जयंत चौधरी ने यूपी पुलिस को बताया तानाशाह!

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अखिलेश यादव भी यूपी पुलिस को कहते रहे हैं ठोको पुलिस

सड़क पर नमाज तो पासपोर्ट जब्त : मेरठ पुलिस के फैसले पर गरमाई सियासत, जयंत चौधरी बोले- ‘ऑरवेल स्टेट 1984’ की ओर बढ़ रही पुलिस

मेरठ पुलिस द्वारा ईद-उल-फितर की नमाज को लेकर उठाए गए सख्त कदमों पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) सुप्रीमो और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर ‘ऑर्गनाइजर’ की खबर को शेयर करते हुए लिखा, ‘पुलिस ऑरवेल स्टेट 1984 की ओर बढ़ रही है।’ जयंत के इस बयान से सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।

क्या होता है ‘ऑरवेल स्टेट 1984’?

जयंत चौधरी ने जिस ‘ऑरवेल स्टेट 1984’ का जिक्र किया है, वह अंग्रेजी लेखक जॉर्ज ऑरवेल के मशहूर उपन्यास ‘1984’ की ओर इशारा करता है। यह किताब एक ऐसे सर्वसत्तावादी (तानाशाही) शासन को दर्शाती है, जहां सरकार नागरिकों की स्वतंत्रता को कुचलकर उन पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लेती है। ऑरवेल की परिकल्पना में सरकार अपने ही नागरिकों की जासूसी करती है, विचारों पर पहरा लगाती है और असहमति की आवाज को दबा देती है। जयंत चौधरी के इस बयान को मेरठ पुलिस की सख्ती की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है।

यूपी पुलिस नहीं ठोको पुलिस: अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश पुलिस के रवैये को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव कई मौकों पर यूपी पुलिस को ‘एनकाउंटर पुलिस’ और ‘ठोको पुलिस’ कह चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि यूपी में पुलिस ‘ठोक दो’ नीति पर काम कर रही है। वहीं, भाजपा के ही नेता अब पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।

भाजपा नेता भी पुलिस पर हमलावर

मेरठ पुलिस की सख्ती का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि 26 मार्च को शामली में पूर्व केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर से भाजपा सांसद डॉ. संजीव बालियान ने भी पुलिस पर फर्जी मुकदमों में भाजपा नेताओं को जेल भेजने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस कानून-व्यवस्था लागू करने के नाम पर मनमानी कर रही है और निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।

क्या यूपी पुलिस तानाशाह बन रही है?

जयंत चौधरी से लेकर नंदकिशोर गुर्जर और संजीव बालियान तक, सभी के तीखे हमले यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। एक ओर भाजपा सरकार अपराधियों के खिलाफ कड़े रुख का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्षी दलों के साथ-साथ खुद भाजपा के ही नेता पुलिस को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यूपी पुलिस तानाशाही रवैया अपना रही है? क्या यह कानूनी कार्रवाई की आड़ में सत्ता का हथियार बन गई है? यह बहस फिलहाल गर्म हो चुकी है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीति और तेज होने की संभावना है।

अखिलेश यादव यूपी पुलिस को ‘एनकाउंटर पुलिस’ क्यों कहते हैं?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश पुलिस पर लगातार निशाना साधते रहे हैं और उन्होंने कई बार इसे ‘एनकाउंटर पुलिस’ और ठोको पुलिस करार दिया है। अखिलेश का आरोप है कि योगी आदित्यनाथ सरकार में यूपी पुलिस एनकाउंटर को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

  1. बढ़ते एनकाउंटर और विवादित मौतें: यूपी में 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पुलिस मुठभेड़ों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 10,000 से अधिक एनकाउंटर हो चुके हैं, जिनमें 1500 से अधिक अपराधी घायल हुए हैं और 180 से ज्यादा मारे गए हैं।
  2. विपक्ष का आरोप – फर्जी एनकाउंटर: अखिलेश यादव और उनकी पार्टी का आरोप है कि इनमें से कई एनकाउंटर फर्जी हैं और पुलिस ने निर्दोष लोगों को मुठभेड़ में मार गिराया है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि पुलिस जाति और धर्म के आधार पर कार्रवाई कर रही है।
  3. सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग की आपत्ति: उत्तर प्रदेश में बढ़ते एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी सवाल उठाए हैं। कई मामलों में एनएचआरसी ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है कि आखिरकार इतनी बड़ी संख्या में पुलिस मुठभेड़ क्यों हो रही हैं।
  4. विकास दुबे एनकाउंटर मामला: कानपुर का कुख्यात अपराधी विकास दुबे जब पुलिस हिरासत में था, तब उसके एनकाउंटर को लेकर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की थी। अखिलेश यादव ने इसे एक सुनियोजित हत्या करार दिया और कहा कि यह न्याय प्रणाली पर सीधा हमला है।
  5. पुलिस पर राजनीतिक दबाव का आरोप: सपा और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यूपी पुलिस सरकार के इशारों पर काम कर रही है और विरोधियों को दबाने के लिए एनकाउंटर का सहारा लिया जा रहा है।

विपक्ष ही नहीं भाजपा नेता भी पुलिस पर हमलावर

मेरठ पुलिस की सख्ती का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि 27 मार्च को शामली में पूर्व केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर से भाजपा सांसद डॉ. संजीव बालियान ने भी पुलिस पर फर्जी मुकदमों में भाजपा नेताओं को जेल भेजने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस कानून-व्यवस्था लागू करने के नाम पर मनमानी कर रही है और निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।

संजीव बालियान यूपी पुलिस को सबसे भ्रष्ट क्यों कहते हैं?

भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान कई बार उत्तर प्रदेश पुलिस को भ्रष्टाचार के लिए कठघरे में खड़ा कर चुके हैं। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उनसे वसूली करता है।

  1. फर्जी मुकदमे और राजनीतिक दुश्मनी: बालियान का आरोप है कि यूपी पुलिस भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे लाद रही है। उन्होंने हाल ही में एक भाजपा नेता की गिरफ्तारी को लेकर कहा कि पुलिस सरकार के आदेश पर मनमाने ढंग से काम कर रही है।
  2. भ्रष्टाचार के आरोप: उन्होंने पुलिस पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया और कहा कि कई मामलों में पुलिस पैसे लेकर एफआईआर दर्ज करती है या फिर मामलों को दबाने का काम करती है।
  3. भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई: उनका कहना है कि पुलिस का रवैया अपने ही पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति भेदभावपूर्ण हो गया है, जहां निर्दोष लोगों को झूठे केसों में फंसाया जा रहा है।
  4. अपराधियों से साठगांठ: बालियान ने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस कई मामलों में अपराधियों के साथ मिली हुई है और वे पैसे और राजनीतिक दबाव के आधार पर काम कर रही है।
  5. जातिगत भेदभाव: उन्होंने पुलिस पर जातिगत भेदभाव करने का भी आरोप लगाया और कहा कि कुछ खास वर्गों के खिलाफ पुलिस ज्यादा आक्रामक रुख अपनाती है।

सब्जी वालों तक से वसूली करती है पुलिस- नंदकिशोर गुर्जर

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने भी यूपी पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। नंदकिशोर ने भी यूपी पुलिस को भी सबसे भ्रष्ट बताया है।

फरवरी 2025 में, नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में सड़क किनारे बैठकर सब्जी बेची। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस रेहड़ी-पटरी वालों से अवैध वसूली कर रही है और उनके व्यवसाय में बाधा डाल रही है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, विधायक ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि गरीब सब्जी विक्रेताओं को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

कलश यात्रा विवाद

हाल ही में लोनी में राम कथा से पहले निकाली गई कलश यात्रा के दौरान, नंदकिशोर गुर्जर और पुलिस के बीच विवाद हुआ। पुलिस ने बिना अनुमति के यात्रा निकालने पर रोकने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान विधायक के कपड़े फट गए और उन्होंने पुलिस पर धार्मिक आयोजन में बाधा डालने का आरोप लगाया। ​

मार्च 2025 में, एक राजनीतिक सभा के दौरान, नंदकिशोर गुर्जर अचानक बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि अत्यधिक थकान और गर्मी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी। इस घटना के बाद, उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को स्थिर बताया और समर्थकों से चिंता न करने की अपील की।​ इन घटनाओं के माध्यम से, नंदकिशोर गुर्जर ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे वे लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।​

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