भारत के इतिहास का डिजिटल युग राष्ट्रीय अभिलेखागार

भारत के इतिहास का डिजिटल युग राष्ट्रीय अभिलेखागार ने पार किए 10 करोड़ दस्तावेज

Culture

Deepak Bhardwaj 

भारत ने इतिहास के संरक्षण की दिशा में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय अभिलेखागार ने 10 करोड़ से अधिक ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। जो कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और डिजिटल रूप में आम जनता तक पहुँचाने का एक ऐतिहासिक क्षण है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस मील के पत्थर को लेकर ट्वीट किया है और इसे देश की स्मृति को जीवित रखने की दिशा में युगांतकारी पहल बताया है। राष्ट्रीय अभिलेखागार की यह पहल न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से एक उपलब्धि है बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक आत्मा को सहेजने का एक सशक्त माध्यम भी है। सदियों से अलमारियों में बंद फाइलें जिन पर धूल जम चुकी थी अब एक क्लिक पर दुनिया भर के शोधकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो गई हैं। इन डिजीटल दस्तावेजों में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी, मौलाना अबुल कलाम आजाद, दादाभाई नौरोजी और अन्य महान नेताओं के निजी कागजात शामिल हैं। इसके अलावा आजाद हिंद फौज, मुगलकालीन फरमान जैसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अब डिजिटल संग्रह का हिस्सा हैं।

 यह पहल भारत के इतिहास को न केवल संरक्षित करने का कार्य कर रही हैए बल्कि यह आम जनता को उनके अतीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बन रही है। यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध डिजिटल विरासत छोड़ने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। निस्संदेह  यह उपलब्धि भारत को सांस्कृतिक संरक्षण और डिजिटलीकरण की दिशा में वैश्विक मंच पर एक प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित करती है।

अभिलेख पटल वेबसाइट (https://www.abhilekh-patal.in/) पर जाकर आप इतिहास के पन्नों को आसानी से देख सकेंगे। इससे आने वाली पीढ़ियों को काफी लाभ मिलेगा। जिससे पीढ़ियों को आगे आने वाले समय में कोई कठिनाई नहीं होगी। आप आसानी से सिर्फ एक क्लिक के माध्यम से इतिहास के पन्नों को सही जानकारी के साथ पलट पाएंगे। यह एक इतिहास और संस्कृति को जानने के लिए नई क्रांति की शुरुआत है।

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *