव के किसान परिवार में 24 जुलाई 1946 को जन्मे सत्यपाल मलिक के पिता का निधन तब हो गया था जब वो महज दो साल के थे।
सत्यपाल मलिक ने लोहिया के समाजवाद से प्रभावित होकर छात्र नेता के रूप में मेरठ कॉलेज छात्रसंघ से सियासत की शुरुआत की । मलिक वेस्ट यूपी के इस सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज के छात्र संघ निर्वाचित हुए। वो हिंदी आंदोलन में कूदे और सियासत की पगडंडियों पर तेजी से आगे बढ़ते गए।

सत्यपाल मलिक पर चौधरी चरण सिंह की निगाह तब पड़ी जब वो मेरठ कॉलेज मेरठ के छात्र संघ अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में आए। चौधरी चरण सिंह ने 1974 में बीकेडी के टिकट पर सत्यपाल मलिक को बागपत विधानसभा सीट से प्रत्याशी बना दिया। मलिक दस हजार वोटों के अंतर से जीत गए और उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के दिग्गज नेता आचार्य दीपांकर को हरा दिया। इस तरह मलिक महज़ 28 साल की उम्र में विधानसभा पहुंच गए.
1980 में लोकदल पार्टी से वह राज्यसभा पहुंचे, लेकिन चार साल बाद ही उन्होंने उस कांग्रेस का दामन थाम लिया जिसके शासनकाल में लगी इमरजेंसी का विरोध करने पर वो जेल गए थे.
1987 में राजीव गांधी पर बोफ़ोर्स घोटाले का आरोप लगा, जिसके ख़िलाफ़ वीपी सिंह ने मोर्चा खोल दिया और इसमें सत्यपाल मलिक ने उनका साथ दिया. कांग्रेस छोड़ सत्यपाल मलिक वीपी सिंह की जन मोर्चा पार्टी में आ गए जो साल 1988 में जनता दल में मिल गई.
1989 में देश में आम चुनाव हुए. सत्यपाल मलिक ने यूपी की अलीगढ़ सीट से चुनाव लड़ा और पहली बार लोकसभा पहुंचे.
1996 में उन्होंने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की और अलीगढ़ से चुनाव लड़ा. अलीगढ़ में उनकी बुरी हार हुई. वे चौथे नंबर पर रहे. उन्हें क़रीब 40 हज़ार वोट मिले, जबकि जीतने वाले उम्मीदवार को क़रीब दो लाख तीस हज़ार वोट मिले. इस चुनाव ने साबित कर दिया कि मलिक की जमीनी पकड़ कमजोर हो चुकी है।
करीब तीस साल लोहिया की विचारधारा के प्रभाव में आगे बढ़ने के बाद साल 2004 में सत्यपाल मलिक बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने बीजेपी के टिकट पर अपने राजनीतिक गुरु और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह के ख़िलाफ़ बागपत से चुनाव लड़ा।
यह चुनाव भी उनकी एक परीक्षा की तरह था, लेकिन इसमें वे फ़ेल साबित हुए। तीसरे नबंर पर रहे सत्यपाल मलिक को क़रीब एक लाख वोट मिले.
2005-2006 में उन्हें उत्तर प्रदेश बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया। साल 2009 में भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा का ऑल इंडिया इंचार्ज बनाया गया. 2012 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया. ये वो दौर था जब बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपनी ज़मीन तलाश रही थी और उसे एक जाट लीडर की तलाश थी.”
“उसी समय सत्यपाल मलिक की नरेंद्र मोदी के साथ करीबी हुई। 2014 में बहुमत के साथ नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनकर आए और 30 सितंबर 2017 को मलिक को बिहार का राज्यपाल बनाया गया। कहा गया कि इसमें नीतीश कुमार की भी भूमिका थी। नीतीश से भी सत्यपाल के संबंध बेहद मधुर रहे। बिहार का गर्वनर रहते मलिक अपने मेरठ कॉलेज मेरठ में आए। यहां उनका जोरदार स्वागत हुआ। सभा में मलिक ने कहा मेरे पास कोई काम के लिए मत आना पर घूमने के लिए जरूर आंउंगा। बिहार के गर्वनर हाउस में आम और अमरुद के बाग हैं। फल भी खिलाउंगा। उनके इस बयान से उनके स्थानीय शुभचिंतकों और समर्थकों को निराशा हुई।

क़रीब 11 महीने बिहार का राज्यपाल रहने के बाद अगस्त 2018 में उन्हें जम्मू-कश्मीर का गर्वनर बनाया गया। दरअसल इस फैसले के पीछे भाजपा की एक बड़ी रणनीति थी।
सत्यपाल मलिक के कार्यकाल में ही जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग हुई, जिसके बाद राज्य का सारा एडमिनिस्ट्रेशन उनके हाथ में आ गया. इसी दौरान पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया.
नवंबर 2019 से अगस्त 2020 तक वे गोवा के और अगस्त 2020 से अक्टूबर 2022 तक वे मेघालय के राज्यपाल रहे.
अब फिर लौट आते हैं सत्यपाल मलिक के उस इंटरव्यू पर जो उन्होंने 14 अप्रैल को न्यूज़ वेबसाइट द वायर के लिए करन थापर को दिया। इंटरव्यू में उन्होंने विस्तार से उन घटनाओं को ज़िक्र किया जो न सिर्फ़ केंद्र की बीजेपी सरकार बल्कि प्रधानमंत्री के लिए भी मुश्किलें पैदा करने वाली थीं।
सत्यपाल मलिक ने कहा केंद्र की लापरवाही था पुलवामा हमला’
- 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में विस्फोटकों से भरी गाड़ी, सीआरपीएफ़ के 70 बसों के काफ़िले में चल रही एक बस से भिड़ा दी गई थी. इस आत्मघाती हमले में 40 जवानों की मौत हुई थी.
इस हमले के लिए सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि जम्मू से श्रीनगर पहुंचने के लिए सीआरपीएफ़ को पांच एयरक्राफ़्ट की ज़रूरत थी. उन्होंने गृह मंत्रालय से एयरक्राफ़्ट मांगे थे, लेकिन उन्हें नहीं दिए गए. हम एयरक्राफ़्ट दे देते तो ये हमला नहीं होता क्योंकि इतना बड़ा काफ़िला सड़क से नहीं जाता.
सत्यपाल मलिक ने इंटरव्यू में कहा कि जब यह जानकारी उन्होंने प्रधानमंत्री को दी और अपनी ग़लती के बारे में बताया तो पीएम ने कहा, “आप इस पर चुप रहिए.”
इंटरवयू में मलिक ने कहा कि चार फ़रवरी से बर्फबारी के कारण जम्मू में फंसे सीआरपीएफ के जवानों को भी हवाई मार्ग से श्रीनगर पहुंचने के लिए मंज़ूरी मांगी गई थी.
“सीआरपीएफ ने इसका प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा था, जहां से इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आने पर सीआरपीएफ का काफ़िला 14 फ़रवरी को साढ़े तीन बजे जम्मू से श्रीनगर के लिए रवाना हो गया और दोपहर 3.15 बजे आतंकी हमला हो गया मलिक ने कहा कि अगर उन्हें भी कहा जाता तो वो इन हेलिकॉप्टर को इंतजाम करा सकते थे।
मलिक ने कहा, “मुझे लग गया था कि ये सारी ज़िम्मेदारी पाकिस्तान की तरफ़ जानी है तो चुप रहिए.”
11 दिन बाद भारत सरकार ने दावा किया कि पुलवामा हमले का बदला लेते हुए भारतीय वायु सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर, पाकिस्तान के शहर बालाकोट में आतंकवादी संगठन के ‘प्रशिक्षण शिविरों’ के ठिकानों पर सिलसिलेवार ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की.
दो महीने बाद यानी अप्रैल 2019 में देश में होने वाले आम चुनाव में बीजेपी ने बालाकोट स्ट्राइक को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया. मंचों से बालाकोट स्ट्राइक का नाम बार-बार सुनाई दिया.
मई 2019 में आम चुनाव के जब नतीजे आए तो भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जीत को दोहराते हुए 300 का आंकड़ा पार किया और बहुमत से केंद्र में अपनी सरकार बनाई.
इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने इशारों ही इशारों में यह भी आरोप लगाया कि पुलवामा हमले को भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के लिए इस्तेमाल किया.
सत्यपाल मलिक यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र की बीजेपी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था.
इतने बड़े फ़ैसले की जानकारी उन्हें महज़ एक दिन पहले दी गई. उन्होंने बताया, “कुछ नहीं पता था, एक दिन पहले शाम को गृह मंत्री का फ़ोन आया कि सत्यपाल मैं एक चिट्ठी भेज रहा हूं, सुबह अपनी कमेटी से पास करा के 11 बजे से पहले भेज देना.”
सत्यपाल मलिक ने कहा, “मैं सेफ़ली कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री जी को करप्शन से कोई बहुत नफ़रत नहीं है.”
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और गोवा का राज्यपाल रहते हुए उन्होंने कई बार भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रधानमंत्री के सामने उठाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
सत्यपाल मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री के क़रीबी लोग उनके पास जम्मू-कश्मीर में दलाली का काम लेकर आए, जिसमें उन्हें 300 करोड़ रुपये का ऑफ़र था. इस काम को करने से उन्होंने मना कर दिया.
22 अगस्त 2022 को सत्यपाल मलिक बागपत के खेकड़ा में किसान मजदूर सभा में बोले “दिल्ली की सीमाओं पर 700 किसान मर गए थे. मुझे कुत्ते ने नहीं काटा था कि मैं गवर्नर होते हुए पंगा लूं, लेकिन जब 700 लोग मर गए तब भी दिल्ली से एक चिट्ठी संवेदना की कहीं नहीं गई. कुतिया भी मरती है तो प्रधानमंत्री उसके प्रति संवेदना भेजते हैं.”
“देर से उनको बात समझ आई. फिर तो माफ़ी मांगकर तीनों क़ानून वापस लिए गए, लेकिन तबीयत में तब भी ईमानदारी नहीं थी.”
मलिक ने कहा जनवरी, 2022- “मैं किसानों के मामले में जब प्रधानमंत्री से मिलने गया तो मेरी पांच मिनट में लड़ाई हो गई. वो बहुत घमंड में थे. जब मैंने उनसे कहा कि हमारे पांच सौ लोग मर गए हैं.”
“जब कुतिया मरती है तो आप चिट्ठी भेजते हो, तो उन्होंने कहा कि मेरे लिए मरे हैं? मैंने कहा कि आपके लिए तो मरे हैं. जो आप राजा बने हुए हो उनकी वजह से.”
“उन्होंने कहा कि तुम अमित शाह से मिलो. मैं अमित शाह से मिला. उन्होंने कहा कि इसकी अक्ल मार रखी है लोगों ने. तुम बेफ़िक्र रहो, मिलते रहो. ये किसी न किसी दिन समझ में आ जाएगा.”
हालांकि बाद में वे अपने इस बयान से पलट गए. करण थापर के साथ इंटरव्यू में भी उन्होंने बात को दोहराते हुए कहा, “अमित शाह वाला बयान मैंने बिल्कुल ग़लत कहा.”
“अमित शाह ने मुझसे कुछ कहा था कि इनकी अकल मारी हुई है या कुछ…उसको मैं वापस लेता हूं. उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा. मैंने ग़लत कहा. ये मेरी ग़लती थी.”
जून, 2022 में मलिक ने अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए कहा कि “अग्निपथ योजना हमारी फ़ौजों को, जवानों को नीचा दिखाने का काम करेगी. उनका करियर ख़त्म कर देगी. चार साल में छह महीने ट्रेनिंग करेंगे. छह महीने छुट्टी पर रहेंगे.”
“तीन साल वो सिर्फ़ नौकरी करेंगे तो फिर कहां जाएंगे. उनकी तो शादी भी नहीं होगी. उनमें देश के लिए मरने के लिए कैसे जज़्बा होगा? ये बहुत ग़लत किया है, इसे जल्द वापस लेना चाहिए.”
मार्च, 202;0 मलिक ने बागपत के दौरे पर एक जनसभा में उन्होंने कहा था, “गवर्नर का कोई काम नहीं होता. कश्मीर में जो गवर्नर होता है, वो दारू पीता है और गोल्फ़ खेलता है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का इंटरव्यू लिया। इस 28 मिनट की इस बातचीत में राहुल गांधी ने सत्यपाल मलिक से पुलवामा… किसान आंदोलन और चुनाव जैसे तमाम सवालों पर बात की। मलिक ने कहा कि मैं लिखकर दे सकता हूं कि 2024 में भाजपा की सरकार आने वाली नहीं है।
ये हुई सत्यपाल मलिक के विवादों और उनके आरोपों की बात। लेकिन मलिक की सियासत को करीब से जानने वालों का कहना है कि उनके दिल में जो होता है वो कह देते हैं। सवाल ये भी हैं कि मलिक ने जब जममू कश्मीर में 300 करोड़ रुपये के करप्शन की बात सामने आई तो वे उन लोगों को वहीं गिरफ़्तार करवा सकते थे. पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
सत्यपाल मलिक का भाजपा से मोहभंग किसाना आंदोलन के वक्त में हुआ। उस वक्त उन्होंने ये भी कहा कि उनके पीछे उनके समाज और किसान बिरादरी के लोग बड़ी संख्या में खड़े हैं और अगर बीजेपी ने उन्हें छुआ भी तो उनकी पार्टी की दुर्गति हो जाएगी। अब सत्यपाल मलिक दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल की आईसीयू में हैं। 22 मई 2025 को सत्यपाल मलिक के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में ₹2,200 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में मलिक के अलावा उनके दो निजी सचिवों—वीरेंद्र राणा और कंवर सिंह राणा—तथा चेन्नाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CVPPPL) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एम.एस. बाबू, निदेशक अरुण कुमार मिश्रा और एम.के. मित्तल, पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रूपेन पटेल, और निजी व्यक्ति कंवलजीत सिंह दुग्गल को भी आरोपी बनाया गया है ।
CBI की जांच में पाया गया कि 2019 में इस प्रोजेक्ट के सिविल वर्क्स के ठेके के आवंटन में ई-टेंडरिंग दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया। मलिक ने पहले दावा किया था कि उन्हें इस प्रोजेक्ट से संबंधित फाइलों को मंजूरी देने के लिए ₹300 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की गई थी ।
चार्जशीट दाखिल होने के कुछ ही घंटों बाद, 77 वर्षीय मलिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत बहुत खराब है और वे दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने लिखा, “नमस्कार साथियों। मेरे बहुत से शुभचिंतकों के फ़ोन आ रहे हैं जिन्हें उठाने में मैं असमर्थ हूं। अभी मेरी हालत बहुत खराब है, मैं फिलहाल राममनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली में भर्ती हूं और किसी से भी बात करने की हालत में नहीं हूं” ।
मलिक को 11 मई से संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया है, और उनकी हालत हाल के दिनों में बिगड़ गई है। वर्तमान में वे किडनी डायलिसिस पर हैं और उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है ।
सत्यपाल मलिक के बयान लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ हैं—लेकिन क्या वे ‘सत्य के प्रतीक’ हैं, या फिर ‘राजनीतिक ठुकराहट से उपजा असंतोष’?
CBI की चार्जशीट और अस्पताल में भर्ती होने की सूचना एक ही दिन आना संयोग है या संदेश?
इस पूरे घटनाक्रम में सवाल कई हैं और जवाब अब भी धुंधले हैं। लेकिन इतना तय है कि सत्यपाल मलिक की राजनीति और बयानबाज़ी आने वाले दिनों में और चर्चा में रहेगी।
उनके समर्थक उन्हें “सत्ता से सच कहने वाला अकेला आदमी” कह सकते हैं, पर आलोचक इसे “राजनीतिक वजूद की अंतिम लड़ाई” भी मानते हैं।
