कारी शफीकुर्ररहमान मेरठ

डा सलेकिन को शहर काजी बनाने के विरोध में उतरे कारी शफीकुर्ररहमान

वेस्ट यूपी

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मेरठ। मेरठ में डॉ. सलेकिन सिद्दीकी को नया शहर काज़ी बनाए जाने के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया है। शहर के वरिष्ठ धार्मिक नेता कारी शफीकुर्रहमान इस फैसले का विरोध करते हुए इसे परंपराओं के खिलाफ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नियुक्ति समुदाय की सर्वसम्मति के बिना की गई है और इससे शहर के धार्मिक ताने-बाने पर असर पड़ सकता है।

डा. सलेकिन सिद्दीकी बाएं बंद गले के सूट में। साथ में पत्रकार वाहिद अली ।

कारी शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा, “शहर काज़ी का चयन हमेशा से समुदाय की आम सहमति से होता आया है। इस बार यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही, जिससे समुदाय में असंतोष है।” उन्होंने प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार लोगों से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

इसके साथ ही उन्होंने सलेकिन सिद्दीकी की उम्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “महज 22 साल का लड़का शहर काज़ी कैसे बन सकता है? यह पद अनुभव और ज्ञान की मांग करता है। इतने कम उम्र के व्यक्ति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना समझ से परे है।”

इस विवाद के बीच, शहर के अन्य धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने सभी पक्षों से संयम बरतने और आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि सामूहिक सहमति से ही समुदाय में एकता और भाईचारा बना रह सकता है।

गौरतलब है कि 10 मार्च 2025 को मेरठ शहर में धार्मिक नेतृत्व को लेकर बड़ा बदलाव हुआ। ऐलान किया गयाकि डॉ सलेकिन सिद्दीकी मेरठ के नए शहर काज़ी होंगे। वे प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और पूर्व शहर काज़ी प्रोफेसर जैनुस्साजिद्दीन के बेटे हैं।

मेरठ शहर काजी प्रो. जैनुस्साजेद़दीन के जनाजे में उमड़ा सैलाब।

ये घोषणा 10 मार्च को ही शहर काजी प्रोफेसर जैनुस्साजिद्दीन के इंतकाल के बाद की गई थी। मेरठ शहर काजी प्रो. जैनुस्साजेद़दीन सिद्दीकी धार्मिक और शैक्षिक जगत की एक अहम शख्सियत थे। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में प्रोफेसर भी रहे थे और इस्लामी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। शहर काजी के तौर पर उन्होंने मेरठ में मुस्लिम समाज के धार्मिक मामलों का नेतृत्व किया और समाज को दिशा-निर्देश दिए।

2012 में तत्कालीन प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया प्रतिभा पाटिल ने शहर काजी प्रो. जैनुस्साजेद़दीन सिद्दीकी को पुरस्कार से नवाजा था।

गौरतलब है कि उनके इंतकाल से महज एक दिन पहले, उन्होंने होली के दिन जुमे की नमाज के वक्त में बदलाव का ऐलान किया था, ताकि समाज में सौहार्द बना रहे। उनके इस कदम की सराहना की जा रही थी, लेकिन अब उनके अचानक चले जाने से पूरा शहर स्तब्ध है।

प्रोफेसर सलेकिन सिद्दीकी इन दिनों अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में अध्यापन कर रहे हैं। काजी शफीकुर्रहमान ने उनकी नियुक्त पर बड़े सवाल खड़े करते हुए वीडियो जारी किया। इसमें कारी शफीक कह रहे हैं कि 22 साल की आयु में किसी को शहर काजी जैसी बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।

शहर काजी कौन होते हैं?

शहर काजी मुस्लिम समाज में एक महत्वपूर्ण धार्मिक पद होता है। यह कोई सरकारी पद नहीं, बल्कि समुदाय द्वारा मनोनीत किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित धार्मिक नेतृत्व का स्थान है।

शहर काजी की जिम्मेदारियां:

  • इस्लामी कानून (शरीयत) के अनुसार धार्मिक मार्गदर्शन देना
  • निकाह (विवाह) कराना और प्रमाण पत्र जारी करना
  • जुमे की नमाज, ईद और अन्य इस्लामी त्योहारों के लिए दिशा-निर्देश तय करना
  • मुस्लिम समुदाय के विवादों को धार्मिक दृष्टिकोण से सुलझाने में मदद करना

शहर काजी बनने के लिए व्यक्ति को गहरा धार्मिक ज्ञान, मुफ्ती या आलिम जैसी डिग्रियां और इस्लामी न्यायशास्त्र (फिक्ह) की जानकारी होनी जरूरी होती है। भारतीय समाज में यह परंपरा मुगलकाल से चली आ रही है, और आज भी मुस्लिम समुदाय में इसे विशेष सम्मान प्राप्त है।