जितेंद्र सतवाई से खास बातचीत: 2027, RLD-BJP गठबंधन और सिवालखास की सियासत पर खुलकर चर्चा
सिवालखास के पूर्व विधायक और बीजेपी नेता चौधरी जितेंद्र पाल सिंह उर्फ बिल्लू, जिन्हें क्षेत्र में जितेंद्र सतवाई के नाम से भी जाना जाता है, से सियासी पंचायत में डॉ. रवीन्द्र राणा ने खास बातचीत की। इस बातचीत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सिवालखास में बन रहे राजनीतिक समीकरणों, आरएलडी और बीजेपी के गठबंधन तथा संभावित उम्मीदवार को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
जितेंद्र सतवाई ने गठबंधन के उम्मीदवार को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि उम्मीदवार केवल बीजेपी या आरएलडी का नहीं, बल्कि एनडीए का उम्मीदवार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गठबंधन की सफलता के लिए जरूरी है कि उम्मीदवार को दोनों सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की स्वीकार्यता मिले।
इंटरव्यू में सिवालखास की स्थानीय राजनीति के साथ साथ सतवाई गांव, उनके परिवार, खेती, ग्रामीण जीवन और राजनीति से उनके लंबे जुड़ाव पर भी बातचीत हुई। उन्होंने गांव में रहने, खेती करने और देसी नस्ल की गायों के पालन से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।
इस खास बातचीत में यह भी चर्चा हुई कि 2027 के चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, जनता के बीच उपलब्धता और दोनों गठबंधन दलों में स्वीकार्यता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
देखिए सियासी पंचायत के इस खास इंटरव्यू में चौधरी जितेंद्र पाल सिंह उर्फ बिल्लू यानी जितेंद्र सतवाई से डॉ. रवीन्द्र राणा की पूरी बातचीत।
सवाल: भाई साहब नमस्कार, कैसे हैं आप?
जवाब: नमस्कार जी। बढ़िया हूं जी। आप बताइए, कैसे हैं?
सवाल: आजकल क्या चल रहा है?
जवाब: आजकल तो भाई साहब यही राजनीति का मामला चल रहा है। चुनाव नजदीक है, तो सब लोग अपने अपने प्रयास में लगे हुए हैं।
सवाल: चुनाव करीब आ गया है। क्या लग रहा है?
जवाब: चुनाव तो वैसे फरवरी में ड्यू है, लेकिन जनगणना होने की वजह से थोड़ा बहुत आगे पीछे भी हो सकता है।
सवाल: आप गांव में ही रहते हैं, यहीं सतवाई में?
जवाब: हां, जन्मजात गांव में ही रहता हूं। यह पहले घेर था, अब घर है।
सवाल: यह मकान आपने बनाया था या आपके पिताजी के जमाने का है?
जवाब: यह मकान मेरे फादर ने 1970 में बनाया था। चौधरी इलम सिंह जी ने। मेरी डेट ऑफ बर्थ 17 अक्टूबर 1969 है और यह मकान 1970 में बना था।

सवाल: अगले महीने आपका बर्थडे भी है?
जवाब: हां, 17 अक्टूबर को मेरा बर्थडे है।
सवाल: गांव में रहने का अपना अलग मजा है। खुला स्पेस और फ्री एनवायरमेंट।
जवाब: यहां करीब 25 एकड़ जमीन हमारे पास है, मेरे फादर की। तीन भाई हैं, जॉइंट फैमिली है हमारी।
सवाल: तीनों भाई साथ रहते हैं?
जवाब: तीनों भाई नहीं, दो रहते हैं। मैं और मेरे से छोटा भाई। सबसे छोटे भाई हरेंद्र सिंह मेरठ में रहते हैं। पहले वो भी यहीं रहते थे, लेकिन बच्चों की पढ़ाई लिखाई के समय मेरठ चले गए।
सवाल: परिवार के बारे में थोड़ा बताइए।
जवाब: मेरा बड़ा बेटा नवनीत सिंह आर्मी में मेजर है। 2009 बैच का कमीशंड अफसर है और आजकल श्रीनगर में तैनात है। अमरनाथ यात्रा के दौरान वह वहां प्रभारी भी थे। इससे पहले तीन साल मेरठ में पोस्टिंग रही है।
मेरी बड़ी बेटी की शादी 2018 में हुई। मेरे दामाद जज हैं और अभी बनारस में पोस्टेड हैं। मेरी छोटी बेटी अभी अनमैरिड है। वनस्थली से पढ़कर आई है और अब उसकी शादी की तैयारी करेंगे। पारिवारिक रूप से मैं बहुत संतुष्ट हूं।
सवाल: आपके भाइयों के बारे में?
जवाब: मेरे से छोटे दो भाई हैं। एक का नाम चंद्र प्रकाश सिंह है, वह एयरफोर्स से रिटायर हैं। दूसरे भाई ने नौकरी छोड़कर हमने जो सीबीएसई बोर्ड का स्कूल बनाया था, उसको रन करते हैं।
सवाल: यहां तो खूब पंचायत लगती होगी?
जवाब: हां, खूब। यहां लोगों का गांव आना जाना रहता है।
सवाल: गाय भी रखते हैं आप?
जवाब: गाय भी हैं, बैल भी हैं। कुछ गाय बाहर वाले घेर में भी हैं। खेती ट्रैक्टर के साथ साथ बैलों से भी होती है। पहले घोड़ी भी थी, लेकिन अब नहीं है।
सवाल: बैल कहां से लाते हैं?
जवाब: बैल हम नागौर, राजस्थान से लाते हैं। नागौरी नस्ल के हैं।
सवाल: गाय किस किस नस्ल की रखते हैं?
जवाब: गाय सब देसी नस्ल की हैं। हरियाणवी नस्ल की हैं। एक थारपारकर है और कुछ क्रॉस भी हैं।
सवाल: एक गाय कितने लीटर दूध देती है?
जवाब: दोनों करीब 10 10 किलो दूध देती हैं। अब थोड़ी उम्र ज्यादा हो गई है, इसलिए दूध थोड़ा कम हो रहा है।
सवाल: घर में गार्डनिंग भी कर रखी है?
जवाब: हां, थोड़ी बहुत। हरी मिर्च, पुदीना और दूसरी सब्जियां हैं।
सवाल: 2027 का पॉलिटिकल सिनेरियो कैसा बन रहा है?
जवाब: पॉलिटिकल बड़ा इश्यू है या स्थानीय, यह देखना होगा। लेकिन जो गठबंधन है आरएलडी और बीजेपी का, उसमें मैं समझता हूं कि सीट कहीं भी रहे, कैंडिडेट पार्टी का नहीं, एनडीए का होना चाहिए।
सवाल: मतलब आरएलडी बीजेपी का कैंडिडेट नहीं, एनडीए का कैंडिडेट?
जवाब: हां। जीत देखी जाए तो कैंडिडेट एनडीए का होना चाहिए। गठबंधन पार्टियों में है तो गठबंधन कैंडिडेट में भी होना चाहिए, जिसको दोनों पार्टियों के लोग वोट करें।
सवाल: आपके हिसाब से कैंडिडेट में सबसे जरूरी बात क्या होनी चाहिए?
जवाब: स्थानीय हो, जिसकी लोगों के बीच उपलब्धता हो, लोगों के बीच रहता हो, आसानी से मिले, उनकी बात सुने और जिसकी स्वीकार्यता दोनों पार्टियों के लोग करें।
सवाल: यानी आप कह रहे हैं कि लोकदल बीजेपी की बात करने के बजाय एनडीए की बात करनी चाहिए?
जवाब: बिल्कुल। हम गठबंधन करके भी लोकदल और बीजेपी की बात करें, यह छोटी बात है। हमें फिर एनडीए की बात करनी चाहिए।
सवाल: क्या दोनों दलों का विलय होने जा रहा है?
जवाब: यह बड़े लोगों की बात है। मैं इस पर नहीं बोलूंगा। लेकिन एक गंभीर बात मेरी आप सुन लो। कैंडिडेट पार्टी का नहीं होना चाहिए, कैंडिडेट एनडीए का होना चाहिए।
सवाल: यानी कोई कह रहा है सीट लोकदल के खाते में है और कोई कह रहा है बीजेपी के खाते में, लेकिन आप कह रहे हैं कि सीट एनडीए की है?
जवाब: बिल्कुल। सीट एनडीए की है। एनडीए का कैंडिडेट होना चाहिए।
सवाल: ये बैलों वाली गाड़ी बहुत पुरानी लग रही है?
जवाब: हां, यह बहुत पुरानी है। इसमें दो बैल चलते हैं। यह पुराने समय का पहिया है। आपने महाभारत सीरियल में भी इस तरह का पहिया देखा होगा। इसमें मुश्किल से दो लोग बैठ सकते हैं, ज्यादा से ज्यादा तीन।
सवाल: इसमें बैठकर गंगा जी भी गए हैं?
जवाब: हां, मैं इसमें बैठकर गंगा जी भी गया हूं। विधायक बनने से पहले भी और विधायक बनने के बाद भी।
सवाल: इसमें कोई सरिया, सीमेंट या आरसीसी नहीं है?
जवाब: नहीं, कुछ नहीं है। सिर्फ ईंटें आपस में जुड़ी हुई हैं। इसे डाट कहते हैं। गोल डाट। इसकी लाइफ बहुत होती है।
सवाल: यह नया कंस्ट्रक्शन लग रहा है।
जवाब: नहीं, यह करीब 30 साल पुराना है।
सवाल: आप यहां लोगों के साथ आमतौर पर बैठते हैं?
जवाब: हां। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खासतौर पर यहां जनता दर्शन का कार्यक्रम होता था। पहले मैं दो साल भोला में सिंचाई विभाग का एक गेस्ट हाउस तैयार करवाकर वहां बैठता था। फिर 2019 के चुनाव में आचार संहिता लगने के कारण सरकारी बिल्डिंग में बैठ नहीं सकते थे। तो मैंने यहां शिफ्ट कर लिया।
यहां लोगों की चाय पानी और खाने की व्यवस्था भी हो जाती थी। फिर मैंने यहीं करीब तीन वर्ष कार्यालय चलाया। आज तक भी यही है।
सवाल: आपने यहां तस्वीरें भी लगा रखी हैं।
जवाब: हां।
सवाल: यहां भारत माता, योगी आदित्यनाथ, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अटल बिहारी वाजपेयी, चौधरी चरण सिंह, स्वामी विवेकानंद, अरविंद केजरीवाल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीरें लगी हैं?
जवाब: हां। ये तस्वीरें बहुत पहले से हैं। गढ़मुक्तेश्वर से मंगाई गई थीं। मेरे फादर के समय से हैं। करीब 30 साल से कम नहीं होंगे।
सवाल: यह आपके शपथ ग्रहण के समय की तस्वीर है?
जवाब: हां।
सवाल: इसमें आप पीला कुर्ता पहनकर गए थे?
जवाब: हां जी।
सवाल: आप 2017 से 2022 वाली विधानसभा के सदस्यों की तस्वीर की बात कर रहे हैं?
जवाब: हां। 2017 से 2022 के जो सेशन था, उसके सभी मेंबर्स हैं। विधानसभा के भी और विधान परिषद के भी।
सवाल: सतवाई गांव की क्या खासियत है?
जवाब: गांव के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य यह है कि सन 1950 से यहां रोडवेज की सेवा है। वैशाली डिपो की बस यहां आती है और सतवाई आखिरी स्टॉपेज है। सन 1950 से रेगुलर रोडवेज बस सेवा है।
सवाल: गांव में स्कूल कॉलेज कितने हैं?
जवाब: तीन इंटर कॉलेज हैं। दो सीबीएसई बोर्ड के हैं। एक बोर्ड का स्कूल हमने बनाया है, जिसमें हम काम करते हैं।
सवाल: गांव की आबादी कितनी है?
जवाब: करीब 4000 आबादी है और करीब 2600 वोट हैं।
सवाल: गांव की एक और बड़ी खासियत?
जवाब: इस गांव ने दो एमएलए दिए हैं।
सवाल: आप दूसरे एमएलए हैं। आपसे पहले कौन रहे?
जवाब: मेरे से पहले रामकिशन वर्मा जी रहे, जो 1993 में किठौर से विधायक रहे। वह भी यहीं के रहने वाले थे और इंजीनियर थे।
सवाल: आप अपनी फिटनेस का राज क्या मानते हैं?
जवाब: करीब 25 साल हो गए, घर में कोई भैंस नहीं है। गाय का ही दूध, गाय का ही मक्खन और गाय का ही घी इस्तेमाल करते हैं। बाहर से कोई मोल की चीज घर में आती नहीं है।
सवाल: गायों को गर्मी न लगे, इसलिए पंखे भी लगा रखे हैं?
जवाब: हां, पंखे प्रॉपर तरीके से लगे हैं। सब्जी भी हम ऑर्गेनिक ही तैयार करवाते हैं। सर्दियों की सब्जी हो या दूसरी, बाजार से बहुत कम लेते हैं। दालें भी अपनी खेती की होती हैं।
सवाल: यह थारपारकर नस्ल की गाय है?
जवाब: हां, यह थारपारकर नस्ल की है।
सवाल: थारपारकर की खासियत क्या है?
जवाब: थारपारकर एक इलाका है जो अब पाकिस्तान में चला गया है। यह रेगिस्तानी नस्ल है। करीब 50 डिग्री तापमान में भी धूप में बैठ सकती है। इसे गर्मी ज्यादा नहीं लगती।
सवाल: तो पंखा चलने के बाद इसे नैनीताल जैसा फील हो रहा होगा?
जवाब: हां।
सवाल: आप खेती भी करते हैं?
जवाब: हां, मैंने खूब खेती की है। खेती की हर बात जानता हूं। ट्रैक्टर भी चलाया है और बैलों से भी खेती की है।
सवाल: आपने कभी गांव से शहर शिफ्ट होने के बारे में नहीं सोचा?
जवाब: नहीं जी, कभी नहीं। मैं गांव से अगर शिफ्ट करूंगा तो शहर नहीं करूंगा। जंगल में जाऊंगा। राजनीति से हटूंगा तो बाकी समय जंगल में रहूंगा।
सवाल: शहर में हजार गज का मकान और गांव में करीब चार हजार गज का खुला घर, आपको क्या ज्यादा पसंद है?
जवाब: गांव ही पसंद है। शहर में 1000 गज लेने में भी शायद सब कुछ बिक जाएगा। यहां रहने का अपना मजा है।
