Dr. Ravindra Rana / Rajesh Sharma
19 June 2025
लखनऊ/वाराणसी,
उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था एक बार फिर भारी उबाल में है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर के बिजली कर्मचारियों ने नियामक आयोग और पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मुख्य आरोप – निजी घरानों के दबाव में फैसला ले रहा है आयोग
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के लिए तैयार किए गए आरएफपी (RFP) डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग से अभिमत लेने के लिए निजी घरानों और पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा दबाव बनाया जा रहा है।
संघर्ष समिति के संयोजक इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि आयोग की भूमिका संदिग्ध होती जा रही है और आशंका जताई जा रही है कि किसी भी समय निजीकरण को लेकर सकारात्मक अभिमत दे दिया जाएगा।
नियमक आयोग के बाहर मौन प्रदर्शन, तख्तियों पर संदेश
इसी के विरोध में गुरुवार को सैकड़ों बिजली कर्मचारियों ने नियामक आयोग कार्यालय के मुख्य द्वार पर मौन प्रदर्शन किया। उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था:
“कॉरपोरेट के दबाव में निजीकरण स्वीकार्य नहीं”

ट्रांसफर घोटाला और वाराणसी में सत्याग्रह
दूसरी ओर, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में ट्रांसफर को लेकर चल रही लेन-देन की चर्चाओं ने घोटाले का रूप ले लिया है। वायरल ऑडियो में एक अधिकारी और ऊर्जा मंत्री के बीच की बातचीत सामने आई है, जिसने आंदोलन को और तीखा बना दिया है।
वाराणसी में सैकड़ों कर्मचारी मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए हैं, जब प्रबंधन ने गेट बंद करा दिया। कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह की घोषणा की है।
संघर्ष समिति का दावा — इस्तीफे तक की नौबत
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के दबाव में ही पावर कॉरपोरेशन के डायरेक्टर फंड सचिन गोयल ने इस्तीफा दे दिया। यह बताता है कि अंदरूनी प्रशासनिक घुटन कितनी गंभीर हो चुकी है।
22 जून को लखनऊ में बिजली महापंचायत
संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि 22 जून को लखनऊ में आयोजित बिजली महापंचायत में न केवल निजीकरण से किसानों और उपभोक्ताओं को होने वाले नुकसान पर चर्चा होगी, बल्कि निजीकरण के पीछे छिपे मेगा घोटाले का भी पर्दाफाश किया जाएगा।
राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन
आज के दिन ही वाराणसी, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, झांसी, नोएडा, मथुरा, बरेली, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, कानपुर, सुल्तानपुर, अनपरा समेत तीन दर्जन से अधिक जिलों में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह स्पष्ट संकेत है कि आंदोलन सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं, प्रदेशव्यापी स्वरूप ले चुका है।
