गाजियाबाद, 6 जुलाई 2025 — चिकित्सा जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले ब्रोंको पल्मोनरी वर्ल्ड कांफ्रेंस का आयोजन दिनांक 4 से 6 जुलाई तक गाजियाबाद के रैडिसन ब्लू होटल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन UAPM (United Association of Pulmonary Medicine) और PICEF Foundation के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें भारत सहित विभिन्न देशों से 1200 से अधिक छाती एवं श्वास रोग विशेषज्ञों और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स ने भाग लिया।
इस वर्ल्ड कांफ्रेंस में विश्वभर के 16 विशिष्ट अतिथि चिकित्सकों ने भी हिस्सा लिया और श्वसन तंत्र, फेफड़ों के रोग, नवाचार, तकनीकी प्रक्रियाओं एवं रोग प्रबंधन पर अपने गहन अनुभव और शोध कार्य साझा किए।
उद्घाटन सत्र में प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
कांफ्रेंस का उद्घाटन सत्र अत्यंत गरिमामय रहा, जिसमें नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अध्यक्ष डॉ॰ बी. एन. गंगाधर और नीति आयोग के सदस्य डॉ॰ विनोद पॉल मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। दोनों विशेषज्ञों ने चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी विकास और क्रिटिकल केयर में हो रहे बदलावों पर विस्तृत चर्चा की और स्वास्थ्य सेवा की दिशा में ऐसे आयोजनों को आवश्यक बताया।

12 कार्यशालाएं – व्यावहारिक अनुभव का आदान-प्रदान
कांफ्रेंस के दौरान गाजियाबाद के विभिन्न प्रमुख अस्पतालों में 12 व्यावहारिक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया जिनमें ब्रोंकोस्कोपी, थोरकोस्कोपी, मैकेनिकल वेंटिलेशन, फाइबर ऑप्टिक तकनीक, क्रिटिकल केयर नवाचार आदि प्रमुख विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य नवोदित चिकित्सकों को आधुनिकतम तकनीकों से रूबरू कराना और मौजूदा डॉक्टरों को अपने कौशल को और धार देना रहा।
डॉ॰ वीरोत्तम तोमर को मिला सम्मान

इस अवसर पर छाती व श्वास रोगों के क्षेत्र में अपेक्षाकृत नई लेकिन क्रांतिकारी तकनीक EBUS (Endobronchial Ultrasound) को भारत में स्थापित करने वाले, वरिष्ठ फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ॰ वीरोत्तम तोमर को उनके चिकित्सकीय और सामाजिक योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें मुख्य अतिथियों द्वारा शॉल और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
UAPM के अध्यक्ष डॉ॰ महेन्द्र सिंह (उदयपुर) और वरिष्ठ फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ॰ विनोद जोशी (जयपुर) ने डॉ॰ तोमर के कार्यों को याद करते हुए कहा कि “डॉ॰ तोमर न केवल एक उत्कृष्ट चिकित्सक हैं बल्कि उन्होंने चिकित्सा सेवा को समाजसेवा का माध्यम भी बनाया है। उन्हें भारत में EBUS तकनीक का पथप्रदर्शक माना जाता है।”

चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी हस्तियों की मौजूदगी
सम्मेलन में देश की चिकित्सा जगत की कई नामी हस्तियां भी उपस्थित रहीं। इनमें कानपुर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व छाती रोग विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ॰ एस. के. कटियार, डॉ॰ एस. एन. गॉड, आईएमए (IMA) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ॰ शरद अग्रवाल, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ॰ सर्वेश टंडन सहित अन्य विशेषज्ञों ने शिरकत की और कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
इस उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का सफल आयोजन गाजियाबाद और नोएडा के डॉक्टरों की एक समर्पित टीम ने किया। आयोजन के मुख्य संयोजक डॉ॰ आशीष अग्रवाल (गाजियाबाद) और डॉ॰ ज्ञानेंद्र अग्रवाल (नोएडा) थे। इन दोनों डॉक्टरों ने अपनी टीम के साथ मिलकर पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन किया। यह आयोजन न केवल चिकित्सा क्षेत्र के लिए, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार इस क्षेत्र को वैश्विक चिकित्सा विशेषज्ञों की मेज़बानी का अवसर मिला।
यह कांफ्रेंस न केवल एक शैक्षणिक एवं तकनीकी आदान-प्रदान का मंच बना, बल्कि इसने छाती और श्वास रोगों के इलाज में नवीनतम पद्धतियों को देशभर के चिकित्सकों तक पहुँचाने का काम किया। साथ ही, डॉ॰ वीरोत्तम तोमर जैसे समर्पित चिकित्सकों का सम्मान करके यह संदेश भी दिया कि चिकित्सा सेवा केवल विज्ञान नहीं, बल्कि समाजसेवा भी है।
