मेरठ: स्वामी पूर्णानंद सरस्वती की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित प्रेरणा सभा में गूढ़ वैदिक मंथन की शुरुआत हुई, जहाँ डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री और डॉ. सत्यपाल सिंह ने चर्चित वक्तव्य प्रस्तुत किए।
कुंभ स्नान, पापमोचन और पुनर्जन्म पर डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री का बड़ा बयान
समारोह की शुरुआत में ही डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री ने कुंभ स्नान और पापमोचन की अवधारणा पर कटाक्ष करते हुए कहा,
“कुंभ नहाने से पाप धुल जाएंगे, यह अवधारणा पूरी तरह गलत है। शंकराचार्य ने कहा था कि स्नान से पाप धुल जाते हैं, तो जो यह मानते हैं वे कुंभ स्नान करने आएं और जो नहीं मानते, वे न आएं। पाप कोई उबटन नहीं है, जो सिर्फ नहाने से धुल जाएगा। यह क्या बकवास है! सनातन धर्म के नाम पर फैलाई जा रही इस अवधारणा में यदि पाप धुल जाते तो पुनर्जन्म का सिद्धांत ही अस्तित्वहीन हो जाता। ईसाई, इस्लाम और यहूदी पुनर्जन्म नहीं मानते, जबकि आर्य धर्म, वैदिक धर्म और सनातन धर्म पुनर्जन्म के सिद्धांत को मानते हैं। हमें अपने कर्मों का फल तो भुगतना ही होगा।”
उन्होंने आगे जोड़ते हुए उल्लेख किया कि मौनी अमावस्या की रात में तीन बजे, जब हजारों लोग रेत पर लेटे हुए थे, पुलिस के इंतजाम पूरी तरह फेल हो गए थे। यदि केवल स्नान से मुक्ति मिल जाती, तो परलोक, पुनर्जन्म और कर्मफल के सिद्धांत पर प्रश्न चिह्न लग जाता।

डॉ. सत्यपाल सिंह ने खारिज कर दी डार्विन की विकासवाद की थ्योरी
पूर्व सांसद और विचारशील वक्ता डॉ. सत्यपाल सिंह ने ईश्वर के स्वरूप एवं मानव विकास के सिद्धांत पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया,
“ईश्वर को जानने वाले लोग लाखों में एक-दो ही होते हैं। जब तक हम ईश्वर को सही मायने में पहचान नहीं पाएंगे, तब तक मानवता का कल्याण संभव नहीं है। अगर किसी को बुखार हो जाए और यह न पता हो कि वह मलेरिया है या कोविड का फीवर, तो इलाज कैसे होगा? इसी प्रकार, अगर ईश्वर का स्वरूप मालूम नहीं, तो पूजा, मंदिर जाना या घंटी बजाना बेकार हो जाता है।”
डॉ. सत्यपाल सिंह ने आगे कहा,
“ईश्वर ही पूर्ण है, वही सर्वशक्तिमान है, परन्तु ईश्वर सबकुछ करने में समर्थ नहीं हैं – वे दूसरा ईश्वर नहीं बना सकते, ईश्वर जन्म नहीं लेते, न ईश्वर सोते हैं। जब तक हम वेदों का ज्ञान नहीं अपनाते, तब तक ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का बोध नहीं हो सकता। और यह सत्य है कि जो कहते हैं कि बंदर से आदमी बना, वे डार्विन की विकास थ्योरी पर अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं। विकास की यह थ्योरी गलत है, क्योंकि हर जीव को ईश्वर ने परस्पर भिन्न स्वरूप में रचा है।”
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प्रेरणा सभा में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस आयोजन में कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ मौजूद रहीं। लोकतंत्र सेनानी चौधरी जयपाल सिंह और छपरौली से पांच बार विधायक रहे चौधरी नरेंद्र सिंह ने स्वामी पूर्णानंद सरस्वती के जीवन के संघर्ष और उनके सामाजिक सुधारों पर विशेष प्रकाश डाला। साथ ही,
- मेरठ के पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल
- चांदपुर विधायक स्वामी ओमवेश
- डॉ वीरोत्तम तोमर
- डॉ पुरुषोत्तम तोमर
- दांघड खाप प्रधान चौधरी कैप्टन विनोद कुमार,
- चौधरी विजेंद्र सिंह धनखड़,
- वयोवृद्ध चौधरी चरण सिंह के सहयोगी चौधरी जयपाल सिंह,
- विद्वान प्रिंसिपल धर्मपाल सिंह त्यागी,
- चौधरी राम छैल सिंह दरीशपुर,
- राष्ट्रीय लोकदल की पूर्व राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष श्रीमती प्रियवंदा तोमर,
- बागपत के पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह व उनकी पत्नी,
- हिंद केसरी पहलवान सुभाष मलकपुर,
- पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह
- प्रभात राय, पूर्व आईएएस
- डा अनिल नौसरान
जैसे अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार रखे।

समग्र वैदिक मंथन और संदेश
समारोह में दिन भर सनातन धर्म के सिद्धांतों, पुनर्जन्म, कर्मफल और ईश्वर के स्वरूप पर गहन विमर्श हुआ। डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री और डॉ. सत्यपाल सिंह के कटाक्षों से यह संदेश प्रबल हुआ कि केवल बाहरी क्रियाओं से पाप का नाश नहीं हो सकता और मानव विकास व जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने के लिए प्राचीन वैदिक ज्ञान का अध्ययन अनिवार्य है।

समारोह के समापन पर उपस्थित सभी ने स्वामी पूर्णानंद सरस्वती के आदर्शों का अनुसरण करने और समाज सेवा के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने का संकल्प लिया। इस भव्य कार्यक्रम के आयोजक वेस्ट यूपी के प्रख्यात छाती रोग विशेषज्ञ डॉ वीरोत्तम तोमर ने किया।

स्वामी पूर्णानंद सरस्वती की जयंती पर आयोजित समारोह में पहुंचे गणमान्य लोग।
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