Dr. Ravindra Rana/ Rajesh Sharma
शामली, 18 जून 2025:
उत्तर प्रदेश के शामली जिले से राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के विधायक प्रसन्न चौधरी की एक तस्वीर आज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पथ संचालन कार्यक्रम पर पुष्पवर्षा करते नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एक गहरी हलचल पैदा कर चुकी है।
क्या यह महज़ आदर्शवाद है या रणनीतिक कदम?
आरएलडी लंबे समय से किसानों, मजदूरों, और खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट और मुस्लिम समुदायों के हितों की राजनीति करता रहा है। ऐसे में एक आरएलडी विधायक द्वारा आरएसएस जैसे हिंदुत्ववादी संगठन के कार्यक्रम में खुले समर्थन का यह दृश्य एक साधारण इत्तेफाक नहीं माना जा रहा। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह एक “आदर्शवादी सद्भाव का प्रतीक” है, या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी है?
क्या आरएलडी बदल रही है अपनी दिशा?
प्रसन्न चौधरी का यह कदम कहीं न कहीं इस ओर इशारा कर रहा है कि आरएलडी का एक धड़ा भाजपा और आरएसएस की ओर वैचारिक झुकाव दिखा रहा है। यह संकेत उस समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर धीरे-धीरे गर्म हो रही है।
क्या यह आरएलडी और आरएसएस के बीच “सॉफ्ट एलायंस” की शुरुआत है? या फिर यह व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया कदम है?
मुस्लिम वोटर्स पर क्या असर पड़ेगा?
आरएलडी की वोट बैंक की बुनियाद जाट और मुस्लिम एकता पर टिकी रही है। लेकिन आरएसएस के कार्यक्रम में भागीदारी और पुष्पवर्षा की यह तस्वीर निश्चित ही मुस्लिम समुदाय में असहजता पैदा कर सकती है।
यह सवाल गंभीर है कि क्या यह कदम आरएलडी के मुस्लिम समर्थकों में असमंजस और अविश्वास का कारण बनेगा?
क्या यह समुदाय इसे आरएलडी की विचारधारा में बदलाव के रूप में देखेगा?
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
यह तस्वीर जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आई, राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
कुछ ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बताया, तो कुछ ने इसे राजनीतिक अवसरवाद की संज्ञा दी।
ट्विटर और फेसबुक पर लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि —
“क्या आरएलडी अब भाजपा की ओर बढ़ रही है?”
“क्या यह किसानों की पार्टी का वैचारिक विचलन है?”
आरएलडी की चुप्पी क्या इशारा करती है?
अब तक आरएलडी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तस्वीर पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
प्रसन्न चौधरी ने भी इस मामले पर मीडिया से बात नहीं की है। उनकी यह चुप्पी और भी अधिक सवालों को जन्म दे रही है।
क्या यह पार्टी स्तर पर कोई नई रणनीति का हिस्सा है, या फिर विधायक का व्यक्तिगत निर्णय?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे प्रतीकात्मक कदम कभी-कभी बहुत बड़े बदलाव का संकेत देते हैं।
प्रसन्न चौधरी का यह कदम अगर पार्टी की मंजूरी से है, तो यह आरएलडी की भविष्य की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
यदि यह व्यक्तिगत स्तर पर उठाया गया है, तब भी यह पार्टी को अपने परंपरागत वोट बैंक और वैचारिक रेखाओं पर पुनर्विचार करने को मजबूर करेगा।
अब नजरें इस पर टिकी हैं कि आरएलडी नेतृत्व और मुस्लिम समुदाय इस घटनाक्रम को किस नजर से देखते हैं, और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर कैसा पड़ता है।
आपकी राय क्या है? क्या यह बदलाव की शुरुआत है या एक चौंकाने वाला अपवाद?

