मायरा सिंह अपनी माँ के साथ मंदिर परिसर में भक्तों संग

मेरठ की मेमोरी गुरु मायरा सिंह : 3.5 साल की आयु में किया ऐसा काम…

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मायरा की याददाश्त का कमाल देखने के लिए खबर के अंत में दिया वीडियो देखना न भूलें

मेरठ की मायरा सिंह, एक 3.5 वर्ष की बच्ची, ने अपनी अद्भुत याददाश्त से सभी को चौंका दिया। एक तरफ जहाँ बच्चे खेलकूद और मनोरंजन में व्यस्त रहते हैं, वहीं मायरा ने साबित कर दिया कि उम्र महज एक संख्या है। वह हनुमान चालीसा की चौपाईयों को याद करके सभी को हैरान कर रही हैं और जल्द ही इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में भी जगह बना सकती हैं। मायरा की ये याददाश्त न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरी दुनिया को यह दिखाती है कि छोटे बच्चों में भी अपार क्षमता होती है।

मेरठ के बुढ़ाना गेट स्थित सिद्धपीठ हनुमान मंदिर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 3.5 वर्षीय मायरा सिंह ने पूरी हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ कर उपस्थित भक्तों को अचंभित कर दिया। यह कार्यक्रम आगामी हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें भक्तों ने हनुमान चालीसा लिखने का संकल्प लिया।

मायरा की माँ, डॉ. पूजा चौधरी, ने बताया कि मायरा ने 2.5 वर्ष की उम्र से ही संस्कृत के श्लोक याद करने शुरू कर दिए थे और मंदिर जाने के लिए हमेशा उत्साहित रहती थी। अब तक मायरा को लगभग 7-8 श्लोक और पूरी हनुमान चालीसा याद हो चुकी है।

मायरा माँ डॉ पूजा चौधरी के साथ.

इतनी छोटी उम्र में मायरा की इस उपलब्धि ने सभी को प्रेरित किया है, और यह इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने योग्य है।

बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के उपाय

बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय सहायक हो सकते हैं:

  1. लर्निंग को मजेदार बनाएं: बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए अध्ययन को रोचक बनाना आवश्यक है। उन्हें लाइब्रेरी, साइंस म्यूजियम और आर्ट गैलरी जैसी जगहों पर ले जाएं, जिससे उनकी जिज्ञासा बढ़े और वे विषयों को बेहतर समझ सके
  2. नियमित व्यायाम: शारीरिक गतिविधियाँ मस्तिष्क में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाती हैं, जिससे याददाश्त में सुधार होता है। बच्चों को खेल-कूद और व्यायाम के लिए प्रेरित करे।
  3. जोर से पढ़ने की आदत डालें: बच्चों को जोर-जोर से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे वे अपनी आवाज सुन सकें और सामग्री को बेहतर तरीके से याद रख सकें।
  4. स्वस्थ आहार: बादाम, अखरोट, दूध और हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पोषक तत्वों से भरपूर आहार मस्तिष्क के विकास में सहायक होते हैं।
  5. पर्याप्त नींद: उचित नींद मस्तिष्क को आराम देती है और स्मरण शक्ति को मजबूत करती है। सुनिश्चित करें कि बच्चे को पर्याप्त नींद मिले।

इन उपायों को अपनाकर बच्चों की याददाश्त को प्रभावी ढंग से बढ़ाया जा सकता है, जिससे वे शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन में सफल हो सकते हैं।

इंसान की याददाश्त किस आयु में सबसे बेहतर होती है?

याददाश्त या स्मरण शक्ति उम्र के अनुसार बदलती रहती है और अलग-अलग प्रकार की मेमोरी (याद रखने की क्षमता) विभिन्न उम्र में चरम पर होती है।

1. बच्चों (6-12 वर्ष) में मेमोरी:

  • इस उम्र में लर्निंग और रिकॉल मेमोरी सबसे तेज होती है।
  • बच्चे नई चीजों को जल्दी सीखते और याद रखते हैं।
  • भाषा सीखने की क्षमता भी इस उम्र में सबसे अधिक होती है।

2. किशोरावस्था (12-18 वर्ष) में मेमोरी:

  • एपिसोडिक मेमोरी (यानी अनुभवों को याद रखने की क्षमता) इस दौर में तेज होती है।
  • इस उम्र में पढ़ाई और कॉन्सेप्ट समझने की क्षमता उच्च स्तर पर होती है।
  • न्यूरोप्लास्टीसिटी (मस्तिष्क की अनुकूलन क्षमता) अधिक होती है, जिससे नई चीजें सीखना आसान होता है।

3. युवा अवस्था (20-30 वर्ष) में मेमोरी का पीक:

  • वर्किंग मेमोरी और लॉन्ग-टर्म मेमोरी इस उम्र में सर्वश्रेष्ठ होती है।
  • तथ्य याद रखने, समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने की क्षमता 20 से 30 साल की उम्र में उच्चतम स्तर पर होती है।
  • वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, 25 वर्ष की उम्र में इंसान की लॉन्ग-टर्म मेमोरी सबसे तेज होती है।

4. मध्यम आयु (40-60 वर्ष) में मेमोरी में बदलाव:

  • इस उम्र में अनुभवजन्य ज्ञान (Crystallized Intelligence) बढ़ता है, यानी पहले सीखी हुई चीजें ज्यादा स्पष्ट रहती हैं।
  • इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग स्पीड धीमी होने लगती है।
  • नई चीजें सीखने में अधिक समय लग सकता है, लेकिन अनुभव और ज्ञान गहरा होता जाता है।

5. बुजुर्ग अवस्था (60+ वर्ष) में मेमोरी:

  • कुछ विशेष प्रकार की मेमोरी (जैसे शॉर्ट-टर्म मेमोरी) कमजोर हो सकती है।
  • अनुभव और पुरानी यादें बनी रहती हैं, लेकिन नई जानकारी को याद रखने में कठिनाई हो सकती है।
  • अच्छी दिनचर्या, व्यायाम, और मानसिक गतिविधियों से मेमोरी लॉस को रोका जा सकता है।

याददाश्त को लंबे समय तक तेज बनाए रखने के टिप्स:

  1. नियमित रूप से नई चीजें सीखें (नई भाषा, संगीत, गणित आदि)।
  2. योग और ध्यान करें (मस्तिष्क को सक्रिय और शांत रखने के लिए)।
  3. पौष्टिक आहार लें (ड्राई फ्रूट्स, हरी सब्जियाँ, और ओमेगा-3 फैटी एसिड)।
  4. पर्याप्त नींद लें (7-8 घंटे की अच्छी नींद स्मरण शक्ति बढ़ाती है)।
  5. सोशल इंटरैक्शन बढ़ाएं (लोगों से मिलना-जुलना दिमाग को एक्टिव रखता है)।

मायरा से लें प्रेरणा :

याददाश्त अलग-अलग उम्र में अलग-अलग प्रकार से विकसित होती है।

  • सीखने की सबसे तेज क्षमता बचपन (6-12 वर्ष) में होती है।
  • वर्किंग मेमोरी और समस्या समाधान की क्षमता 20-30 की उम्र में चरम पर होती है।
  • अनुभव और ज्ञान 40-60 की उम्र में सबसे अधिक होता है।
  • बुढ़ापे में मेमोरी को दुरुस्त रखने के लिए मानसिक कसरत जरूरी होती है।

मायरा की याददाश्त का कमाल देखने के लिए ये वीडियो देखें

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