एक वक्त में यूपी की सबसे बड़ी पार्टी रही बीएसपी की सुप्रीमो बहन मायावती के फैसलों ने पूरी पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है। सियासी हलकों की इनसाइड स्टोरी ये है कि मायावती की भतीजे आकाश आनंद से अनबन के बाद अब भाई आनंद कुमार से भी नहीं बन रही है। मायावती ने तीन दिन पहले भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाकर उनके पिता आनंद कुमार को जिम्मेदारी सौंपी थी। अब आनंद कुमार ने नेशनल कोऑर्डिनेटर पद पर काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मायावती ने उनसे जिम्मेदारी वापस ले ली है।
बुधवार सुबह मायावती ने एक्स पर दो पोस्ट किए। इसमें लिखा- आनंद कुमार ने एक पद पर काम करने की इच्छा जाहिर की। इसलिए, वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। जबकि नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद की जिम्मेदारी उनसे वापस ली जा रही है।
इसके अलावा, मायावती ने पार्टी में कई बढ़े फेरबदल का ऐलान किया है। सहारनपुर के रहने वाले रणधीर बेनीवाल को नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंप दी है। मायावती ने कहा- अब राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और रणधीर बेनीवाल, दोनों पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर के रूप में मेरे निर्देशन में काम करेंगे। इससे पहले, आकाश के ससुर और फिर उन्हें पार्टी से निकाल दिया था।

अपनी पार्टी को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला कर दिया उन्होंने सब पहले तो भतीजे आकाश आनंद को बीएसपी के नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाया बाद में सोशल मीडिया पर आकाश आनंद ने उनके इस फैसले को स्वीकार करते हुए बहुजन समाज के लिए और मूवमेंट के लिए आगे काम करते रहने का सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा। इसके बाद मायावती ने ट्विटर के जरिए जानकारी दी कि आकाश आनंद को पार्टी से भी निष्कासित किया जाता है। उन्होंने कहा कि पश्चाताप करने के बजाय आकाश आनंद ऐसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। मायावती ने आकाश आनंद को दो बार पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया और दोनों बार उन्हें हटा दिया। सवाल ये है कि आखिर मायावती के दिमाग में क्या चल रहा है। बसपा का भविष्य क्या होगा। मायावती का उत्तराधिकारी कौन होगा। देश की दलित सियासत का रुख क्या होगा।

आकाश के पिता और अपने भाई आनंद को मायावती अपने परिवार में सबसे ज्यादा मानती हैं। मायावती की सरकार के दौरान आनंद कितने ताकतवर थे ये सबको पता है। आकाश की पढाई लिखाई लंदन में हुई है। ये माना जाता है कि आकाश ही बीएसपी के भविष्य के नेता हैं। मायावती ने ही पार्टी के बड़े नेता रहे अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से आकाश की शादी दो साल पहले कराई थी। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पहले एमएलसी और बाद में राज्यसभा भेजा। आकाश आनंद जबसे अशोक सिद्धार्थ के दामाद बने तब से पार्टी के भीतर एक गुट उनसे खतरा महसूस करता आ रहा है। अशोक सिद्धार्थ के मन में भी कहीं ना कहीं यह बात आ गई कि बहन जी के उत्तराधिकारी से मेरी बेटी की शादी हो गई है और अब वह पार्टी के अंदर एक डिसीजन मेकिंग की भूमिका मेकर की भूमिका में आ सकते हैं। यहीं से अशोक और आनंद की मुश्किलें शुरू हुईं। बहनजी ने पहले अशोक सिद्धार्थ को बाहर का रास्ता दिखाया और फिर आकाश आनंद को।
कहा ये भी जा रहा है कि बीएसपी का भविष्य आकाश आनंद है आज नहीं तो कल बहन जी आकाश आनंद के हाथों में ही बागडोर देंगी लेकिन फिलहाल वह बहुत नाराज हैं।
बताया जा रहा है कि अशोक सिद्धार्थ ने अपने बेटे की शादी बीएसपी के ही नेता की बेटी से की। इस बात की अनुमति उन्होंने बहन मायावती से उन्होंने नहीं ली। बहनजी इस बार से नाराज थीं लेकिन इसके बावजूद आकाश आनंद इस शादी में शामिल हुए। बीवी के भाई की शादी में शामिल होना आनंद की मजबूरी थी। इसी से मायावती उनसे भी नाराज हो गईं।
बसपा की मुश्किल मायावती के उत्तराधिकाकरी को लेकर है। उससे भी बड़ी मुश्किल ये है कि मायावती की एप्रोच इस वक्त पार्टी के लिए ही खतरा बन रही है। मायावती एक तो जमीनी हकीकत से कट चुकी हैं दूसरा बिजनौर सहारनपुर जैसे उनके गढ़ में भी वोट बैंक दरक चुका है। बिजनौर की नगीना लोकसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी की 2024 में जमानत जब्त हो गई और भीम आर्मी चीफ, आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष में चंद्रशेखर आजाद लाखों वोट के अंतर से लोकसभा चुनाव जीत गए।
बीएसपी का सामान्य कार्यकर्ता या बीएसपी के सामान्य लोग बहनजी से नहीं मिल नहीं सकते हैं। दूसरी तरफ चंद्रशेखर जमीन पर काम करने में जुटे हैं। बसपा में कब कौन कोऑर्डिनेटर कहां का मंडल कोऑर्डिनेटर बदल जाए कहा नहीं जा सकता। स्टेट कोऑर्डिनेटर नेशनल कोऑर्डिनेटर तक पल भर में ही बदल दिए जाते हैं। हरियाणा के चुनाव में आकाश आनंद इनेलो से गठबंधन के खिलाफ थे वह नहीं चाहते थे कि इनेलो से गठबंधन हो बावजूद इसके गठबंधन हुआ। दिल्ली में भी बसपा की जमानत हर सीट पर जब्त हो गई।
आकाश आनंद की उम्र 30 साल है। वह आज तक कोई चुनाव नहीं लड़े। मायावती ने कह दिया है कि जब तक वो जिंदा हैं कोई उत्तराधिकारी नहीं।
