हरिद्वार, 16 जून | विशेष संवाददाता
भाकियू का हरिद्वार में तीन दिवसीय चिंतन शिविर प्रारंभ, मेरठ से 75 ट्रैक्टर-ट्रॉली और दो बसों में पहुंचे किसान
भारतीय किसान यूनियन का तीन दिवसीय वार्षिक चिंतन शिविर इस वर्ष भी 16, 17, 18 जून को हरिद्वार में आयोजित हो रहा है। इस अवसर पर संगठन की मेरठ इकाई के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में 75 ट्रैक्टर-ट्रॉली और दो बसों में सवार होकर सैकड़ों किसान हरिद्वार पहुंचे। वीआईपी घाट पर किसान जुटे और वहीं तंबू गाड़कर लंगर और भंडारे की व्यवस्था प्रारंभ कर दी। सभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां घाट के पास खड़ी की गईं हैं।

चिंतन शिविर की शुरुआत मेरठ कैंप कार्यालय पर हुई समीक्षा पंचायत से हुई, जिसकी अध्यक्षता भवभूति गुर्जर ने की और संचालन चौधरी राकेश टिकैत ने किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने जिले की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करते हुए संगठन की जमीनी हकीकत से सभी को अवगत कराया। उन्होंने 1 जुलाई से सदस्यता अभियान और सदस्यता नवीनीकरण प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। यह अभियान मवाना, सदर मेरठ और सरधना तहसील से शुरू किया जाएगा।

इसके साथ ही, मेरठ इकाई ने जिले की समस्याओं को लेकर कमिश्नरी घेराव करने का निर्णय लिया। चौधरी अनुराग चौधरी ने संगठन की मजबूती, सदस्यता विस्तार और किसान आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी का भरोसा दिलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरठ का हर किसान देशभर में किसानों की आवाज बुलंद करने में चौधरी टिकैत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा।

चिंतन शिविर में चौधरी राकेश टिकैत ने मेरठ की उपस्थिति की सराहना की और कार्यकर्ताओं को और अधिक मेहनत कर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने सरकार के 11 साल के कार्यकाल में किसानों की अनदेखी पर चिंता जताई और कल “सरकार के 11 साल, किसान के 11 सवाल” अभियान चलाने की घोषणा की।
शिविर में राष्ट्रीय महासचिव राजवीर जादौन, हर्ष, सनी प्रधान, कृष्णपाल, अनूप यादव, रामबोस दबातवा, प्रशांत त्यागी, हरीश गुर्जर, राजू कुशवाह, विनोद, वीरेंद्र, सुरेंद्र मेजर, हरवीर, अंकित, मोनू टिकरी, देशपाल, बबलू सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
हरिद्वार पहुंचे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में नंगलाताशी, दाबका, सरूरपुर, बहसूमा, मुबारकपुर, टिकरी, सिसौला, नया गांव, सुरानी, दबुठवा, रानी नंगला समेत दर्जनों गांवों के किसान शामिल हैं। तीन दिनों तक हरिद्वार की पुण्यभूमि पर किसानों की नीतियों, रणनीतियों और आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।

