रामजीलाल सुमन की 11 को मेरठ में पीडीए पंचायत: सपा की राजनीति का नया अध्याय

Politics वेस्ट यूपी

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन 11 मई को मेरठ में ‘पीडीए पंचायत’ का आयोजन करने जा रहे हैं। यह पंचायत केवल एक आम सभा नहीं है — यह उत्तर प्रदेश की बदलती राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। राणा सांगा को लेकर दिए गए उनके विवादित बयान, करणी सेना का विरोध और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का बचाव — इन सबने इस पंचायत को विशुद्ध सियासी रणनीति में बदल दिया है।

राणा सांगा विवाद: राजनीति के केंद्र में इतिहास

रामजीलाल सुमन ने हाल ही में राज्यसभा में कहा था कि बाबर को भारत लाने वाला राणा सांगा था। अगर मुसलमान बाबर की औलाद हैं तो तुम (राजपूत) गद्दार राणा सांगा की औलाद हो।”
सुमन का यह बयान तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और करणी सेना समेत कई राजपूत संगठनों ने इसे “राजपूत गौरव पर हमला” करार दिया। आगरा में करणी सेना ने प्रदर्शन किया और कथित तौर पर रामजीलाल सुमन के काफिले पर हमला भी किया गया।

यह विवाद अब केवल इतिहास की व्याख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दलित-ठाकुर सामाजिक तनाव, जातीय पहचान और सियासी ध्रुवीकरण के बीच जा पहुंचा है।

अखिलेश यादव का स्पष्ट पक्ष: दलित सम्मान बनाम सामंती प्रतीकवाद

जहां अधिकतर दल विवाद से बचते नजर आए, वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सुमन के बयान का बचाव करते हुए साफ कर दिया कि उनकी पार्टी दलित सम्मान के साथ खड़ी है। उन्होंने संकेत दिया कि यह संघर्ष केवल “इतिहास” का नहीं, बल्कि “सामाजिक न्याय और आत्मसम्मान” का है।

सुमन के बहाने अखिलेश सियासत की उस धारा को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) एक साझा मोर्चा बनाएं।

मेरठ की पंचायत: सपा की चुनावी रणनीति का अगला पड़ाव

मेरठ का कार्यक्रम संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सियासी निर्णय है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह इलाका जातीय विविधता और राजनीतिक रूप से सजग मतदाताओं के लिए जाना जाता है। दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग — तीनों ही तबके यहां निर्णायक प्रभाव रखते हैं।

सपा मुखिया अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने मेरठ के जिला और महानगर अध्यक्ष को रामजीलाल सुमन की पीडीए पंचायत के लिए ये पत्र भेजकर तैयारियों में जुटने को कहा है। मेरठ में ये पंचायत 11 मई 2025 को प्रस्तावित है।

मेरठ में पीडीए पंचायत आयोजित कर सपा यह संदेश देना चाहती है कि वह अब केवल यादव और मुस्लिम राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दलितों को भी नेतृत्व और हिस्सेदारी देना चाहती है।

बसपा की निष्क्रियता और दलित नेतृत्व का रिक्त स्थान

बहुजन समाज पार्टी पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ती जा रही है। मायावती की सीमित सक्रियता और संगठनात्मक शिथिलता ने दलित मतदाताओं को नए विकल्प की तलाश में धकेल दिया है।
ऐसे में रामजीलाल सुमन का उभार सपा के लिए दलित नेतृत्व की खाली जगह भरने का एक अवसर बनता जा रहा है। सपा इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती।

करणी सेना का विरोध: एक प्रतीकात्मक ध्रुवीकरण

करणी सेना के विरोध को सपा केवल बयानबाज़ी के रूप में नहीं देख रही। पार्टी इसे दलित बनाम ठाकुर विमर्श की शक्ल में जनता के सामने रख रही है। रामजीलाल सुमन पर हमले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘दलित स्वाभिमान पर हमला’ कहा।

सुमन की पंचायत इस मुद्दे को ज़मीन पर जनता के बीच ले जाने की कोशिश है। सपा की यह रणनीति न केवल सहानुभूति जगाने की है, बल्कि नए राजनीतिक समीकरण गढ़ने की भी है।

 सपा की पीडीए रणनीति कितनी सफल होगी?

रामजीलाल सुमन की मेरठ में प्रस्तावित पंचायत केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है — यह सपा की पीडीए रणनीति का परीक्षण भी है। सुमन के विवाद को पार्टी ने “राजनीतिक अवसर” में बदलने की कोशिश की है, और उसका उद्देश्य साफ है — दलित नेतृत्व के सहारे एक नया सामाजिक गठबंधन खड़ा करना।

अब देखना यह है कि सपा की यह रणनीति केवल चर्चा तक सीमित रहती है या वास्तव में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक मजबूत सामाजिक मोर्चा खड़ा कर पाती है। समाजवादी पार्टी के नेता और पथिक सेना के अध्यक्ष मुखिया गुर्जर दावा करते हैं कि 2027 में समाजवादी पार्टी के पीडीए के फार्मूले का ही दबदबा रहेगा। मुखिया ने मेरठ में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा लगाने की मांग भी हाल ही में उठाई है। मुखिया गुर्जर ने एक वीडियो जारी करते हुए करणी सेना को चेतावनी दी है कि अगर उनमें दम है तो रामजीलाल सुमन को मेरठ पहुंचने से रोककर दिखाएं।


सपा नेता सुरक्षा की मांग को लेकर डीएम से मिलने पहुंचे

समाजवादी पार्टी 11 मई को पीडीए की बैठक आयोजित करेगी। बैठक में राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन मुख्य रूप से शामिल होंगे। बैठक की अनुमति व सांसद की सुरक्षा के लिए किठौर विधायक शाहिद मंजूर, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी योगेश वर्मा और पार्टी के जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी, महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी, मुखिया गुर्जर आदि कलक्ट्रेट पहुंचे।

रामजीलाल सुमन की सुरक्षा की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे समाजवादी पार्टी के नेता।

PoliticalAdda.com पर हम आने वाले समय में इस पंचायत की जमीनी रिपोर्ट और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी प्रस्तुत करेंगे।

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