मुज़फ्फरनगर के गांधी पॉलिटेक्निक संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों ने संस्थान के विभागाध्यक्ष (सिविल) एवं पूर्व कार्यवाहक प्रधानाचार्य राजीव सिंह और प्रवक्ता (सिविल) अंकित सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की है। स्टाफ सदस्यों की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए विस्तृत प्रार्थना-पत्र में फर्जी शिकायतें कराने, पद के दुरुपयोग, स्टाफ पर दबाव बनाने और संस्थान के प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करने जैसे कई आरोप लगाए गए हैं।
स्टाफ सदस्यों का आरोप है कि आईजीआरएस पोर्टल पर “आकाश शर्मा” नाम से संस्थान के कर्मचारियों के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, जबकि जांच में बताया गया कि दिए गए पते पर ऐसा कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है। प्रार्थना-पत्र में दावा किया गया है कि शिकायत में दिया गया मोबाइल नंबर मुज़फ्फरनगर के आर्यपुरी निवासी अंकित कुमार का है, जो प्रवक्ता अंकित सिंह का सहपाठी और करीबी बताया जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस माध्यम से स्टाफ को डराने और बदनाम करने की कोशिश की गई।

प्रार्थना-पत्र में यह भी कहा गया है कि 10 दिसंबर 2025 को जब राजीव सिंह अवकाश पर थे, उसी दिन संस्थान का प्रभार वरिष्ठ कर्मचारियों को देने के बजाय कनिष्ठ प्रवक्ता अंकित सिंह को सौंपा गया। कर्मचारियों का आरोप है कि इसी दौरान विभिन्न अधिकारियों को पत्र भेजकर यह दावा किया गया कि शिकायतकर्ता पर स्टाफ दबाव बना रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति इसके उलट बताई जा रही है।

स्टाफ ने आरोप लगाया है कि संस्थान में भय का वातावरण बनाया गया है और कर्मचारियों पर झूठी शिकायतें कराने तथा एक-दूसरे के खिलाफ बयान देने का दबाव डाला जाता है। प्रार्थना-पत्र में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत सेवा-फाइलों और संस्थान के अभिलेखों में छेड़छाड़ की आशंका है। आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज संस्थान के अभिलेखागार से गायब भी कर दिए गए।

महिला कर्मचारियों के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रार्थना-पत्र में कहा गया है कि महिला कर्मियों पर भी अनावश्यक दबाव बनाया जाता है और कार्यस्थल पर उनके साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं।
स्टाफ ने यह भी उल्लेख किया है कि संस्थान में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) की कटौती समय पर कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं की गई है और करीब दो महीने से वेतन भी नियमित रूप से नहीं मिला है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
प्रार्थना-पत्र के अनुसार, संस्थान के स्टाफ सदस्यों ने 27 फरवरी 2026 को प्रबंध समिति के अध्यक्ष की उपस्थिति में शुक्रताल स्थित आश्रम में स्वामी ओमानंद महाराज से मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया। इसके बाद प्रबंध समिति द्वारा राजीव सिंह से कार्यवाहक प्रधानाचार्य का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया।

कर्मचारियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि आईजीआरएस पर दर्ज फर्जी शिकायतों की जांच कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही संस्थान में प्रशासनिक अनियमितताओं, कर्मचारियों के मानसिक उत्पीड़न और अभिलेखों में संभावित छेड़छाड़ के मामलों की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
स्टाफ ने यह भी आशंका जताई है कि 10 मार्च 2026 को प्रस्तावित प्रबंध समिति की आपात बैठक को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। इसलिए कर्मचारियों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने की अपील की है।
(नोट: इस मामले में आरोपित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)
