
· नौचंदी मेले की गरिमा बचाने और जन योजनाओं की पारदर्शिता की मांग
· विकास योजनाओं की समीक्षा और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग
· पत्रकारिता और जन सरोकारों के मुद्दों पर संवाद की पहल
· पत्रकारों का सरकार से सवाल—”नीतियों को धरातल पर कब उतारा जाएगा?”
मेरठ, 4 मई 2025 |
वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और संचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्यसभा सदस्य और भाजपा के सचेतक लक्ष्मीकांत बाजपेयी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रशासनिक जवाबदेही, जन योजनाओं की पारदर्शिता और ऐतिहासिक नौचंदी मेले की गरिमा बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार और प्रशासन की उन नीतियों पर चिंता जताई, जिनका ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो रहा है। ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से रखी गईं:
उत्तर भारत के प्रसिद्ध नौचंदी मेले को उसकी पारंपरिक गरिमा के साथ संचालित किया जाए और इसका मूल स्वरूप कायम रखा जाए।
सरकारी धन से हो रही विकास योजनाओं की जानकारी जिलों के जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनसामान्य को दी जाए, न कि सिर्फ अफसरों के माध्यम से।
जिन नीतियों और योजनाओं का ऐलान हुआ है, यदि वे किसी विभाग से संबंधित हैं, तो उन्हें कागज़ी कार्यवाही से निकालकर धरातल पर लाया जाए।
विकास योजनाओं में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नगर निगम, आवास विकास, मेला प्राधिकरण, रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, शिक्षा विभाग आदि द्वारा लागू की गई योजनाओं की जानकारी मीडिया के माध्यम से नागरिकों को दी जाए।

स्कूल वाहनों की जांच, पंजीकरण और सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर सरकारी नीति के अनुसार उन पर कार्यवाही की जाए। रजिस्ट्रार विभाग से जुड़े मामलों की हर साल एक बार जांच हो।
शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई के दौरान अवैध रूप से वसूले जा रहे अतिरिक्त शुल्क और डॉक्टर प्रमाणपत्र के नाम पर हो रही शोषणात्मक गतिविधियों की जांच हो।
वर्ष 2021 की योजनाओं का कार्य यदि पूरा हो चुका है और जो बचा है, वह सार्वजनिक किया जाए।
2031 की माया योजनाएं जो अभी लागू नहीं हुईं, लेकिन उनका प्रचार किया जा रहा है, उसे रोका जाए।
जिन योजनाओं पर पिछले वर्षों में अत्यधिक खर्च हुआ है, उनकी लेखा जांच हो। यदि भ्रष्टाचार की पुष्टि हो तो जिम्मेदारों पर कार्यवाही हो।
जिन योजनाओं के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है, उनके निर्माण कार्य जल्द शुरू किए जाएं।
स्कूलों की छुट्टियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर समुचित योजना बनाई जाए।
धार्मिक स्थलों पर जाने वाले मार्गों की मरम्मत की जाए।
सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में मीडिया कर्मियों को बुलाकर सरकार के कार्यों की जानकारी साझा की जाए।
समाज में भयमुक्त वातावरण स्थापित करने के लिए असमाजिक तत्वों को हटाने संबंधी नीति बनाई जाए।
मीडिया से जुड़े मामलों की सुनवाई जिलाधिकारी स्तर पर नियमित रूप से हो और अफसरों को समयबद्ध जवाब देने के लिए बाध्य किया जाए।
शासन की नीतियों को लेकर प्रशासन द्वारा प्रेस को समय-समय पर जानकारी दी जाए।
विकास और कानून व्यवस्था से संबंधित विषयों पर वरिष्ठ अधिकारियों और अनुभवी पत्रकारों को शामिल करते हुए संवाद स्थापित किया जाए।
नौचंदी मेला समिति में पूर्व या वरिष्ठ पत्रकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और उन्हें प्रतिनिधित्व दिया जाए।
यह ज्ञापन पत्रकारिता और सामाजिक चेतना से जुड़े मुद्दों को प्रभावी रूप से उठाने की एक कोशिश है, ताकि शासन और जनता के बीच संवाद की एक सशक्त कड़ी कायम हो।
ज्ञापन सौंपने वालों में हिंदुस्तान और अमर उजाला के पूर्व संपादक पुष्पेंद्र शर्मा, केसर खुशबू के संपादक रवि विश्नोई, मजीठिया बोर्ड के सदस्य अंकित विश्नोई, पूर्व जिला सूचना अधिकारी सुरेंद्र शर्मा, जनसत्ता से प्रदीप वत्स, PoliticalAdda.com से राजेश शर्मा और वरिष्ठ डॉ. रवीन्द्र प्रताप राणा शामिल रहे।
