— एक किसानपुत्र जो बना देश की कृषि पत्रकारिता का प्रमुख चेहरा
शामली जिले के एक छोटे से गांव भैंसवाल से निकलकर देश की राजधानी में कृषि और ग्रामीण पत्रकारिता का सबसे भरोसेमंद और बड़ा चेहरा बनने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन हरवीर सिंह ने इस मुश्किल राह को अपने संघर्ष, मेहनत और साफ दृष्टिकोण से न सिर्फ पार किया, बल्कि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में कृषि और ग्रामीण भारत की आवाज़ बनकर उभरे।
राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) ने किया सम्मानित
देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों की संस्था राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) ने अपने स्थापना दिवस (4-5 जून 2025) पर आयोजित भव्य समारोह में रूरल वॉइस के प्रधान संपादक हरवीर सिंह को सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें कृषि पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला। कार्यक्रम में पद्म पुरस्कार विजेता, किसान, वैज्ञानिक, कृषि उद्यमी और मीडिया के अन्य दिग्गज शामिल हुए।
NAAS के अध्यक्ष डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा —
“हरवीर सिंह और प्रभुदत्त मिश्रा जैसे पत्रकारों के प्रयासों के कारण आज कृषि मुद्दे मुख्यधारा की मीडिया में गंभीरता से सुने और समझे जाते हैं।”
एक साधारण किसान पिता का बेटा, जिसकी नजर में कलम ही हल थी

हरवीर सिंह के पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त एक अनुशासित और ईमानदार किसान थे। पांच बहन-भाईयों वाले इस परिवार में, गांव की मिट्टी, खेत की खुशबू और देशभक्ति की भावना हरवीर के व्यक्तित्व की बुनियाद बनी। उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पोस्ट-ग्रेजुएशन, भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में डिप्लोमा, और लखनऊ से मार्केटिंग मैनेजमेंट में डिग्री ली।
गांव से निकले इस युवा ने राजधानी दिल्ली में अमर उजाला कारोबार के ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्य किया, जहाँ उनकी पहचान आर्थिक मामलों के गहरे जानकार और एग्री-बिजनेस विशेषज्ञ के रूप में बनी।
प्रमुख मीडिया संस्थानों में नेतृत्व की भूमिका
हरवीर सिंह ने पत्रकारिता के तीनों माध्यम—प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक—में प्रभावशाली कार्य किया।
- आउटलुक हिंदी के संपादक
- moneybhaskar.com के संस्थापक संपादक (जहाँ इसे भारत का सबसे बड़ा डिजिटल बिजनेस पोर्टल बनाया)
- दैनिक हिन्दुस्तान, अमर उजाला, बिज़नेस भास्कर में संपादकीय नेतृत्व
- वर्तमान में रूरल वॉइस के प्रधान संपादक (Editor-in-Chief)
सिर्फ रिपोर्टिंग नहीं, बल्कि बदलाव की पत्रकारिता
हरवीर सिंह की पत्रकारिता न केवल रिपोर्टिंग तक सीमित रही, बल्कि उन्होंने नीति-निर्माताओं और ग्रामीण भारत के बीच पुल का काम किया। कृषि और ग्रामीण मुद्दों पर राज्यसभा टीवी, लोकसभा टीवी, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर वे लगातार चर्चा करते रहे हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर शोधपत्र लिखा जिसे Economic & Political Weekly में स्थान मिला।
सम्मान और पुरस्कारों की लंबी सूची
- FAO (संयुक्त राष्ट्र) द्वारा वर्ल्ड फूड डे अवॉर्ड – 2001
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा चौधरी चरण सिंह अवॉर्ड – 2002
- PHD मीडिया एक्सीलेंस अवॉर्ड, बनारस बीड्स आर्थिक पत्रकारिता पुरस्कार, सहित कई सम्मान
भविष्य की दिशा — गांव, किसान और राष्ट्रहित की पत्रकारिता
हरवीर सिंह का मानना है कि भारत का भविष्य गांव और किसान से जुड़ा है। वो कहते हैं,
“अगर नीति में किसान की आवाज़ नहीं है, तो वह विकास अधूरा है।”
कॉमनवेल्थ जर्नलिस्ट एसोसिएशन (CJA India) से जुड़े हरवीर पत्रकारों के प्रशिक्षण और उनके व्यावसायिक विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
गांव, किसान और नीतियों की गूंज बनकर उभरे शामली के लाल
देश के वरिष्ठतम ग्रामीण पत्रकारों में शुमार हरवीर सिंह न केवल कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गहरी समझ रखने वाले पत्रकार हैं, बल्कि जननीति और सामाजिक विकास के रणनीतिक विश्लेषक के रूप में भी उनकी सशक्त पहचान है।
30 वर्षों से अधिक के अपने मीडिया करियर में उन्होंने संसद से लेकर गांव की चौपाल तक, और नीतियों से लेकर जमीन की सच्चाई तक को रिपोर्ट किया और समझाया है।
ग्रामीण भारत की आवाज़ बने हरवीर सिंह

हरवीर सिंह की मूल विशेषज्ञता भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण बाजार पर केंद्रित रही है। प्रिंट, डिजिटल और टेलीविज़न — तीनों माध्यमों में उन्होंने देश की कई बड़ी संस्थाओं में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। उनकी कलम और विश्लेषण में गांव, किसान, खेती, मंडी और सरकार की नीतियों का ऐसा संतुलन है, जो किसी भी आम पाठक से लेकर नीति-निर्माता तक को सोचने पर मजबूर करता है।
संयुक्त राष्ट्र से लेकर संसद टीवी तक उपस्थिति
हरवीर सिंह ने नवंबर 2020 से फरवरी 2021 तक संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (FAO) में सलाहकार के तौर पर कार्य किया। इसके अलावा वे आकाशवाणी, दूरदर्शन, राज्यसभा टीवी, लोकसभा टीवी और अन्य चैनलों पर कृषि, जलवायु और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर नियमित विश्लेषक और वक्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं।
सम्मान और पुरस्कार
- वर्ल्ड फूड डे अवॉर्ड (FAO) — 2001
- चौधरी चरण सिंह पुरस्कार (ICAR, कृषि मंत्रालय) — 2002
- बनारस बीड्स आर्थिक पत्रकारिता पुरस्कार
- PHD मीडिया एक्सीलेंस अवॉर्ड
- और अन्य कई सम्मान जिन्होंने उनकी मेहनत को सराहा है।
रिसर्च और शिक्षा
- शोधपत्र: उत्तर प्रदेश की चीनी उद्योग पर किया गया उनका रिसर्च Economic and Political Weekly में प्रकाशित हुआ।
- शिक्षा:
- एम.ए. (अर्थशास्त्र) — मेरठ विश्वविद्यालय
- पीजी डिप्लोमा (पत्रकारिता) — भारतीय विद्या भवन
- डिप्लोमा (मार्केटिंग मैनेजमेंट) — एलबीएसआईएमडीएस, लखनऊ
प्रशिक्षक, संरक्षक और नेतृत्वकर्ता
हरवीर सिंह ने जहां बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों का नेतृत्व किया, वहीं युवा पत्रकारों को प्रशिक्षित करने और मीडिया के व्यावसायिक विकास में भी उन्होंने गहरा योगदान दिया। वे कॉमनवेल्थ जर्नलिस्ट एसोसिएशन (CJA India) के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं और आज भी मीडिया प्रशिक्षण और शोध कार्यों से जुड़े हैं।
PoliticalAdda.com की ओर से सलाम उस आवाज़ को
जो किसान की पीड़ा को देश के नीति निर्माताओं तक पहुंचाती है।
जो ग्रामीण भारत को सिर्फ एक “वोट बैंक” नहीं, बल्कि “विकास का आधार” मानती है।
हरवीर सिंह आज एक नाम नहीं, एक प्रतिबद्ध पत्रकारिता की मिसाल हैं।
