मेरठ में NH-58 पर पॉश सोसाइटी Ansal Courtyard में 8 घंटे तक जल संकट

Meerut Adda

टैंकर से बुझाई प्यास, RWA अध्यक्ष ने नगरायुक्त की सराहना

मेरठ!
शहर की पॉश सोसाइटीज में शामिल Ansal Courtyard Society, जो NH-58, मोदीपुरम बाईपास पर स्थित है, शनिवार 6 July को दिनभर जल संकट से जूझती रही। करीब 400 परिवारों की इस सोसाइटी में सबमर्सिबल मोटर अचानक खराब हो गई, जिसके चलते पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि लोग पानी की एक-एक बूंद को तरसने लगे।

सोसाइटी के मेंटेनेंस विभाग ने दूसरी मोटर से सप्लाई चालू करनी चाही, लेकिन वह भी खराब पाई गई। करीब 8 घंटे तक पूरा परिसर जलविहीन रहा। जब हालात बेकाबू होने लगे तो RWA अध्यक्ष अजीत सिंह  ने नगरायुक्त IAS सौरभ गंगवार  से संपर्क किया। नगर निगम की ओर से दो टैंकर तुरंत भेजे गए। वहीं दो टैंकर सोसाइटी प्रशासन ने निजी स्तर पर मंगवाए।

इस दौरान कई परिवारों ने अपने स्तर पर निजी एजेंसियों से पैसे खर्च कर पानी मंगवाया। एक तरफ जहां नगर निगम की तत्परता की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी तरफ यह गंभीर सवाल भी उठ रहा है कि मेरठ जैसे शहर में नागरिकों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।

RWA अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा,

“जल संकट जैसी स्थिति में नगरायुक्त श्री सौरभ गंगवार ने तुरंत सहयोग किया, इसके लिए हम आभारी हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हमें पानी के लिए हर बार अफसरों को फोन लगाना पड़ेगा?”

बड़ा सवाल – कब तक खरीदकर पिएंगे पानी?

मेरठ की रिहायशी कॉलोनियों में अक्सर सबमर्सिबल फेल होने या बिजली गुल होने पर पानी की सप्लाई बाधित हो जाती है। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि अब शहर के विकसित क्षेत्रों में भी पानी पैसे से खरीदना मजबूरी बनता जा रहा है।

  • क्या जल निगम और नगर निगम के पास ऐसी आपातकालीन व्यवस्था नहीं है जो खुद सक्रिय हो?
  • क्या हर बार RWA को उच्च अधिकारियों से व्यक्तिगत संपर्क करना पड़ेगा?
  • क्या शहर की योजनाओं में पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की कोई गारंटी नहीं है?

जरूरत है स्थायी समाधान की

Ansal Courtyard में आई परेशानी सिर्फ एक सोसाइटी की नहीं, बल्कि शहर की उस बड़ी विफलता का प्रतीक है जहां बुनियादी सुविधाएं भी भरोसेमंद नहीं रहीं। इस घटना ने साफ कर दिया कि अब पानी जैसी मूलभूत ज़रूरतों के लिए भी ‘पैसे या पहुंच’ चाहिए।

यह खबर सिर्फ एक जल संकट नहीं, बल्कि हमारी नगर योजनाओं की पोल खोलती है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए हर कॉलोनी में जल आपूर्ति की वैकल्पिक और सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

 समाधान क्या है? – नई कॉलोनियों को नगर निगम अपनाए

मेरठ में जल संकट की घटनाएं सिर्फ तकनीकी खामियों का नतीजा नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा  और ढांचागत कमजोरी  का भी परिणाम हैं। शहर में दर्जनों ऐसी नई कॉलोनियां और हाउसिंग सोसायटीज़ हैं जिन्हें अभी तक नगर निगम ने आधिकारिक रूप से अधिगृहित (हैंडओवर) नहीं किया है।

 जिन कॉलोनियों को निगम ने नहीं अपनाया, वहाँ:

  • नगर निगम की पाइपलाइन नहीं होती
  • कूड़ा निस्तारण की नियमित व्यवस्था नहीं होती
  • जल आपूर्ति, सीवर, स्ट्रीट लाइट और सफाई की ज़िम्मेदारी बिल्डर या RWA पर टाल दी जाती है
  • नागरिकों को निजी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता है
  • क्या होना चाहिए?
  1. नगर निगम को एक टाइमलाइन बनाकर सभी नई कॉलोनियों को अधिग्रहण करना चाहिए
  2. बिल्डर द्वारा कॉलोनी के इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता की जांच कर उसे नगर निगम को हैंडओवर किया जाए
  3. निगम और विकास प्राधिकरण के बीच समन्वय स्थापित कर पानी, सीवर, सड़क, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाएं सुनिश्चत की जाएं
  4. RWA को साथ लेकर जन संवाद आधारित निगरानी तंत्र  बनाया जाए

क्यों ज़रूरी है ये कदम?

क्योंकि जब तक ये कॉलोनियां निगम के दायरे में नहीं आएंगी, तब तक:

  • नागरिक टैक्स देकर भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहेंगे
  • हर छोटी आपदा, एक बड़ी समस्या बनकर सामने आएगी
  • और मेरठ “स्मार्ट सिटी” के बजाय “संवेदनहीन शहर” की छवि पा जाएगा
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