मेरठ, 24 जून 2025:
संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश की ओर से आज जिलेभर में बिजली के निजीकरण, प्रस्तावित मूल्य वृद्धि और बिजली से जुड़ी अन्य जनविरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। इस क्रम में मेरठ जनपद के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि बिजली विकास का आधार है और इसे मुनाफे का जरिया बनाना आम जनता के अधिकारों का उल्लंघन है। मोर्चा ने बिजली दरों में 30 से 45 प्रतिशत तक की वृद्धि के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि घाटे का जो तर्क दिया जा रहा है वह पूरी तरह से भ्रामक है। जबकि सरकारी विभागों और बड़े उपभोक्ताओं पर 72,000 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है, जिसे वसूला जाना चाहिए।

संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश की प्रमुख मांगें:
- दक्षिणांचल व पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का फैसला तुरंत वापस लिया जाए।
- स्मार्ट मीटर, रेट ईंधन से जोड़ना, और अलग-अलग समय के रेट निर्धारण जैसी जनविरोधी नीतियां रद्द की जाएं।
- बिजली दरों में 45% बढ़ोतरी के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए।
- किसानों को 18 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे, और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- 300 यूनिट तक फ्री बिजली और ट्यूबवेल बिल माफी के पुराने वादों को लागू किया जाए।
- बिजली उपभोक्ताओं से वसूले गए अवैध टैक्स (₹31725 करोड़) को बिलों में समायोजित किया जाए।
- कनेक्शन काटने व जोड़ने पर ली जाने वाली फीस समाप्त की जाए।
- बिजली विभाग में खाली पदों को भरा जाए और संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए।
- जर्जर तार, खंभे और ट्रांसफार्मरों को बदला जाए ताकि दुर्घटनाएं रोकी जा सकें।
- गन्ने की एमएसपी ₹500 प्रति कुंतल तय की जाए, बकाया भुगतान हो और बंद चीनी मिलें दोबारा चालू की जाएं।
- सहकारिता विभाग द्वारा किसानों पर बढ़ाए गए ब्याज को तत्काल वापस लिया जाए।
संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता मनीष भारती ने कहा कि अगर सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

