मोदी कॉन्टिनेंटल टायर्स मेरठ में 274 कर्मचारियों की छंटनी के खिलाफ जनाक्रोश, सरधना विधायक अतुल प्रधान उतरे सड़कों पर

Meerut Adda

मेरठ, 26 जून।
मोदी कॉन्टिनेंटल टायर्स इंडिया प्रा० लि०, मेरठ के 274 स्थाई ऑपरेटरों की छंटनी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को कर्मचारियों और उनके परिजनों ने एक विशाल मार्च निकाला जिसमें सरधना विधायक अतुल प्रधान भी शामिल हुए। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल 274 लोगों की नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि 274 परिवारों के भविष्य का सवाल है।

विधायक अतुल प्रधान ने मार्च में शामिल होकर न केवल कर्मचारियों को नैतिक समर्थन दिया, बल्कि सरकार और प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील भी की। उन्होंने कहा –
“इन कर्मचारियों ने वर्षों से मेहनत करके कंपनी को खड़ा किया है। एक झटके में इनकी रोज़ी-रोटी छीन लेना न केवल अमानवीय है बल्कि सामाजिक रूप से अन्यायपूर्ण भी है।”

पहले भी उठाई जा चुकी है आवाज़
इससे पहले भी इस छंटनी के खिलाफ कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया था। यूनियन के नेताओं का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के स्थायी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। श्रम कार्यालय में भी कई बार सुनवाई की प्रक्रिया हुई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका।

परिजनों का आक्रोश, भविष्य की चिंता
बुधवार के मार्च में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की पत्नियां, बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता भी शामिल हुए। एक महिला ने आंसू भरी आंखों से कहा –
“हमारे बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च सब कुछ इसी नौकरी पर निर्भर था। अब हम कहाँ जाएँ?”

विधायक ने कर्मचारियों की लड़ाई को बताया जायज़
अतुल प्रधान ने साफ किया कि यह लड़ाई केवल एक कारखाने की नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों की है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और श्रमिकों के हक को सुरक्षित करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

मोदी कॉन्टिनेंटल टायर्स में हुए इस बड़े पैमाने पर छंटनी के खिलाफ अब सियासी समर्थन भी जुड़ने लगा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कंपनी को श्रम कानूनों और मानवीय मूल्यों का पालन करना चाहिए था? और क्या सरकार अब चुप रह सकती है जब सैकड़ों परिवारों की ज़िंदगी अधर में लटक चुकी है?

यह कोई साधारण छंटनी नहीं है, यह श्रमिक गरिमा और सामाजिक ज़िम्मेदारी की अग्नि-परीक्षा है।

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