पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री के प्रतिनिधि रहे बलराम सोलंकी के फेसबुक वॉल से साभार
वर्ष 1977-78 में जाटों के कुछ शिक्षित प्रबुद्ध लोगों द्वारा अपने समाज के युवाओं के उज्जवल भविष्य निर्माण के लिए जनकपुरी दिल्ली में जाट राजा महाराजा सूरजमल शिक्षा संस्थान स्थापित करने का संकल्प किया गया l तत्कालीन राष्ट्रपति श्री नीलम संजीव रेड्डी, गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह के हाथों संस्था की नींव रखी गई l प्रशासनिक सेवाओं के लिए कोचिंग, मेधावी ग्रामीण छात्रों को दिल्ली में छात्रावास जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की सद्भावना के साथ सजातीय सहभागिता के आधार विचार ने मूर्त रूप लेना प्रारम्भ कर दिया l अपने समाज के लोगों के लिए रोजगारपरक कुछ कोर्स भी इस संस्थान में प्रारम्भ किए गए l वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाकर ,धन जुटा संस्थान प्रगति करने लगा l
देवी लाल ,बंसी लाल, नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, बलराम जाखड, वीरेंद्र वर्मा, साहब सिंह वर्मा, भूपेंद्र हुड्डा, सोमपाल शास्त्री जैसे कद्दावर नेताओं का सक्रिय सहयोग इस संस्था को मिलता रहा l कालान्तर में मात्र जाट छात्रों के लिए निर्मित इस संस्था को गुरु तेग बहादुर विश्वविद्यालय दिल्ली के अन्तर्गत सम्बद्ध करने की विवशता के कारण सभी के अध्ययन के लिए खोल दिया गया lप्रबंध कार्यकारिणी को सीमित सीटों पर ही प्रवेश का अधिकार बचा l आजकल यहाँ विभिन्न कोर्स में उच्च स्तरीय शिक्षा दी जाती हैl विश्वविद्यालय की गुणवत्ता सूची,कैम्पस सेलेक्शन में भी सूची में उच्च स्थान प्राप्त रहता है l समिति के अंतर्गत बीकानेर, शामली जनपदों में CBSC पब्लिक स्कूल भी चल रहे हैँ l
रामनिवास मिर्धा एवं वीरेंद्र वर्मा दोनों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के पद पर जब तक कार्यरत रहे तब तक सर्वसम्मति से प्रबंध कार्यकारिणी का चयन हो जाता था , अपने प्रभाव से आपसी विवादों को वे सुलझा भी देते थे । किन्तु इनके देहावसान के बाद आपसी सहमति समाप्त होकर चुनाव होने लगे। एडमिशन में डोनेशन लिया जाने लगा l कटुता के कारण वाद विवाद न्यायालय तक जाने लगे l गत कुछ वर्षों से डोनेशन की शिकायत तो दूर हुई किन्तु फर्जी सदस्य बना कर सत्ता में बने रहने के निरंतर प्रयासों के कारण विवाद चरम पर जा पहुंचा।
अभी 2 मार्च को हुए चुनावी संघर्ष ने जाट समाज को चिंतित कर दिया l पिछले 4 वर्षों से एक पैनल के कुछ सदस्यों ने खुलेआम भाजपा के समर्थन से चुनाव लड़ने के प्रयास किए।कयी बार चुनाव की तिथियां बदलीं। अंततः 2 मार्च को निष्पक्ष चुनावसंपन्नहुआl विडंबना यह है कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश के अपने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री संजीव बालियान, प्रवेश वर्मा मंत्री दिल्ली सरकार सहित देश प्रदेश के जाट मंत्री, पूर्व मंत्री ,वर्त्तमान एवं पूर्व सांसदों- विधायकों, पदाधिकारियों की फ़ौज को चुनाव अभियान में लगाकर इस संस्थान पर क़ब्ज़ा करने का असफल प्रयास किया गया । दुर्भाग्यवश यह तथाकथित नेता आज तक संस्था के सदस्य तक नहीं हैँ lजाट समाज में इससे भारी रोष है कि किसी शिक्षण संस्था के चुनाव में किसी राजनीतिक दल द्वारा यह पहली बार देश में हुआ है l जाटों मे चिंता है कि क्या जैन, ब्राह्मण, राजपूत जैसी जातियों द्वारा संचालित संस्थाओ में भाजपा ने कभी ऐसी कोशिश की l इस चुनाव से भाजपा और उसका हस्तक्षेप कराने वाले नेता अब समाज में धिक्कारे जा रहे हैँ l
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2 मार्च को मतदान के दिन भाजपा समर्थकों द्वारा मत दान स्थल पर ट्रैक्टरौ पर युवतियों को बैठाकर जलूस निकालने, नारेबाजी, हुड़दंग पर पुलिस की चुप्पी की भी आलोचना हो रहीं हैँ l भाजपा समर्थक लोग न्यायलय जाने की भी सोच रहे हैँ l सबसे बड़ी बात यह है कि जो सरकार आन्दोलन कर रहे किसानों के दिल्ली में ट्रैक्टर प्रवेश पर पाबन्दी लगाती है वह दिल्ली के बीच जनकपुरी में ट्रैक्टर जुलूस से क्या संदेश देना चाहते हैँ वही जाने l भाजपा की जाटो को ले कर जो सोच है वह एक बार फिर उजागर हो गई l यदि उन्हीं जाट नेताओं की नीति के अनुसार भाजपा चलती रही तो पार्टी को विरोधियों की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी अपना वर्तमान नेतृत्व ही डूबा देगा।
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