अवधूत मंडल आश्रम में वार्ता करते हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत।

‘एक देश, एक चुनाव’ की ओर बढ़ रहा भारत: त्रिवेंद्र सिंह रावत

Politics

हरिद्वार। देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ की व्यवस्था लागू करने को लेकर केंद्र सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करते हुए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश की जनता भी यह चाहती है कि बार-बार होने वाले चुनावों से बचा जाए और संसाधनों का सही उपयोग हो। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी विकसित भारत के विजन को साकार करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। ‘एक देश, एक चुनाव’ भी इसी विजन का एक अहम हिस्सा है, जिससे देश की प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रणाली को और मजबूत किया जा सके।

‘एक देश, एक चुनाव’ से देश को क्या लाभ होगा?

सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू होने से देश में बार-बार होने वाले चुनावों पर लगने वाला भारी खर्च कम होगा। साथ ही, बार-बार आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों में आने वाली रुकावटें भी समाप्त होंगी।

उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के लागू होने से –

  1. चुनावी खर्च में भारी कमी आएगी: प्रत्येक चुनाव में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जो यदि एक साथ चुनाव हों तो बचाए जा सकते हैं।
  2. सरकारी मशीनरी का सही इस्तेमाल होगा: बार-बार चुनाव कराने में प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षाबलों और शिक्षकों को बार-बार चुनावी ड्यूटी पर लगाया जाता है, जिससे अन्य कार्य प्रभावित होते हैं।
  3. विकास योजनाओं को गति मिलेगी: आचार संहिता लागू होने से विकास कार्य रुक जाते हैं, लेकिन एक साथ चुनाव होने से यह समस्या खत्म हो जाएगी।
  4. राजनीतिक स्थिरता आएगी: बार-बार चुनावी माहौल बने रहने से राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है, जबकि एक साथ चुनाव से सरकारें पूरे कार्यकाल तक अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।

प्रधानमंत्री मोदी की सोच और सरकार की गंभीर पहल

सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में बड़े और ऐतिहासिक सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ‘एक देश, एक चुनाव’ भी उनके उन सुधारों में से एक है, जिससे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक संगठित और प्रभावी हो सके।

उन्होंने बताया कि इस विषय पर केंद्र सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जो ‘एक देश, एक चुनाव’ की व्यवहारिकता पर अध्ययन कर रही है। इस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस दिशा में आगे की नीति तैयार करेगी।

विपक्ष की चिंताओं पर सांसद की राय

इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की चिंताओं पर बोलते हुए सांसद रावत ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ एक राष्ट्रहित का विषय है और इससे सभी को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यदि देश एक संविधान, एक कानून और एक झंडे के साथ चल सकता है, तो चुनाव भी एक साथ कराए जा सकते हैं। यह केवल एक राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने का प्रयास है।

‘एक देश, एक चुनाव’ पर जनता की राय जरूरी

सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह विषय सीधा देश की जनता से जुड़ा हुआ है। जनता चाहती है कि प्रशासन सुचारू रूप से चले और विकास बाधित न हो। इसलिए इस विषय पर समाज के हर वर्ग की राय ली जानी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और सही समय पर देश के सामने सभी चीजें स्पष्ट कर दी जाएंगी।

भविष्य में बड़ा राजनीतिक सुधार संभव

उन्होंने कहा कि अगर यह व्यवस्था लागू हो जाती है तो यह भारत के लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक और दूरगामी सुधार साबित होगी। इससे न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि शासन व्यवस्था में भी सुधार आएगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस कदम को ‘नए भारत’ की दिशा में बड़ा सुधार करार दिया।

सांसद रावत ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इस विषय पर ठोस निर्णय लेगी और ‘एक देश, एक चुनाव’ की ऐतिहासिक पहल को साकार करेगी।

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