मेरठ का सेंट्रल मार्केट : 40 हजार करोड़ के बाजार पर संकट के बादल

विकास

मेरठ शहर का सेंट्रल मार्केट, जो एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, आज एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, शास्त्रीनगर आवासीय कॉलोनी में विकसित इस बाजार में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां अवैध घोषित की गई हैं। इसके चलते 7000 से अधिक संपत्तियां तोड़ने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे हजारों परिवार और व्यापारी प्रभावित होंगे।

बाजार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शास्त्रीनगर कॉलोनी की स्थापना 1974 में आवास विकास द्वारा की गई थी। शुरू में यहां 400 रुपये से 700 रुपये वर्ग मीटर की दर से प्लॉट आवंटित किए गए थे। समय के साथ-साथ इस इलाके की कीमतें बढ़ती गईं और आज यहां प्रति वर्ग मीटर की दर लाखों में पहुंच गई है। बढ़ती आबादी और व्यावसायिक आवश्यकताओं के चलते, यहां व्यापारिक गतिविधियां शुरू हुईं। अस्पताल, रेस्टोरेंट, होटल और दुकानें बड़ी संख्या में स्थापित हो गईं, जिससे यह क्षेत्र मेरठ का सबसे व्यस्ततम व्यापारिक केंद्र बन गया।

विवाद की जड़ें

आवास विकास के अनुसार, यह इलाका केवल आवासीय उपयोग के लिए था, लेकिन यहां बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं, जो कानून के अनुसार अवैध हैं। यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, तो शीर्ष अदालत ने इन अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए। हाल ही में, एक इमारत पर कार्रवाई शुरू की गई है और बिजली-पानी काटने की तैयारियां भी हो रही हैं।

व्यापारियों का पक्ष

व्यापारियों का कहना है कि आवास विकास ने कमर्शियल जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी थी, जिसके कारण लोगों ने मजबूरी में अपने घरों में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कीं। साथ ही, सरकारी तंत्र ने भी लंबे समय तक रिश्वत लेकर इन गतिविधियों को नजरअंदाज किया। अब, जब हजारों लोग यहां रोजगार से जुड़े हैं, तो सरकार और प्रशासन इन्हें उखाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

व्यापारियों की मांग

  1. लैंड यूज परिवर्तन: सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे इलाके को ‘मिक्स्ड लैंड यूज’ घोषित करे ताकि बाजार को बचाया जा सके।
  2. कानूनी वैधता: व्यावसायिक गतिविधियों की वैधता को बनाए रखने के लिए उचित कर प्रणाली लागू की जाए।
  3. स्थायी समाधान: मास्टर प्लान 2031 में इन बाजारों को शामिल कर वैध बाजारों के रूप में घोषित किया जाए।

सरकार और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर सरकार को पहल करनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी चाहिए। सरकार दिल्ली के उदाहरण को अपनाकर ‘मिक्स्ड लैंड यूज’ नीति लागू कर सकती है, जिससे व्यापार और आवासीय जरूरतों में संतुलन बना रह सके।

मेरठ का सेंट्रल मार्केट हजारों लोगों की आजीविका का साधन है। यदि इसे ध्वस्त किया जाता है, तो न केवल व्यापारी प्रभावित होंगे, बल्कि लाखों की आबादी को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और सभी पक्षों को संतुष्ट करने के लिए एक व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।

आप इस विषय पर क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में साझा करें।

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