
मेरठ। मेरठ में शहर काजी के पद को लेकर विवाद का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। 9 मार्च को शहर काजी प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के निधन के बाद, उनके बेटे डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी और कारी शफीकुर्रहमान कासमी के बीच शहर काजी के पद को लेकर तकरार शुरू हो गई। इस विवाद ने मेरठ शहर में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है, और लगातार पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। 21 मार्च को जुमे की नमाज के वक्त कारी शफीकुर्ररहमान के विरोध से हालात गंभीर हो गए हैं। अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर ईद की नमाज कौन पढ़ाएगा।
विवाद की शुरुआत:
9 मार्च को शहर काजी प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के निधन के बाद, उनके बेटे डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी को शहर काजी के पद के लिए दावा पेश किया गया।
वहीं, दूसरी ओर कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने भी इस पद के लिए अपनी दावेदारी की। इसके परिणामस्वरूप मेरठ में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे शहर में तनाव बढ़ गया।

प्रशासन की कार्रवाई:
इसके साथ ही, प्रशासन ने यह चेतावनी दी कि अगर किसी भी प्रकार का कानून उल्लंघन हुआ, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जुमे की नमाज का विवाद:
17 मार्च को जुमे की नमाज के दौरान विवाद ने एक नया मोड़ लिया। डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी को एक पक्ष ने नमाज का इमाम नियुक्त किया, लेकिन दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया। इस दौरान, शाही जामा मस्जिद में नमाज कारी सलमान कासमी ने अदा की, और डॉ. जैनुस सालिकीन ने तकरीर की और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की। इस दिन की घटनाओं ने इस विवाद को और उग्र कर दिया और एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई।
21 मार्च की जुमे की नमाज:
21 मार्च को जुमे की नमाज के दौरान भी शहर काजी के पद को लेकर विवाद जारी रहा।लोगों के विरोध के चलते शाही जामा मस्जिद में नमाज के दौरान कारी शफीकुर्रहमान कासमी के समर्थक नमाज में शामिल नहीं हुए। इसके बावजूद, कारी सलमान कासमी ने नमाज पढ़ाई और फिर डॉ. जैनुस सालिकीन ने एक बार फिर धर्मनिरपेक्षता और शांति की अपील की।
पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया था, और नमाज के बाद किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए थे।
ईद की नमाज को लेकर असमंजस:
शहर काजी के पद को लेकर विवाद अब ईद की नमाज पर भी असर डाल रहा है। शाही ईदगाह कमेटी की बैठक बेनतीजा रही, और अभी तक इस पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा सका कि ईद की नमाज का नेतृत्व कौन करेगा। यह असमंजस स्थिति अब भी बरकरार है, और इस पर आगे की स्थिति में निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है।
समाज की प्रतिक्रिया:
विवाद के बावजूद, मेरठ में कई स्थानों से भाईचारे और शांति की अपीलें भी सामने आई हैं। रसूलपुर धौलड़ी में एक युवक, गौरव बंसल ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को जुमे की नमाज के लिए मस्जिद तक पहुंचाने में मदद की। इस कार्य को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से सराहा गया और यह भाईचारे की भावना को दर्शाता है।
स्थानीय आलिमों और धार्मिक नेताओं ने भी इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए प्रयास तेज किए हैं। शाही जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान मरहूम शहर काजी के लिए विशेष दुआ का आयोजन किया गया, जिससे माहौल शांतिपूर्ण बनाने की कोशिश की गई।
प्रशासन की ओर से संदेश:
पुलिस और प्रशासन ने शांति बनाए रखने की लगातार अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मेरठ शहर में धार्मिक सौहार्द्र और शांति की स्थिति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
Politicaladda.com की राय
मेरठ में शहर काजी के पद को लेकर उत्पन्न विवाद ने धार्मिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में हलचल मचा दी है। पुलिस और प्रशासन की लगातार कोशिशों के बावजूद विवाद का समाधान अब तक नहीं निकल सका है। आने वाले समय में, खासकर ईद की नमाज के निकट, सभी की नजरें इस पर होंगी कि आखिरकार इस विवाद का हल किस प्रकार निकलता है। माना जा रहा है कि अब ये विवाद दारुल उलूम देवबंद तक जाएगा। वहां के मोहतमिम की राय भी बेहद अहम होगी। जानकारी के अनुसार ये तो लगभग तय है कि डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी ईद की नमाज नहीं पढ़ाएंगे क्योंकि उनके पास मौलवी की डिग्री नहीं है। ऐसे में कारी शफीकुर्ररहमान को ईद की नमाज पढ़ाने का मौका दिए जाने से विवाद और तूल पकड़ेगा। इसका हल दारुल उलूम देवबंद से ही हो सकता है। हो सकता है कि ईदगाह और जामा मसजिद की इंतजामिया कमेटी इस मामले में देवबंद से मोहतमिम की राय लें। ऐसे में मोहतमिम के पास एक विकल्प है कि वह किसी अन्य शख्स को ईद की नमाज पढ़ाने की जिम्मेदारी दे दें।
अंत में, मेरठ शहर के हर नागरिक की इच्छा यही है कि शहर में शांति, सौहार्द्र और भाईचारे का माहौल बना रहे ताकि इस विवाद का समाधान बिना किसी और तनाव के निकाला जा सके।
