गांव में रहस्यमयी मौतों और बीमारियों की जांच को पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम, ग्रामीण बोले – यह राहत नहीं, सिर्फ औपचारिकता है
Dr.Ravindra Rana/ Rajesh Sharma
बागपत, 19 जून 2025 |
बागपत जिले के बूढ़पुर गांव में अचानक फैल रही बीमारियों और रहस्यमयी मौतों को लेकर स्वास्थ्य विभाग आखिरकार हरकत में आया। लगातार मीडिया रिपोर्टिंग और जनदबाव के चलते आज सीएमओ की ओर से गठित एक विशेष मेडिकल टीम गांव पहुंची। यह टीम गांव में कैंप लगाकर प्राथमिक जांच करेगी और बीमारियों के संभावित कारणों की पड़ताल करेगी।

यह कार्रवाई हमारी टीम और स्वतंत्र पत्रकारों द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद ही संभव हो पाई है।
कौन-कौन शामिल था टीम में?
सीएमओ कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, मेडिकल टीम में शामिल थे:
डॉ. दीपक कुमार (मुख्य प्रतिनिधि चिकित्सक)
डॉ. प्रेमचंद यादव (चेस्ट रोग विशेषज्ञ)
डॉ. अजय कुमार (मेडिसिन विशेषज्ञ)
डॉ. रेखा (ईएनटी विशेषज्ञ)
डॉ. गीता देवी (महिला चिकित्सक, बड़ौत)
टीम के साथ एंबुलेंस, स्टाफ और सीमित जांच संसाधन मौजूद थे।

टीम ने कुछ मरीजों की जांच की, खांसी, त्वचा रोग, बुखार और श्वसन संबंधी समस्याएं देखने को मिलीं। कुछ मरीजों को दवाएं भी दी गईं, लेकिन गांव में मौजूदा गंभीर हालातों को देखते हुए यह इलाज ऊंट के मुंह में जीरा जैसा साबित हो रहा है।
टीम ने केवल सतही निरीक्षण किया — न किसी पानी के सैंपल लिए, न मिल से निकले रासायनिक अपशिष्ट की पड़ताल की। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कोई विस्तृत रिपोर्ट कब तक आएगी।
ग्रामीणों की नाराजगी
मास्टर मनोज , गांव के जा जागरुक नागरिक बोले:
“कई मौतें हो गईं, बच्चे बीमार हैं। डॉक्टर आए, दवा दी और चले गए। न जांच, न रिपोर्ट। यह महज खानापूर्ति है।”
चौधरी सुधीर ने कहा:
“गांव के हैंडपंप का पानी बदबू देता है, फिर भी कोई टेस्ट नहीं किया गया। असली समस्या को नजरअंदाज़ किया जा रहा है।”
असली मुद्दा: रमाला मिल और ज़हरीला पानी
ग्रामीणों और पत्रकारों ने पहले ही इस बात की ओर ध्यान दिलाया था कि रमाला चीनी मिल और अन्य उद्योगों से निकलने वाला ज़हरीला पानी खेतों और नालियों के माध्यम से गांव में घुस रहा है। यह प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। परंतु सीएमओ टीम ने मिल या नालों का निरीक्षण नहीं किया।












बूढ़पुर गांव में सीएमओ की टीम की उपस्थिति एक प्रतीकात्मक शुरुआत ज़रूर है, लेकिन इसे समाधान मान लेना एक भूल होगी। अब आवश्यकता है:
नियमित मेडिकल कैंप
प्रदूषित जल और वायु की लैब जांच
रमाला मिल की पर्यावरणीय ऑडिट
पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा और इलाज
हम यह सवाल उठाते रहेंगे कि प्रशासन कब तक सिर्फ कागज़ी कार्यवाही करता रहेगा? क्या ज़मीनी हकीकत भी बदलेगी?

