संस्कृति का चौथा बनाम पाँचवाँ अध्याय: मोदी युग में संस्कृति का पुनर्लेखन?”
संस्कृति का पाँचवाँ अध्याय बनाम दिनकर की दृष्टि Report : डॉ. रवींद्र प्रताप राणा जब साहित्य और राजनीति के रास्ते टकराते हैं, तब संस्कृति का विमर्श दो अलग दिशाओं में आगे बढ़ता है — एक ओर दर्शन और विवेक की दिशा, और दूसरी ओर प्रचार और प्रतीकवाद की दिशा। रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति […]
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