








चार प्रमुख जिलों में खेमेबंदी चरम पर, 16 मार्च को हो सकता है बड़ा फैसला
Rajesh Sharma / Dr Ravindra Rana उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठन चुनाव करीब एक दशक बाद हो रहे हैं। इससे पहले जिला और महानगर अध्यक्षों की नियुक्ति मनोनयन के जरिए होती थी, लेकिन 2015 के बाद यह पहला मौका है जब संगठन चुनाव हो रहे हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मंडल अध्यक्षों के चुनाव में उभरती गुटबाजी के कारण 15% मंडल अध्यक्षों का चुनाव अधर में लटक गया। अब यह नियुक्तियां प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद ही होंगी।
यही स्थिति अब 25 जिलों के जिला और महानगर अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर बनी हुई है। भाजपा के दिग्गज नेताओं के बीच खेमेबंदी के कारण इन जिलों में सहमति नहीं बन पा रही। कहीं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील बंसल की भूमिका अहम है, तो कहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
पश्चिमी यूपी के चार प्रमुख जिलों की स्थिति:
मेरठ, सहारनपुर, शामली और हापुड़ जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिला अध्यक्षों का चयन अटका हुआ है। इन जिलों में कई बड़े नेता अपने-अपने समर्थकों को पद दिलाने के लिए प्रयासरत हैं, जिससे यह मामला और उलझता जा रहा है।
सहारनपुर में बसपा-आसपा से बढ़ी भाजपा की मुश्किलें
सहारनपुर में बसपा और आजाद समाज पार्टी (आसपा) के चंद्रशेखर आजाद की मजबूत पकड़ के चलते भाजपा के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। बसपा ने रणधीर बेनीवाल को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया है, जिससे दलित राजनीति का समीकरण बदल गया है।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां दलित चेहरे को जिला अध्यक्ष बनाना चाहते हैं, जिससे बसपा और आसपा के प्रभाव को कम किया जा सके।
- डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य मौजूदा जिला अध्यक्ष महेंद्र सैनी का समर्थन कर रहे हैं।
- संगठन मंत्री का समर्थन विजेंद्र कश्यप को मिल रहा है।
- दलित नेता पवन सवाई को मुख्यमंत्री का करीबी माना जा रहा है।
इन्हीं अंतर्विरोधों के चलते सहारनपुर का जिला अध्यक्ष चयन होल्ड पर चला गया है।
शामली में कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर
शामली में मौजूदा जिला अध्यक्ष तेजेंद्र निर्वाण को प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का समर्थन हासिल है, जबकि अन्य प्रमुख दावेदारों के पीछे अलग-अलग बड़े नेताओं का समर्थन है।
- रमेश गौड़ कश्यप और पुनीत द्विवेदी को मोहित बेनीवाल का समर्थन है।
- पवन तरार को मृगांका सिंह का करीबी बताया जा रहा है।
- राजेंद्र मादलपुर को पूर्व मंत्री सुरेश राणा का समर्थन है।
- पंकज राणा, जो वर्तमान में जिला उपाध्यक्ष हैं, भी दावेदारी में हैं।
बड़े नेताओं के बीच आपसी टकराव के कारण शामली का मामला फंस गया है।
मेरठ में संघ और संगठन आमने-सामने
मेरठ में वर्तमान जिला अध्यक्ष ठाकुर शिव कुमार राणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता शिव प्रकाश सिंह के करीबी हैं, जिससे संघ का समर्थन उन्हें मिला हुआ है।
- अजीत चौधरी संगठन के मजबूत उम्मीदवार हैं।
- ओबीसी मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष हरबीर पाल को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का समर्थन प्राप्त है।
संघ और संगठन के बीच खींचतान के कारण मेरठ का मामला पेचीदा हो गया है और भाजपा ने इसे होल्ड पर डाल दिया है।
हापुड़ में भी अटकी नियुक्ति
हापुड़ में तीन मजबूत दावेदार हैं, जिनके पीछे भाजपा के अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं का समर्थन है।
- मौजूदा जिला अध्यक्ष नरेंद्र तोमर को क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया का समर्थन है।
- प्रफुल्ल सारस्वत दिल्ली के एक बड़े नेता के करीबी माने जा रहे हैं।
- पुनीत गोयल एक केंद्रीय मंत्री के नजदीकी हैं।
तीनों नेताओं के बीच संतुलन न बनने के कारण हापुड़ का मामला भी होल्ड पर डाल दिया गया है।
16 मार्च को हो सकता है बड़ा फैसला
सूत्रों के अनुसार, भाजपा हाईकमान 16 मार्च की शाम तक प्रदेश के इन 25 जिलों में जिला अध्यक्षों की घोषणा कर सकता है। इसके लिए अलग-अलग जिलों में प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी बनाया गया है, जो लगातार इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।
शनिवार की शाम को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और चुनाव प्रभारी पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडे के बीच बैठक हुई, जिसमें इस मुद्दे पर विचार किया गया। इस बैठक की जानकारी दिल्ली हाईकमान को भेजी गई है।
संभावना जताई जा रही है कि पहले विवाद रहित जिलों के अध्यक्षों की घोषणा होगी, जिसके बाद रात में आपसी सहमति बनाकर इन विवादित 25 जिलों में भी नियुक्तियां की जा सकती हैं।
भाजपा के लिए यह चुनाव न केवल संगठन के लिहाज से बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पार्टी के बड़े नेता किसी भी तरह की फूट से बचने और सभी गुटों को साधने की रणनीति बना रहे हैं।
