बागपत जनपद स्थित आर्य महाविद्यालय किरठल अपने 101वें वार्षिकोत्सव की भव्य तैयारियों में जुटा हुआ है। यह ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान सन् 1920 ई. (दयानन्दाब्द 96) में स्थापित हुआ था और विगत वर्षों की परंपरा को जारी रखते हुए इस वर्ष भी 22-24 मार्च 2025 तक तीन दिवसीय भव्य आयोजन होने जा रहा है।
भव्य समारोह और विद्वानों का संगम
इस आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त अध्यात्मदर्शी, योगी, सामाजिक अग्रदूत, राजनीतिक युगदृष्टा, शिक्षाविद और प्रबुद्धजन पधारने वाले हैं।
प्रतिदिन यज्ञ, प्रवचन, व्याख्यान और भजनोपदेश के साथ-साथ रात्रि में संगीत संध्या का विशेष आयोजन प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में वैदिक परंपरा की जागृति, सामाजिक कुप्रथाओं पर मंथन तथा ग्रामीण जीवनोपयोगी विषयों पर विशेष चर्चाएँ होंगी।
कृषि एवं जैविक खेती पर विशेष सत्र
इस वर्ष कार्यक्रम में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय, मोदीपुरम, मेरठ के कृषि वैज्ञानिकों की एक टीम विशेष रूप से आमंत्रित की गई है। वे खेती-किसानी, पशुपालन और जैविक कृषि पर विस्तृत जानकारी देंगे।
इसके अतिरिक्त, कृषि रसायनों, पशुओं एवं मानव जीवन में उपयोगी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के विक्रेताओं को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे किसान और ग्रामीण समुदाय लाभान्वित हो सकें।
योग और चिकित्सा परामर्श
योगीराज डॉ. विश्वपाल जयंत सरस्वती द्वारा योग और नाड़ी परीक्षण के माध्यम से आयुर्वेदिक चिकित्सा परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लोगों को प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
शुभारंभ एवं विशिष्ट अतिथि
22 मार्च को महोत्सव का शुभारंभ वैदिक कन्या गुरुकुल, दबथला, मेरठ की ब्रह्मचारिणी एवं आचार्य प्रमोद कुमार द्वारा वेदमंत्रों के सुमधुर गायन से किया जाएगा। इस अवसर पर प्रमुख गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे, जिनमें:
- डॉ. कुलदीप उज्ज्वल (पूर्व राज्य मंत्री)
- प्रसन्न चौधरी (विधायक, शामली)
- डॉ. सहेन्द्र सिंह (पूर्व विधायक, छपरौली)
- गजेंद्र कुमार मुन्ना (पूर्व विधायक, छपरौली)
- डॉ. सचिन राणा (अध्यक्ष, आर्य महाविद्यालय)
- ओमपाल सिंह शास्त्री (प्रबंधक)
- आचार्य ब्रह्मदत्त (प्राचार्य)
- सुरेन्द्रपाल सिंह (संयोजक)
- विद्यालय के शिक्षकगण और छात्रगण
पूर्व विधायक एडवोकेट श्री नरेंद्र सिंह ने कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु आयोजकों को शुभकामनाएँ एवं आशीर्वाद प्रेषित किया है।
समापन
आर्य महाविद्यालय किरठल का यह वार्षिकोत्सव न केवल वैदिक परंपरा, शिक्षा और समाज सुधार की प्रेरणा देगा, बल्कि ग्रामीण जीवन के उत्थान हेतु व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तुत करेगा।
यह त्रिदिवसीय आयोजन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा, जिसमें शिक्षा, संस्कृति और समाजसेवा का उत्कृष्ट संगम देखने को मिलेगा।
